बिहार DGP से CIC तक… आखिर मुख्य सूचना आयुक्त का क्या काम होता है, पद कितना ताकतवर है… कैसे होती है नियुक्ति?

बिहार DGP से CIC तक… आखिर मुख्य सूचना आयुक्त का क्या काम होता है, पद कितना ताकतवर है… कैसे होती है नियुक्ति?


बिहार में DGP की पोस्ट संभालने वाले विनय कुमार अब राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त बन गए हैं. शनिवार को उन्होंने वालेंटरी रिटायरमेंट मांगा था. बिहार सरकार ने न सिर्फ उनका तीन माह का नोटिस पीरियड माफ कर इसे तत्काल मंजूरी दे दी, बल्कि उन्हें राज्य का चीफ इंफॉरमेशन अफसर CIC भी बना दिया. सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी. विनय कुमार की इस नियुक्ति पर सोशल मीडिया पर सवाल भी उठे. लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विनय कुमार का इस्तीफा CIC की नियुक्ति से जुड़ा था. ऐसे में जानते हैं कि आखिर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद कितना ताकतवर होता है और असल में इनका काम क्या होता है?

DGP विनय कुमार इसी साल दिसंबर में रिटायर होने वाले थे. हाल ही में 15 सितंबर से उन्होंने 21 दिन का अवकाश लिया था जो 5 अक्टूबर को पूरा हेाना था. इससे पहले ही उन्होंने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया. सरकार ने तुरंत ही उनका इस्तीफा मंजूर कर उन्हें एक नई जिम्मेदारी भी दे दी. विनय कुमार को CIC चुनने वाली तीन सदस्यीय समिति में सीएम सम्राट चौधरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम रहे.

कहां से आया मुख्य राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद?

भारत में सबसे पहले चीफ इंरफॉरमेशन कमिश्नर की पोस्ट 2005 में बनी थी. दरअसल राइट टू इरफॉर्मेशन एक्ट 2005 पास होने के बाद केंद्र में सेंट्रल इरफॉरर्मेशन कमीशन और राज्य में स्टेट इनफॉर्मेशन कमीशन बनाने का प्रावधान किया गया था. 12 अक्टूबर 2005 को केंद्रीय सूचना आयोग गठित हुआ. इसके बाद राज्यों में इसके गठन की प्रक्रिया पूरी की गई. बिहार में पहले मुख्य सूचना आयुक्त रिटायर्ड जस्टिस शशांक कुमार सिंह बने थे, जिन्होंने 26 अगस्त 2006 को इस पोस्ट को संभाला था.

क्यों पड़ी सूचना आयोग की जरूरत?

केंद्र सरकार ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को लागू कर नागरिकों को यह अधिकार दिया कि वे किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी मांग सकते हैं. यानी अगर कोई व्यक्ति ये जानना चाहता है कि किसी सड़क को बनाने में कितना पैसा खर्च हुआ? किसी अधिकारी की नियुक्ति किस आधार पर हुई या किसी सरकारी योजना में कितने लाभार्थी हैं तो वह सरकार से सीधे जानकारी मांग सकता है. अगर संबंधित विभाग सूचना नहीं देता या अधूरी सूचना देता है तो नागरिक के पास अपील का रास्ता है. इस अपील को सुनने की जिम्मेदारी सूचना आयोग की होती है. यहां तैनात सूचना आयुक्त ही मामलों की सुनवाई करते हैं.

मुख्य सूचना आयुक्त का पद कितना ताकतवर?

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 18, 19, 20 और 25 के तहत आयुक्त को कई अहम शक्तियां दी गई हैं. धारा 18 के तहत आयुक्त शिकायत दर्ज कर जांच कर सकते हैं. जांच के दौरान आयोग के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं. यानी वह किसी भी को समन भेजकर उपस्थित होने या गवाही देने के लिए बुला सकते हैं. दस्तावेजों के निरीक्षण का रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं.

धारा-19 के तहत आयोग संबंधित विभाग को जानकारी देने का आदेश दे सकता है. अगर आवेदक को नुकसान हुआ तो उसे क्षतिपूर्ति भी दी जा सकती है. धारा 20 के तहत संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की भी शक्ति रखता है या आर्थिक जुर्माना लगा सकता है. यह जुर्माना अधिकतम ₹25,000 तक हो सकता है. इसी की धारा 25 के तहत आरटीआई अधिनयम के कार्यान्वयन की निगरानी करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है.

मुख्य सूचना आयुक्त का चुनाव कैसे होता है?

मुख्य सूचना आयुक्त का पद सामान्य सरकारी ट्रांसफर या प्रमोशन वाला नहीं है. किसी भी राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्त RTI एक्ट की धारा 15 के तहत होती है. चयन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री की होती है. बिहार में विनय कुमार की नियुक्ति कराने वाली कमेटी में भी सीएम सम्राट चौधरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम रहे.

कौन बन सकता है?

मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसे कानून, विज्ञान एवं तकनीक, समाजसेवा, मैनेजमेंट, पत्रकारिता, जनसंचार, प्रशासन का अनुभव हो. ऐसा जरूरी नहीं कि ये आईएएस या आईपीएस ही हों. अगर किसी सरकारी अधिकारी को इस पोस्ट पर नियुक्त किया जाता है तो उसकी पुरानी सरकारी सेवा मसाप्त मानी जाती है. 2019 के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में था और उसे सूचना आयोग में नियुक्त किया जाता है, तो नियुक्ति की तारीख से उसे पूर्व सेवा में रिटायर्ड माना जाता है.

कितना होता है कार्यकाल?

पुराने RTI कानून में सूचना आयुक्ता का कार्यकाल 5 साल था, लेकिन RTI Amendment Act, 2019 के बाद कार्यकाल की अवधि 3 साल कर दी गई है. हालांकि ये अधिकतम 65 साल से अधिक नहीं होना चाहिए. इसलिए व्यावहारिक रूप से व्यक्ति को तीन साल का कार्यकाल तभी मिलेगा जब वह उस अवधि में वह 65 वर्ष की सीमा पार न करे.

कितनी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं?

2019 के RTI Rules के अनुसार राज्य सूचना आयुक्त के लिए 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन निर्धारित है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, छुट्टी, सरकारी आवास या भत्ता, यात्रा भत्ता समेत अन्य सुविधाएं मिलती हैं. अगर नियुक्त के समय पहले से पेंशन मिल रही हैं तो उसकी राशि वेतन से समायोजित की जाती है.



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