Mira Rajput बच्चों की डाइट में नहीं लगातीं ये रोक-टोक, उनका ‘No Rules’ फूड फॉर्मूला क्यों चर्चा में है?

Mira Rajput बच्चों की डाइट में नहीं लगातीं ये रोक-टोक, उनका ‘No Rules’ फूड फॉर्मूला क्यों चर्चा में है?


Meera Rajput Kids Diet: बच्चों को खाना खिलाना कई माता-पिता के लिए रोज की छोटी-सी चुनौती बन जाता है. कभी बच्चा सब्जी देखकर मुंह बना लेता है तो कभी पसंदीदा चीज के लिए बार-बार जिद करता है. ऐसे में घर में खाने को लेकर नियम बनना आम बात है, लेकिन मीरा राजपूत का बच्चों की डाइट को लेकर नजरिया थोड़ा अलग बताया जाता है. वह खाने को लेकर बहुत ज्यादा रोक-टोक करने के बजाय बच्चों को अपनी पसंद समझने की आजादी देने की बात करती हैं.

उनके इस तरीके में एक दिलचस्प बात यह है कि खाने को लेकर सख्त पाबंदियों की जगह संतुलन और समझ पर जोर दिखाई देता है. यही वजह है कि उनका ‘कोई नियम नहीं’ वाला फूड फॉर्मूला पेरेंटिंग से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

मीरा राजपूत का बच्चों की डाइट को लेकर नजरिया

मीरा राजपूत सोशल मीडिया पर अक्सर लाइफस्टाइल और पेरेंटिंग से जुड़े अपने अनुभव साझा करती रही हैं. बच्चों के खाने की आदतों को लेकर उनका नजरिया यह बताता है कि हर चीज को पूरी तरह प्रतिबंधित करना जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक बच्चे अगर कभी अपनी पसंद की चीज खाना चाहते हैं तो उसे लेकर बहुत ज्यादा सख्ती करने के बजाय पूरे खान-पान के पैटर्न को देखना ज्यादा जरूरी हो सकता है.

यह तरीका उन माता-पिता के लिए दिलचस्प है जो बच्चों को हेल्दी खाना खिलाने की कोशिश में हर पसंदीदा चीज पर रोक लगा देते हैं. कई घरों में चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर या मिठाई को लेकर ऐसा माहौल बन जाता है कि बच्चा इन्हें और ज्यादा पाने की जिद करने लगता है. मीरा के फूड अप्रोच में ऐसी सख्ती से बचने की बात नजर आती है.

‘कोई नियम नहीं’ का मतलब मनमर्जी खाना नहीं

यहां ‘कोई नियम नहीं’ को बच्चों को बिना किसी सीमा के कुछ भी खिलाने के अर्थ में समझना ठीक नहीं होगा. इसका मतलब ज्यादा सख्त फूड रूल्स से बचना और खाने को लेकर अनावश्यक डर या अपराधबोध पैदा न करना हो सकता है.

पसंद और पोषण के बीच संतुलन

मसलन, अगर बच्चा किसी दिन अपनी पसंद की डिश मांगता है तो उसे पूरी तरह गलत बताने के बजाय बाकी भोजन में पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है. घर के सामान्य खाने में दाल, सब्जियां, फल, अनाज, दूध या अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल रहते हैं तो कभी-कभार पसंद की चीज खाना अलग बात है.

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बच्चों के लिए खाने का माहौल भी महत्वपूर्ण होता है, अगर हर निवाले के साथ डांट या दबाव जुड़ा हो तो खाना उनके लिए तनाव का कारण बन सकता है. इसके बजाय माता-पिता शांत तरीके से अलग-अलग विकल्प सामने रख सकते हैं और बच्चे को धीरे-धीरे नए स्वाद आजमाने का मौका दे सकते हैं.

हर बच्चे के लिए एक जैसा फूड फॉर्मूला जरूरी नहीं

मीरा राजपूत का यह नजरिया एक व्यक्तिगत पेरेंटिंग अप्रोच के तौर पर देखा जाना चाहिए. हर बच्चे की उम्र, गतिविधि, पसंद और पोषण संबंधी जरूरतें अलग हो सकती हैं. इसलिए किसी सेलिब्रिटी के फूड रूटीन को ज्यों का त्यों अपनाना जरूरी नहीं है. छोटे बच्चों के मामले में भोजन से जुड़ी विशेष जरूरतें हों या बच्चा बहुत कम चीजें खाता हो तो माता-पिता को बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. खासकर किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी, विकास से जुड़ी चिंता या डॉक्टर की बताई डाइट होने पर सामान्य फूड रूल्स से अलग सलाह की जरूरत पड़ सकती है.

बच्चों के साथ खाने को लेकर कैसे रखें आसान माहौल

घर में खाने को लेकर संतुलित रवैया अपनाने का एक आसान तरीका यह है कि रोज के भोजन में पौष्टिक विकल्प उपलब्ध रहें और बच्चे को उनमें से चुनने की थोड़ी स्वतंत्रता मिले. माता-पिता खुद भी अलग-अलग चीजें खाकर उदाहरण पेश कर सकते हैं.



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