बिहार में तेलंगाना सोना, डायबिटीज वाले भी ले सकते हैं इस चावल का स्वाद
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प्रकृति में uएक से बढ़कर एक फल-फूल, अनाज और सब्जियां हैं. इन सभी के एक से बढ़कर एक वैरायटी भी हैं. गेहूं-चावल आदि फसलों की भी कई वैरायटी हैं. इन सभी वैरायटी की अपनी खासियत, स्वाद, महक आदि होता है. आज हम आपको धान की एक ऐसी वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं….
आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड स्थित हरपुर गांव निवासी कृषक विजय गिरी ने 18 से अधिक धान की किस्मों की खेती की है. उनका कहना है कि उनमें ज्यादातर किस्में दुर्लभ और औषधीय गुणों से युक्त हैं. तेलंगाना सोना भी इन्हीं में से एक है, जिसे शर्करा मुक्त और कई फाइटोकेमिकल्स (Phytochemicals) से भरपूर माना जाता है. मजे की बात यह है कि विजय ने पिछले वर्ष इस धान की सफल खेती कर ली है और अब उसकी बीज तैयार करने में जुटे हैं. बीज तैयार कर वो इसे स्थानीय सहित अन्य सभी इच्छुक किसानों में वितरित करेंगे, ताकि वो भी इसकी खेती बड़े स्तर पर कर सकें. इस लेख में हम आपको इस धान, उसके औषधीय गुण और हार्वेस्टिंग से जुड़ी पूरी जानकारी साझा कर रहे हैं.
मोटापे से दूर, शुगर मरीज़ों के लिए रामबाण
विजय बताते हैं कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने धान की इस खास किस्म ‘तेलंगाना सोना’ को तैयार किया है. लोगों में बढ़ रही डायबिटीज की समस्या और उनके चावल खाने की इच्छा को देखते हुए यह किस्म मील का पत्थर साबित हो सकती है. धान की इस किस्म का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अन्य किस्मों की तुलना में बेहद कम होता है, जिसकी वजह से इसमें शर्करा की मात्रा कम होती है. ऐसे में ब्लड शुगर के मरीज़ भी इस चावल को भात के रूप में खाकर अपनी इच्छा की पूर्ति कर सकते हैं.
हेक्टेयर में 70 क्विंटल तक पैदावार
मजे की बात यह है कि यह किस्म मात्र 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. कम अवधि की फसल होने की वजह से इसमें पानी की खपत अन्य किस्मों की तुलना में काफी कम होती है. जहां तक बात पैदावार की है तो यह किस्म प्रति हेक्टेयर 60 से 70 क्विंटल तक उपज देने में सक्षम है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता से लैस
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की यह किस्म रोग प्रतिरोधक क्षमता से लैस है. इसमें झुलसा रोग सहित अन्य कई रोगों से बचने की क्षमता है, इसलिए इसकी खेती में किसानों को कीटनाशकों पर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती है.