बेगूसराय के डीएम ने किनका पांव छूकर आशीर्वाद लिया कि चर्चा में आ गए, कौन हैं आईएएस रिची पांडेय?

बेगूसराय के डीएम ने किनका पांव छूकर आशीर्वाद लिया कि चर्चा में आ गए, कौन हैं आईएएस रिची पांडेय?


बिहार के बेगूसराय में जिलाधिकारी रिची पांडेय की पहचान सिर्फ इस तस्वीर तक सीमित नहीं है. 2016 बैच के आईएएस अधिकारी के तौर पर उनका प्रशासनिक सफर और साहित्यिक विरासत से जुड़ा यह प्रसंग उनकी प्रोफाइल को एक अलग संदर्भ देता है. बता दें कि रिची पांडेय का बेगूसराय से पहले भी प्रशासनिक जुड़ाव रहा है. वे सितंबर 2019 में जिले के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) बने थे और फरवरी 2020 तक इस पद पर रहे. इसके बाद उनका तबादला पटना हुआ. यही वजह है कि बेगूसराय के भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक मिजाज को वे बहुत करीब से पहचानते हैं.

सात साल बाद उसी जिले में लौटे, इस बार डीएम बनकर

पटना के डीडीसी के रूप में उन्होंने कोरोना काल जैसी भीषण चुनौती के दौरान बेहतरीन टीकाकरण और प्रशासनिक समन्वय का परिचय दिया था. करीब सात साल बाद अगस्त 2026 में वे फिर बेगूसराय लौटे, लेकिन इस बार जिलाधिकारी की जिम्मेदारी के साथ. इस दृष्टि से बेगूसराय उनके लिए बिल्कुल नया जिला नहीं है. पहले डीडीसी के रूप में विकास योजनाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े काम देखने के बाद अब उन्हें जिले के समग्र प्रशासन की जिम्मेदारी मिली है.

कौन हैं रिची पांडेय?

रिची पांडेय का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ, लेकिन परिवार मूल रूप से लखनऊ का है. उनके पिता भारतीय ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस में रहे हैं. रिची ने दिल्ली के NSIT से इंजीनियरिंग और देश के टॉप मैनेजमेंट संस्थान फैक्लटी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (FMS) दिल्ली से एमबीए किया है. यूपीएससी की परीक्षा पास करने से पहले उन्होंने कॉर्पोरेट जगत का अनुभव भी लिया. उन्होंने एक नामी एनालिटिक्स फर्म ‘द स्मार्ट क्यूब’ और एक्सिस बैंक के कॉर्पोरेट क्रेडिट विभाग में भी अपनी सेवाएं दी थीं. लेकिन देश सेवा की ललक उन्हें सिविल सर्विसेज की ओर खींच लाई.

यूपीएससी में प्राप्त की 52वीं रैंक

इसके बाद रिची पांडेय ने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी की और 52वीं रैंक प्राप्त की. उन्हें बिहार कैडर मिला और उन्होंने 2017 में गया जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर अपने सफर की शुरुआत की. फिर उन्होंने नीति आयोग में सहायक सचिव और वैशाली के महुआ में एसडीएम के रूप में काम किया. जहानाबाद के डीएम रहते हुए उन्होंने भूमि अभिलेखों (Land records) के डिजिटलाइजेशन (डिजिटल गवर्नेंस) में इतना बेहतरीन काम किया कि खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें दिल्ली में सम्मानित किया था. उन्होंने सीतामढ़ी में डीएम के तौर पर काम किया और अगस्त 2026 में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में वे सीतामढ़ी से बेगूसराय भेजे गए हैं.

सख्त प्रशासक, दिल से कलाकार

बेगूसराय डीएम रिची पांडेय की पत्नी तविशी बहल पांडेय भी अधिकारी हैं और उनकी दो बेटियां हैं. रिची पांडेय की पहचान सिर्फ कड़क अफसर की नहीं है. वह एक बेहतरीन गायक भी हैं. सोशल मीडिया पर उनके गाने अक्सर वायरल होते हैं. सीतामढ़ी में रहते हुए उनका ‘संदेशे आते हैं’ गाना गाते हुए वीडियो खूब वायरल हुआ था. मसूरी ट्रेनिंग के दौरान देश की चर्चित आइएएस अधिकारी टीना डाबी के साथ गाना गाने का वीडियो भी चर्चा में रहा था. सीतामढ़ी में डीएम रहते हुए उन्होंने 850 भूमिहीन परिवारों को जमीन का पट्टा दिलाकर बड़ी उपलब्धि प्राप्त की थी. सड़क किनारे, पोखर के किनारे रह रहे परिवारों को उन्होंने 0.03 से 0.05 एकड़ जमीन दिलाई. उनका मानना है कि सरकारी सेवा का मतलब सिर्फ रूटीन काम नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना है.

संवेदनशीलता वाली छवि

रिची पांडेय सिर्फ सख्ती के लिए नहीं जाने जाते. सीतामढ़ी में दिव्यांग व्यक्ति के पास खुद पहुंचकर सम्मान लिया. चपरासी के घर शादी में गए और गाना भी गाया. जनता दरबार लगाते हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करते हैं. भ्रष्टाचार पर सख्त रहते हैं लेकिन आम लोगों से जुड़ने में पीछे नहीं हटते. गाने और क्रिकेट का शौक है. कई बार उनके गाने के वीडियो वायरल हो चुके हैं.

जब मंच से गूंज उठी ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां

प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच रिची पांडेय के भीतर एक साहित्य प्रेमी भी बसता है. दिनकर भवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जब वे मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने केवल औपचारिकता नहीं निभाई. उन्होंने राष्ट्रकवि की कालजयी रचना ‘रश्मिरथी’ का पूरे सस्वर और ओजस्वी अंदाज में पाठ किया. एक आईएएस अधिकारी के मुंह से वीर रस की इतनी सटीक प्रस्तुतियां सुनकर सभागार में मौजूद हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया.

दिनकर की धरती पर संस्कारों की मिसाल

23 सितंबर 2026 को रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती थी. दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बेगूसराय के सिमरिया में ही हुआ था. उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है. रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी जैसी कालजयी रचनाएं उन्होंने दीं. उन्हें ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. इस मौके पर पीएम मोदी, अमित शाह समेत कई नेताओं ने उन्हें नमन किया.

डीएम रिची पांडेय ने लोगों का दिल जीत लिया

इसी दिन बेगूसराय के नए डीएम रिची पांडेय सिमरिया स्थित दिनकर जी के पैतृक घर पहुंचे. वहां उन्होंने दिनकर जी की बुजुर्ग पुत्रवधू के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. यह तस्वीर सामने आते ही लोगों ने कहा, यही तो बिहार की संस्कृति है. एक ओर तेज तर्रार अफसर, दूसरी ओर संस्कारों का सम्मान. यही वजह है कि रिची पांडेय आज बेगूसराय ही नहीं, पूरे बिहार में चर्चा का विषय बने हुए हैं. सोशल मीडिया में लोग इस संवेदनशील अधिकारी की प्रशंसा कर रहे हैं जो पद की ऊंचाई में भी जड़ों से जुड़े रहते हैं.



Source link