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Lauki Kofta Recipe: बघेलखंड की रसोई में साधारण लौकी को भी देसी अंदाज में खास बना दिया जाता है. अगर लौकी की रोज-रोज बनने वाली सब्जी से कुछ अलग खाने का मन है, तो इसके कोफ्ते जरूर ट्राई करें. बेसन और देसी मसालों से बना यह स्वाद रोटी से लेकर चावल तक खूब जंचता है.
Lauki Kofta Recipe: बघेलखंड के घरों में लौकी की सब्जी तो अक्सर बनती है लेकिन इसी साधारण सी लौकी से बनने वाले कोफ्ते खाने की थाली का स्वाद ही बदल देते हैं. देसी मसालों की खुशबू, बेसन का स्वाद और बाहर से हल्के कुरकुरे तो अंदर से नरम कोफ्ते रोटी, पराठे या चावल के साथ खूब पसंद किए जाते हैं. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी खास या महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती. घर में आसानी से मिलने वाली लौकी, बेसन और रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों से यह स्वादिष्ट पकवान तैयार हो जाता है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने बताया कि बघेलखंडी रसोई की खासियत यही है कि यहां रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली साधारण सब्जियों को भी देसी तरीके और मसालों के साथ ऐसा स्वाद दिया जाता है कि वह खास पकवान बन जाती है. लौकी का कोफ्ता भी इसी पारंपरिक स्वाद की एक अच्छी मिसाल है.
सबसे पहले लौकी को इस तरह करें तैयार
कोफ्ता बनाने के लिए सबसे पहले ताजी, हरी और मुलायम लौकी लें. इसे अच्छी तरह छीलकर कद्दूकस कर लें. कद्दूकस करने के बाद लौकी में काफी पानी निकलता है इसलिए इसे दोनों हाथों से अच्छी तरह दबाकर अतिरिक्त पानी निकालना जरूरी है. अगर लौकी में ज्यादा पानी रह गया तो कोफ्ते का मिश्रण ढीला हो सकता है और गोलियां बनाने में परेशानी आएगी. पानी निचोड़ने के बाद कद्दूकस की हुई लौकी को एक चौड़े बर्तन में रख लें.
देसी मसालों से तैयार होगा कोफ्ते का मिश्रण
अब लौकी में बाइंडिंग के लिए बेसन मिलाएं. इसके साथ बारीक कटा हुआ हरा धनिया, थोड़ी हल्दी, लाल मिर्च और स्वाद के अनुसार नमक डालें. सभी चीजों को हाथ से अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें. इसमें अलग से पानी डालने की जरूरत नहीं है क्योंकि नमक मिलाने के बाद लौकी धीरे-धीरे अपना प्राकृतिक पानी छोड़ती है. इसलिए मिश्रण बनाते समय इसका ध्यान रखना जरूरी है. अगर मिश्रण बहुत ढीला होगा तो कोफ्ते तेल में टूट सकते हैं जबकि सही गाढ़ापन रहने पर आसानी से गोल आकार दिया जा सकता है.
धीमी-मध्यम आंच पर तलें सुनहरे कोफ्ते
मिक्सचर तैयार होने के बाद हाथों से छोटे-छोटे गोल कोफ्ते बना लें. अब कढ़ाई में पर्याप्त तेल गर्म करें और कोफ्तों को एक-एक करके डालें. इन्हें धीमी से मध्यम आंच पर धीरे-धीरे उलट-पुलटकर तलें ताकि बाहर से हल्का सुनहरा और कुरकुरा रंग आ जाए और अंदर तक अच्छी तरह पक जाएं. तेज आंच पर तलने से कोफ्ते ऊपर से जल्दी रंग पकड़ सकते हैं लेकिन अंदर से ठीक से नहीं पकेंगे. इसलिए इन्हें आराम से मीडियम टेंपरेचर पर तलना बेहतर रहेगा.
एक ही कोफ्ते से बनाएं तीन तरह के स्वाद
इन तैयार कोफ्तों की खासियत यह है कि इन्हें सिर्फ ऐसे ही खाया जाए ऐसा जरूरी नहीं है. इनसे कई तरह के पकवान तैयार किए जा सकते हैं. अगर रसेदार सब्जी पसंद है तो प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन और देसी मसालों से गाढ़ी ग्रेवी तैयार करके उसमें तले हुए कोफ्ते डाल सकते हैं. हींग और जीरे के तड़के से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. कुछ देर ग्रेवी में पकने के बाद कोफ्ते मसाले का स्वाद अच्छी तरह सोख लेते हैं और नरम हो जाते हैं.
छाछ से बनाएं बघेलखंडी अंदाज की कोफ्ता कढ़ी
वहीं लौकी के कोफ्ते से खट्टी-चटपटी कढ़ी भी बनाई जा सकती है. इसके लिए छाछ यानी मट्ठे और बेसन का घोल तैयार करके उसे पकाया जाता है. जब कढ़ी अच्छी तरह उबल जाए तो इसमें तैयार कोफ्ते डाल दें. देसी तड़के और खट्टी छाछ के साथ बने कोफ्ते कढ़ी का स्वाद बिल्कुल अलग और खास हो जाता है. यह तरीका खास तौर पर उन लोगों को पसंद आ सकता है जिन्हें पारंपरिक देसी कढ़ी का स्वाद अच्छा लगता है.
चाय के साथ भी बन सकता है स्वादिष्ट नाश्ता
अगर ग्रेवी वाली सब्जी या कढ़ी नहीं बनानी है तो तले हुए कोफ्तों को सीधे भी परोसा जा सकता है. गरमा-गरम कोफ्तों के साथ हरी चटनी रख दें तो यह शाम की चाय के समय बढ़िया नाश्ता बन जाता है. इन्हें सुबह भी हल्के नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है. वहीं मुख्य भोजन में इन्हें रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसने पर पूरा खाना स्वादिष्ट बन जाता है. इस तरह साधारण लौकी से तैयार होने वाला यह बघेलखंडी अंदाज का पकवान रोज की सब्जी से हटकर कुछ अलग खाने का अच्छा विकल्प बन सकता है.