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Mayawatis politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी के देशव्यापी संगठन को तीन नए सेक्टरों में बांटने का ऐलान किया है. पहले सेक्टर में 10 राज्यों की जिम्मेदारी रामजी गौतम और सुरेश राव को दी गई है, जबकि दूसरे सेक्टर में 9 राज्यों की कमान वरिष्ठ नेताओं की टीम संभालेगी. सबसे अहम तीसरे सेक्टर में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को रखा गया है, जिसकी निगरानी लखनऊ स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय से सीधे होगी. मायावती ने प्रभारियों को राहत कार्यों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने के निर्देश भी दिए हैं.
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के संचालन के लिए थ्री सेक्टर प्लान बनाया है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही अभी समय बाकी हो, लेकिन प्रदेश की सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक ऐसा बड़ा संगठनात्मक दांव खेला है, जिसे सीधे 2027 की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. मायावती ने पार्टी के पूरे देशव्यापी संगठन को तीन नए सेक्टरों में बांटने का बड़ा ऐलान किया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या बसपा बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक अपनी चुनावी मशीनरी को फिर से नए सिरे से धार दे रही है? क्या मायावती का यह नया फॉर्मूला यूपी के राजनीतिक समीकरणों में नई हलचल पैदा कर देगा?
तीन सेक्टरों में बंटा बसपा का साम्राज्य
बीएसपी की ओर से जारी एक विस्तृत पोस्ट में पार्टी सुप्रीमो ने संगठन के इस नए ढांचे की पूरी रूपरेखा पेश की.
- सेक्टर नंबर 1: इसमें देश के 10 राज्य शामिल किए गए हैं. इस पूरे सेक्टर की कमान बसपा सांसद रामजी गौतम और वरिष्ठ नेता सुरेश राव संभाल रहे हैं. ये दोनों केंद्रीय सेक्टर प्रभारी के रूप में काम देखेंगे.
- सेक्टर नंबर 2: इस सेक्टर में कुल 9 राज्यों को रखा गया है. पूर्व राज्यसभा सांसद और पूर्व विधायकों की एक समर्पित टीम को यहाँ का प्रभार सौंपा गया है.
- सेक्टर नंबर 3: यह सबसे महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल सेक्टर है. इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बड़े राज्यों को रखा गया है.
लखनऊ से सीधे कंट्रोल होगा ‘सेक्टर 3’
आवश्यकता पड़ने पर मायावती राष्ट्रीय प्रभारी ईशान आनंद को भी इन राज्यों में भेज सकती हैं. फिलहाल वह खुद भी यूपी और उत्तराखंड के हर राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं.
राहत कार्य और जमीनी कनेक्ट पर जोर
पार्टी संगठन को धार देने के साथ-साथ मायावती ने अपने प्रभारियों को जनहित के मुद्दों से जुड़ने के सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने सेक्टर 1 और सेक्टर 2 के प्रभारियों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों की तुरंत मदद करें.
इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से केवल औपचारिकता न निभाकर पीड़ितों और किसानों को धरातल पर फौरन राहत पहुंचाने का अनुरोध किया है.
क्या फिर पलटेगी यूपी की बाजी?
बसपा के अंदरूनी घटनाक्रमों में अक्सर बड़े बदलाव देखने को मिलते रहते हैं. कभी संगठन में बड़े चेहरों की एंट्री होती है, तो कभी नए प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय की जाती हैं. लेकिन इस बार का ‘3 सेक्टर मॉडल’ साफ संकेत दे रहा है कि मायावती 2027 की लड़ाई के लिए अभी से पूरी तरह गंभीर हैं.
यूपी और उत्तराखंड जैसे राज्यों को सीधे अपने केंद्रीय नियंत्रण में रखकर उन्होंने साफ कर दिया है कि इस बार चुनावी रणनीति में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. अब देखना यह होगा कि मायावती का यह नया संगठनात्मक फॉर्मूला जमीन पर कितना रंग लाता है और 2027 के महासमर में बसपा की किस्मत बदल पाता है या नहीं.