PM Bima Yojana : सिर्फ ₹20 में ₹2 लाख का बीमा, न मेडिकल टेस्ट कराना और न ही एजेंट ढूंढने की जरूरत

PM Bima Yojana : सिर्फ ₹20 में ₹2 लाख का बीमा, न मेडिकल टेस्ट कराना और न ही एजेंट ढूंढने की जरूरत


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PMSBY : जिस भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में आपका बचत खाता है, उससे आप प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना पॉलिसी ले सकते हैं. एक बार परमिशन देने के बाद हर साल अपने आप प्रीमियम कट जाता है. बीमा कराने वाले की मृत्‍यु हो जाने पर नॉमिनी के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं.

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हादसे में व्यक्ति स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो क्लेम का पैसा बीमित व्यक्ति को दिया जाता है.

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार की एक ऐसी योजना है जो चाय के एक कप की कीमत में आपके परिवार को बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान कर देती है. इस योजना का नाम है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY). पीएम सुरक्षा बीमा योजना का सालाना प्रीमियम महज 20 रुपये है. यानी दो रुपये महीना से भी कम. इस मामूली कीमत पर आपको ₹2 लाख तक का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर मिलता है. खास बात यह है कि इस बीमा का लाभ उठाने के लिए न तो किसी तरह की मेडिकल जांच से गुजरना पड़ता है और न ही किसी एजेंट को ढूंढ़ना होता है.

देश के किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में अगर आपका बचत खाता है, तो आप सीधे वहीं से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय आपको सिर्फ एक बार ‘ऑटो-डेबिट’ की सहमति देनी होती है. इसके बाद हर साल मई के अंत में आपके खाते से ₹20 अपने-आप कट जाते हैं और आपकी पॉलिसी अगले एक सालके लिए रिन्यू हो जाती है. यदि कोई व्यक्ति साल के बीच में जुड़ता है, तो प्रीमियम कटते ही उसका रिस्क कवर शुरू हो जाता है.

कौन ले सकता है पीएम सुरक्षा बीमा

18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक या एनआरआई, जिसका देश के बैंक में सिंगल या जॉइंट सेविंग्स अकाउंट है, वह पीएम सुरक्षा बीमा योजना का लाभ उठा सकता है. जॉइंट अकाउंट होने पर दोनों खाताधारक अपने-अपने हिस्से का ₹20-₹20 प्रीमियम चुकाकर अलग-अलग ₹2 लाख का बीमा पा सकते हैं. एक व्यक्ति केवल एक ही बैंक अकाउंट से इस स्कीम का लाभ ले सकता है.

हत्या और प्राकृतिक आपदा भी कवर

योजना के तहत किसी भी अचानक और अप्रत्याशित बाहरी घटना को दुर्घटना माना गया है. अगर किसी बीमित व्यक्ति की सड़क या रेल हादसे के अलावा बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में जान जाती है या फिर किसी आपराधिक घटना में उसकी हत्या हो जाती है, तो भी नॉमिनी को पूरा ₹2 लाख का क्लेम मिलता है. बीमा कराने वाले के आत्महत्या करने पर बीमा राशि नहीं मिलती.

सीधे खाते में जाएगी क्लेम की रकम

इस योजना को लेकर अक्सर लोगों में यह गलतफहमी रहती है कि यह इलाज का खर्च भी उठाएगी. असल में यह शुद्ध रूप से पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस है. इसमें अस्पताल में भर्ती होने या दवाओं के बिल का भुगतान नहीं होता. दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹2 लाख की पूरी राशि सीधे नॉमिनी या कानूनी वारिस के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. वहीं, अगर हादसे में व्यक्ति स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो क्लेम का पैसा बीमित व्यक्ति को दिया जाता है.

एफआईआर और मेडिकल रिपोर्ट की कब पड़ती है जरूरत

क्लेम प्रक्रिया को पारदर्शी और पुख्ता बनाने के लिए नियमों का पालन जरूरी है. सड़क, रेल, वाहन दुर्घटना, पानी में डूबने या हत्या जैसे आपराधिक मामलों में पुलिस की एफआईआर या पंचनामा रिपोर्ट लगाना अनिवार्य है. वहीं, अगर हादसा किसी पेड़ से गिरने या जहरीले सांप के काटने की वजह से हुआ है, तो उस स्थिति में पुलिस केस के बजाय अस्पताल के आपातकालीन मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के आधार पर ही क्लेम लिया जा सकता है.



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