उज्जैन. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने का विशेष समय माना गया है. इस दौरान परिवारजन दिवंगत परिजनों की पुण्यतिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. पितृ पक्ष में घर के वातावरण को सात्विक और शांत रखने की भी परंपरा है, इसलिए इस अवधि में भोजन, दिनचर्या और व्यवहार को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, श्राद्ध कर्म के लिए शास्त्रों में कई नियम और सावधानियां बताई गई हैं. इसी तरह श्राद्ध या तर्पण के बाद भी कुछ कार्यों से बचने की मान्यता है. आइए जानते हैं वे 5 काम, जिन्हें श्राद्ध के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए.
1. श्राद्ध के बाद घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बनाए रखें. परिवार में किसी से विवाद या बहस करने से बचें. गुस्से में अपशब्द न बोलें और न ही बुजुर्गों का अपमान करें. मान्यता है कि शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने से पितरों की कृपा बनी रहती है.
2. श्राद्ध के दिन घर के द्वार पर कोई जरूरतमंद, गरीब या भूखा व्यक्ति अथवा पशु-पक्षी आए तो उसे डांटकर न भगाएं. मान्यता है कि इस दिन अतिथि और जीवों को अन्न-पानी देने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और श्राद्ध कर्म पूर्ण माना जाता है.
3. पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के बाद पंचबलि का विशेष महत्व माना गया है. ब्राह्मण, गाय, कुत्ते, कौए, चींटी और देवताओं को भोजन कराने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें. मान्यता के अनुसार, भोजन में कम से कम 1 से 3 घंटे का अंतर रखना चाहिए.
4. श्राद्ध या तर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के तुरंत बाद दिन में सोना या विश्राम करना धार्मिक मान्यताओं में उचित नहीं माना जाता है. मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के करीब तीन घंटे बाद ही व्यक्ति को आराम करना चाहिए. इस दौरान संयम और सात्विकता बनाए रखना जरूरी है.
5. श्राद्ध के दिन और पूरे पितृ पक्ष में खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है. इससे मन की शुद्धता बनी रहती है.