करण-4 ने किसानों को किया बर्बाद, करण-20 से से हुआ उद्धार, 28 टन ज्यादा पैदावार
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Sugarcane Farming News: गन्ने के कम उत्पादन को लेकर परेशान किसानों के लिए Co-20016 संजीवनी बूटी के तौर पर आया है. पुरानी किस्म के मुकाबले नई किस्म से गन्ने की पैदावार भी बढ़ी है और साथ ही गन्ने में मिठास भी बढ़ी है. इसके अलावा नई किस्म वाले गन्नों में बीमारियों से लड़ने की ज्यादा क्षमता है.
गन्ने की नई किस्म से किसानों की जगी उम्मीदें.
लखनऊः गन्ने के पैदावार को लेकर परेशान किसानों के लिए खुशखबरी है. क्योंकि गन्ने की नई किस्म ने उन सभी किसानों की उम्मीदों को जगा दिया है, जो गन्ने के कम पैदावार को लेकर चिंतित थे. दरअसल, गन्ने की नई किस्म Co-20016 ने गन्ने के उत्पादन के मामले में पुरानी किस्म Co-0238 को पछाड़ दिया है. दरअसल, नए और पुराने दोनों ही किस्मों की एक साथ तीन साल तक ट्रायल चली है. इस ट्रायल में जो नतीजा सामने आया, वो चौंका देने वाला था. क्योंकि प्रति हेक्टेयर में नई किस्म के गन्ने की खेती की गई थी, उसमें 144.6 कुंतल गन्ना पैदा हुआ. जबकि पुरानी किस्म की हुई खेती से केवल 116.4 टन प्रति हेक्टेयर रहा. यानी कि नई किस्म के बीज से 28 टन ज्यादा गन्ना पैदा हुआ. यह बड़ा अंतर किसानों के लिए बहुत जरूरी है. खासतौर पर उन इलाकों में जहां गन्ने की पैदावार लगातार कम हो रही है.
नई किस्म वाले गन्ने में मिठास भी ज्यादा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नई किस्म से केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ा. बल्कि इसमें चीनी यानी कि शुगर की मात्रा भी बढ़ी है. 10 महीने की फसल में Co-20016 के गन्ने के रस में सुक्रोज 18.7 फीसदी मिला. वहीं पुरानी Co-0238 के गन्ने में शुक्रोज 18.3 फीसदी था.
नई किस्म में बीमारी का असर भी कम है
नई किस्म से न केवल गन्ने का उत्पादन और उसका मिठास बढ़ा है. बल्कि लाल सड़न रोग से भी कम ग्रसित हुआ है. यानी कि इस नई किस्म की खासियत यह है कि यह लाल सड़न रोग व रेड रॉट के खिलाफ ज्यादा मजबूत है. यही बीमारी पिछले कुछ साल से यूपी के गन्ना किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. बता दें कि Co-0238 किस्म कभी यूपी में बेहद लोकप्रिय थी. इसका रकबा तेजी से बढ़ा था. लेकिन बाद में रेड रॉट के नए प्रकार CF13 ने इस किस्म को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. इससे खेतों में गन्ने की पैदावार घटने लगी. कई किसानों ने गन्ने का रकबा भी कम कर दिया.
एक हेक्टेयर में 144 टन से ज्यादा उत्पादन
Co-20016 का तीन साल का औसत उत्पादन 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रहा. इसके मुकाबले Co-0238 का उत्पादन 116.4 टन रहा. इस हिसाब से नई किस्म से करीब 24 फीसदी ज्यादा उत्पादन मिला. ट्रायल यूपी समेत उत्तर भारत के गन्ना क्षेत्र में किए गए. नई किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गन्ना प्रजनन संस्थान ने विकसित किया है. इसे Co-0238 के विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. हालांकि किसानों को इसे बड़े स्तर पर लगाने के लिए आधिकारिक मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी मिलने के बाद किसान अगले गन्ना सीजन में इसकी खेती शुरू कर सकते हैं.
यूपी में गन्ने की पैदावार बढ़ाने की उम्मीद
बता दें कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है. ऐसे में नई किस्म का सफल होना किसानों और चीनी मिलों दोनों के लिए अहम है. नई किस्म से ज्यादा गन्ना मिलने पर किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना है. साथ ही चीनी मिलों को भी ज्यादा गन्ना मिल सकता है.