‘बड़े भाग मानुष तनु पावा’, पर सासाराम में शर्मसार हुई मानवता, एक बेटी का शव ट्रैक्टर के हल पर बांधकर अस्पताल पहुंचाया

‘बड़े भाग मानुष तनु पावा’, पर सासाराम में शर्मसार हुई मानवता, एक बेटी का शव ट्रैक्टर के हल पर बांधकर अस्पताल पहुंचाया


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Sasaram Dead Body Transport on Tractor: गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखा है कि “बड़े भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥”. अर्थात बड़े भाग्य से मानव का शरीर प्राप्त होता है. सभी वेदों और ग्रंथों ने यही गाया है कि यह शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ यानी कठिनता से मिलने वाला है… लेकिन सासाराम में जिस तरह से एक मानव शरीर की दुर्गति हुई है, यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िए.

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रोहतास में बोरा में बंद लाश को ट्रैक्टर के हल पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया.

सासाराम. रोहतास जिले के के बड्डी थाना क्षेत्र के डूमरखोह जंगल से एक लड़की का शव बरामद हुआ था. इसके बाद 16 साल की इस लड़की के शव को जिस तरह अस्पताल पहुंचाया गया, उसने मानवीय संवेदनाओं और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जंगल के कुएं से बरामद शव को ट्रैक्टर के पीछे लगे खेत जोतने वाले लोहे के यंत्र “हल” या “फारी” पर बांधकर करीब 20 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल लाया गया.

जंगल के कुएं से बरामद हुआ शव

मामला रोहतास जिले के बड्डी थाना क्षेत्र के डूमरखोह जंगल का है. जानकारी के अनुसार, यहां एक पुराने कुएं से एक लड़की का शव बरामद हुआ था. मृतका की पहचान 16 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी के रूप में हुई और वह बिक्रमगंज के मानी गांव की रहने वाली थी. बताया जाता है कि दो महीना पहले उसने बड्डी के बिश्रामपुर के रहने वाले पिंकू बिंद से प्रेम विवाह कर लिया था. इसके बाद दोनों डूमरखोह जंगल के पास ही रहते थे. बाद में लक्ष्मी का शव जंगल के एक पुराने कुएं में मिला. परिजनों का आरोप है कि यह हत्या है, जबकि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है. लेकिन, शव को कुएं से निकालने के बाद उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई, लेकिन जिस तरीके से शव को ले जाया गया, उसकी तस्वीर ने लोगों को झकझोर दिया.

हल पर बांधकर 20 KM लाया गया शव

दरअसल, शव को कुएं से निकालने के बाद सासाराम सदर अस्पताल लाने के लिए पुलिस के पास कोई व्यवस्था नहीं थी. शव वाहन नहीं मिला तो एक ट्रैक्टर के पीछे लगा खेत जोतने वाला कृषि यंत्र हल के ऊपर बोरा में बंद शव को रस्सी से बांध दिया गया. इसी हालत में लगभग 20 किलोमीटर दूर सासाराम सदर अस्पताल लाया गया. रास्ते भर लोगों ने यह मार्मिक और शर्मसार करने वाली तस्वीर देखी. पहले से ही शव की स्थिति खराब थी, ऊपर से इस तरह घसीटने से और खराब हो गई.

डॉक्टर ने पोस्टमार्टम से किया इनकार, पटना भेजा

एक मृत लड़की के शव को अस्पताल ले जाने का यह तरीका कई सवाल खड़े करता है. शव की पहले से ही खराब स्थिति थी. अस्पताल पहुंचने के बाद भी उसकी हालत ऐसी थी कि डॉक्टरों ने वहीं पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया. अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. अजित कुमार ने बताया कि शव इतनी खराब हालत में था कि यहां पोस्टमार्टम संभव नहीं है. इसके बाद शव को फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के लिए पटना भेजा गया है. वहां फॉरेंसिक तरीके से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, ताकि जरूरी जांच की जा सके.

मानवता और सिस्टम पर सवाल

हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शव को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों की गई? क्या शव को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से ले जाने का कोई दूसरा इंतजाम नहीं था? बिहार में शव वाहन योजना के दावे तो बहुत होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत सासाराम की इस तस्वीर ने उजागर कर दी. बड्डी थाना पुलिस की इस अमानवीयता पर अब लोग आक्रोश में हैं. वहीं, शव के साथ ऐसा व्यवहार व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है.



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