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उदयपुर की 28 वर्षीय डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने मात्र 9 महीनों में दुनिया के 5 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया है. एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के सर्वोच्च शिखरों को सबसे कम समय में फतह करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. माउंट एवरेस्ट से उतरते समय गंभीर फ्रॉस्टबाइट के कारण पैरों की 6 उंगलियां कटवानी पड़ीं, फिर भी साहस दिखाया और हिम्मत नहीं हारीं. अंटार्कटिका के माउंट विन्सन मैसिफ और एवरेस्ट पर फतेह हासिल करने वाली राजस्थान की पहली नागरिक बनीं.
राजस्थान के उदयपुर की 28 साल की डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने पर्वतारोहण की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने सिर्फ 9 महीनों में 5 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया. इनमें एशिया का माउंट एवरेस्ट, यूरोप, अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटियां शामिल हैं.
मनस्वी ने बताया कि इस उपलब्धि के साथ वह इतने कम समय में 5 महाद्वीपों की चोटियां फतह करने वाली देश की सबसे तेज महिला पर्वतारोही बनी हैं. वह माउंट विन्सन मैसिफ पर तिरंगा फहराने वाली राजस्थान की पहली नागरिक भी हैं.
एवरेस्ट पर झेला जानलेवा खतरा
मनस्वी का यह सफर आसान नहीं रहा. माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद करीब 6400 मीटर ऊंचाई पर कैंप-2 की ओर लौटते समय उन्हें गंभीर ग्रेड-3 और ग्रेड-4 फ्रॉस्टबाइट हुआ. इलाज के दौरान उन्हें दोनों पैरों की कुल 6 उंगलियां गंवानी पड़ीं. इस दौरान उनके दल के दो सदस्यों की मौत भी हुई. इसके बावजूद मनस्वी ने हिम्मत नहीं छोड़ी. समय पर इलाज और इंजेक्शन मिलने से उनके पैर बचाए जा सके.
माउंट आबू में मिली पर्वतारोहण की ट्रेनिंग
मनस्वी की पर्वतारोहण की शुरुआत माउंट आबू के स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान से हुई. साल 2021 में परिवार के साथ माउंट आबू आने के दौरान उन्हें इस संस्थान के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने यहां बेसिक और एडवांस पर्वतारोहण की ट्रेनिंग ली. संस्थान की प्राचार्य राजल पटेल के मार्गदर्शन में शुरू हुआ उनका सफर आगे बढ़ता गया और आखिरकार एवरेस्ट से लेकर अंटार्कटिका की बर्फीली चोटियों तक पहुंचा.
पढ़ाई और खेलों में भी बनाई पहचान
डॉ. मनस्वी सिर्फ पर्वतारोहण में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई और खेलों में भी आगे रही हैं. उन्होंने खनन एवं पर्यावरण कानून में पीएचडी की है. इसके अलावा 10 मीटर राइफल शूटिंग और हॉर्स राइडिंग में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है.
माउंट आबू पहुंचने पर मनस्वी का जोरदार स्वागत किया गया. उन्होंने संस्थान की प्राचार्य राजल पटेल सहित पूरी टीम का आभार जताया. मुश्किलों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने वाली मनस्वी की कहानी आज युवाओं के लिए साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गई है.