40 साल से बरकरार है इस दुकान का स्वाद, सुबह से लेकर शाम तक लगी रहती है भीड़, जानें लोकेशन

40 साल से बरकरार है इस दुकान का स्वाद, सुबह से लेकर शाम तक लगी रहती है भीड़, जानें लोकेशन


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Chhatarpur Samosa-Chaat Shop: छतरपुर में 40 साल पुरानी समोसा-चाट की दुकान आलू टिक्की और चाट के स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, जहां सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ रहती है. 17 वर्षीय प्रिंस रैकवार अपने पिता के साथ इस दुकान को संभालते हैं. इस दुकान पर खाने वालों की दिनभर भीड़ लगी रहती है.

Food Story. यूपी के महोबा के 17 वर्षीय प्रिंस रैकवार जो अपने फैमिली बिजनेस को आगे बढ़ा रहे हैं. दरअसल, 40 साल पहले प्रिंस के पापा विनोद रैकवार ने समोसा-चाट की दुकान शुरू की थी जिसका स्वाद चखने आज भी लोग आते हैं. अपने पापा के इसी काम को बेटा प्रिंस आगे बढ़ा रहे हैं. यहां सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक कस्टमर आना शुरू हो जाते हैं. ये दुकान आलू टिक्की और चाट के स्वाद के प्रसिद्ध है.

यूपी के महोबा के प्रिंस रैकवार बताते हैं कि पिछले 40 सालों से समोसा-चाट लोगों को खिला रहे हैं. ये दुकान उनके पापा विनोद रैकवार ने खोली थी. उस दौरान महोबा शहर में गुलाब टॉकीज भी शुरू हुई थी. इसी के साथ हमारी दुकान भी खुली थी, तब से लेकर आज तक ये दुकान अपने स्वाद का जादू बिखेर रही है. टॉकीज तो बंद हो गई है. तहसील नजदीक है. मेन बाजार है तो लोग यहीं से समोसा-चाट खाकर ही निकलते हैं.

प्रिंस बताते हैं कि वह भी पापा के साथ काम सीखने लगे और अब धीरे-धीरे वह भी पूरा काम सीख चुके हैं. समोसा, करेला, पानी-पूरी, आलू-टिक्की, कचौड़ी और चाट सब बना लेते हैं. वह पूरी तरह से फैमिली बिजनेस को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं. हालांकि, वह पढ़ाई भी करते हैं. लेकिन मन पूरी तरह से इसी बिजनेस में लग गया है.

सस्ता और स्वाद भी लाजवाब
प्रिंस बताते हैं कि इस दुकान का स्वाद आज भी लोगों को खींच लाता है. पुरानी दुकान है तो लोगों की विश्वनीयता बनी हुई है. उन्हें पता है कि यहां समोसा चाट से लेकर आलू टिक्की और कचौड़ी सभी की क्वालिटी अलग ही लेवल पर रहती है. भले ही नई दुकानें कंपटीशन में आ गई हैं लेकिन यहां सस्ता और स्वाद दोनों मिल जाता है इसलिए लोगों की पहली पसंद आज भी बनी हुई है.

7 सुबह बजे से लेकर शाम 8 बजे खुलती है दुकान
प्रिंस बताते हैं कि सुबह 7 बजे से ही दुकान खोल लेता हूं. सुबह से लेकर शाम 8 बजे तक दुकान खुली रहती है. समोसा, आलू टिक्की, चाट, कचौड़ी सभी दिनभर बनता रहता है. वह बताते हैं कि दिनभर में कितने लोग खाने आते हैं, नंबर तो नहीं बता सकते हैं लेकिन एक अनुमान के मुताबिक हर दिन 500 से भी ज्यादा कस्टमर आते हैं. 1000 कस्टमर भी आते हैं. यहां हर आइटम 20 रुपए में मिल जाता है. हालांकि, एक समोसा 10 रुपए का है लेकिन 2 ही बनाकर देते हैं इसलिए 20 रुपए का एक कस्टमर खाता ही है.

पढ़ाई के साथ कर रहे बिजनेस
उन्होंने बताया कि वह अभी कक्षा 10वीं की पढ़ाई करते हैं लेकिन पढ़ने में तुरंत नौकरी नहीं मिलनी है इसलिए पापा के बिजनेस को ही आगे बढ़ाना है. अभी पापा भी दुकान में रहते हैं. साथ में एक लड़का भी मदद में रहता है. क्योंकि एक व्यक्ति अकेले मैनेज नहीं कर पाता है. फिलहाल, फैमिली बिजनेस को ही कैरियर के तौर पर चुन लिया है.



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