यूपी में राज्यसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा प्लान, 8 सीटों पर नए चेहरों की तैयारी, इन नामों पर मंथन

यूपी में राज्यसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा प्लान, 8 सीटों पर नए चेहरों की तैयारी, इन नामों पर मंथन


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज कर दिया है. बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में राज्यसभा के साथ-साथ शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए संभावित नामों पर भी चर्चा हुई है. माना जा रहा है कि शिक्षक और स्नातक एमएलसी के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान पार्टी जल्द कर सकती है.

राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के अंदर इस बार कुछ अलग रणनीति पर काम होने की चर्चा है. पार्टी 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है और इनमें बड़ी संख्या में नए चेहरों को मौका देने की तैयारी बताई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, 5 से 6 मौजूदा राज्यसभा सांसदों की जगह नए नेताओं को भेजने पर विचार चल रहा है.

राज्यसभा के लिए क्या है बीजेपी का फॉर्मूला?
बीजेपी की तैयारी सिर्फ नाम तय करने तक सीमित नहीं है. पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा के जरिए भी अलग-अलग समाजों को साधने की कोशिश कर सकती है. संभावित सूची में ओबीसी, दलित, सवर्ण, जाट और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े चेहरों को जगह देने की चर्चा है.

पार्टी के अंदर चल रही चर्चा के मुताबिक, बीजेपी इस बार राज्यसभा में करीब 6 नए चेहरों को मौका दे सकती है. इनमें कुछ ऐसे नेता भी हो सकते हैं, जिन्हें संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है.

स्मृति ईरानी से लेकर हरीश द्विवेदी तक नाम चर्चा में
राज्यसभा के संभावित चेहरों में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी चर्चा में है. इसके अलावा हरीश द्विवेदी के नाम पर भी मंथन की बात सामने आ रही है. ब्राह्मण चेहरे के तौर पर हरीश द्विवेदी को मौका दिए जाने की चर्चा है. पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ का नाम भी संभावित सूची में बताया जा रहा है. चर्चा है कि उन्हें बीएल वर्मा की जगह राज्यसभा भेजा जा सकता है.

वहीं डॉ. दिनेश शर्मा की जगह भी बीजेपी किसी नए ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगा सकती है. हालांकि इन सभी नामों पर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा.

दलित और ओबीसी चेहरे भी रेस में
बीजेपी के संभावित फॉर्मूले में दलित और ओबीसी समाज को भी खास जगह देने की चर्चा है. दलित चेहरे के तौर पर पूर्व राज्यसभा सांसद जुगल किशोर और विद्यासागर सोनकर के नाम सामने आ रहे हैं. ओबीसी वर्ग से बीजेपी के प्रदेश ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष प्रकाश पाल और प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय शाक्य के नामों की चर्चा है. वहीं जाट चेहरे के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें भी तेज हैं. इसके अलावा बीजेपी के पुराने प्रदेश पदाधिकारियों में से किसी एक नेता को भी राज्यसभा भेजे जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है.

5-6 पुराने चेहरों की जगह नए नेता?
इस बार बीजेपी की सबसे बड़ी रणनीति मौजूदा सांसदों को लेकर बताई जा रही है. पार्टी करीब 5 से 6 मौजूदा राज्यसभा सांसदों को दोबारा मौका देने के बजाय नए चेहरों को संसद भेज सकती है. यानी राज्यसभा के टिकट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. पार्टी अगर इस फॉर्मूले पर आगे बढ़ती है तो कई पुराने चेहरों की जगह संगठन में काम कर रहे नेताओं को संसद पहुंचने का मौका मिल सकता है.

2027 के लिए जातीय समीकरण पर नजर
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. ऐसे में राज्यसभा चुनाव बीजेपी के लिए सिर्फ संसद की सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी अलग-अलग समाजों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है. संभावित फॉर्मूले में ओबीसी की हिस्सेदारी बढ़ाने, दलित समाज को प्रतिनिधित्व देने और सवर्ण समाज से भी कई चेहरों को जगह देने की चर्चा है. एक अल्पसंख्यक चेहरे को भी मौका दिए जाने की बात सामने आ रही है.

आठवीं सीट के लिए सपा के वोटों पर नजर
बीजेपी की नजर आठवीं राज्यसभा सीट पर भी है. पार्टी के पास अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या में विधायक हैं, लेकिन आठवीं सीट के लिए वोटों का गणित अहम होगा. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इसके लिए सपा के खेमे में सेंध लगाने की रणनीति पर भी काम कर सकती है. हालांकि किसी विधायक के पाला बदलने या क्रॉस वोटिंग को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि बीजेपी पुराने चेहरों को दोहराती है या इस बार राज्यसभा के जरिए पूरी तरह नए नेताओं को आगे लाती है. उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.



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