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Gomti Motor Bridge Bageshwar: बागेश्वर में गोमती नदी पर बना गोमती मोटर पुल छह दशक से ज्यादा पुराना होने के बावजूद आज भी शहर की आवाजाही और कारोबार का अहम हिस्सा बना हुआ है. 1960 के दशक में बने इस पुल से अब बस, ट्रक, मालवाहक वाहन और निजी गाड़ियां लगातार गुजरती हैं. पुल बनने के बाद आसपास के इलाकों से बागेश्वर बाजार तक लोगों और सामान की आवाजाही आसान हुई, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी सहारा मिला. खास बात यह है कि बागेश्वर में इससे भी पुराने पुल मौजूद हैं, जिनमें 1913 में बना सरयू नदी का झूला पुल एक सदी से ज्यादा पुराना है.
आज के समय में जब पुलों की मजबूती और उनकी उम्र को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, वहीं बागेश्वर का एक पुराना पुल लंबे समय से लोगों की आवाजाही का हिस्सा बना हुआ है. सरयू और गोमती नदियों के संगम के लिए मशहूर बागेश्वर शहर में गोमती नदी पर बना गोमती मोटर पुल करीब 60 से 64 साल पुराना है. इसके बावजूद आज भी यह पुल बागेश्वर शहर और आसपास के इलाकों के लिए आने-जाने का अहम रास्ता बना हुआ है. छह दशक से ज्यादा समय से लगातार इस्तेमाल में होना इस पुल की खासियत को दिखाता है.
गोमती मोटर पुल का निर्माण 1960 के दशक में उस समय हुआ था, जब पहाड़ी इलाकों में सड़क और यातायात की सुविधा मजबूत करने पर तेजी से काम किया जा रहा था. जिला नागरिक समिति के सदस्य संजय शाह जगाती बताते हैं कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई. इसी दौर में बागेश्वर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क मार्ग और पुलों का महत्व तेजी से बढ़ा. गोमती मोटर पुल भी इसी विकास के दौर का हिस्सा रहा.
गोमती मोटर पुल बनने के बाद आसपास के इलाकों से बागेश्वर बाजार तक लोगों और सामान की आवाजाही आसान हुई. इसका फायदा व्यापारिक गतिविधियों को भी मिला. यानी यह पुल सिर्फ नदी पार करने का रास्ता नहीं रहा, बल्कि बागेश्वर के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही और कारोबार से भी जुड़ गया. इतने साल बाद भी इसका इस्तेमाल जारी है.
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समय के साथ बागेश्वर में वाहनों की संख्या भी बढ़ी है. गोमती मोटर पुल आज राष्ट्रीय राजमार्ग 309A पर यातायात की अहम कड़ी है. बागेश्वर शहर से गुजरने वाले इस रास्ते पर रोज बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन चलते हैं. इससे पुराने पुल पर वाहनों का दबाव भी पहले के मुकाबले बढ़ा है.
गोमती मोटर पुल को बने हुए छह दशक से ज्यादा का समय हो चुका है और इतने लंबे समय में यहां से गुजरने वाले वाहनों की संख्या भी काफी बढ़ गई है. पहले इस पुल पर ट्रैफिक सीमित रहता था, लेकिन अब बस, ट्रक, मालवाहक वाहन और निजी गाड़ियां लगातार गुजरती हैं. भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही से पुराने पुल पर दबाव भी बढ़ा है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पुलों की नियमित तकनीकी जांच और जरूरत के हिसाब से मरम्मत जरूरी होती है, ताकि लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पुल की स्थिति का पता चलता रहे.
गोमती नदी पर बने वर्तमान मोटर पुल से पहले यहां एक पुराना ऐतिहासिक पुल भी हुआ करता था. समय के साथ वह पुल जर्जर हो गया और 1970 के दशक में उसे हटा दिया गया. इसके बाद वर्तमान मोटर पुल ने यातायात की जिम्मेदारी संभाली. वहीं बागेश्वर में 1913 में बना सरयू नदी का झूला पुल भी पुराने पुलों में शामिल है. यह पुल एक सदी से ज्यादा पुराना है और शहर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा माना जाता है.
गोमती मोटर पुल और सरयू नदी का पुराना झूला पुल बागेश्वर में अलग-अलग दौर के विकास और यातायात की कहानी बताते हैं. एक पुल छह दशक से ज्यादा समय से लोगों की आवाजाही का हिस्सा है, जबकि दूसरा एक सदी से भी ज्यादा पुराना है. आज भी गोमती मोटर पुल बागेश्वर के व्यापार और यातायात के लिए जरूरी बना हुआ है. ऐसे पुराने और महत्वपूर्ण पुलों की नियमित जांच और देखभाल होती रहे तो बढ़ते ट्रैफिक के बीच उनकी सुरक्षा भी बनी रह सकती है.