NEET-PG 2026: मधुबनी की काजल ने रचा इतिहास, पूरे देश में लाईं तीसरी रैंक; MBBS में मिले थे 3 गोल्ड मेडल

NEET-PG 2026: मधुबनी की काजल ने रचा इतिहास, पूरे देश में लाईं तीसरी रैंक; MBBS में मिले थे 3 गोल्ड मेडल


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NEET-PG Result 2026: मधुबनी के बेनीपट्टी की काजल पाठक ने नीट पीजी (NEET-PG) 2026 में ऑल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की है. इससे पहले उन्होंने दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस में 3 गोल्ड मेडल जीते थे. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से परिवार और पूरे बिहार में खुशी का माहौल है.

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काजल पाठक को NEET-PG में AIR-3

मधुबनी: बिहार की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं. मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली काजल पाठक ने नीट पीजी (NEET PG) 2026 की परीक्षा में पूरे देश में तीसरा स्थान (All India Rank 3) हासिल किया है. उनकी इस शानदार सफलता से परिवार और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है. काजल के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. रिश्तेदार और दोस्त लगातार उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं.

दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेज से MBBS और 3 गोल्ड मेडल
काजल पाठक ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई दिल्ली के प्रसिद्ध लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से पूरी की है. उनका एमबीबीएस सत्र 2020-2024 था. पढ़ाई के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में गोल्ड मेडल मिला था. एमबीबीएस पूरी करने के बाद काजल अपनी इंटर्नशिप में जुट गईं और साथ ही नीट पीजी की तैयारी जारी रखी.

बेनीपट्टी की बेटी ने बार-बार रोशन किया नाम
काजल पाठक बेनीपट्टी नगर पंचायत के वार्ड 18 स्थित पाठक टोल की निवासी हैं. उनके पिता राजमोहन पाठक एक शिक्षक हैं और मां रंजू कुमारी गृहिणी हैं. काजल की प्रारंभिक शिक्षा बेनीपट्टी से ही हुई है. इसके बाद उन्होंने बिहार बोर्ड की इंटर परीक्षा (साइंस) में 500 में से 456 अंक हासिल किए थे और मधुबनी जिले में फर्स्ट टॉपर बनी थीं.

इसके बाद उन्होंने नीट यूजी (NEET UG) 2020 परीक्षा में 720 में से 670 अंक प्राप्त किए. इस परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 1211 और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 77वीं रैंक आई थी. इसी आधार पर उन्हें दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला था.

मां को लगता था मेडिलक महंगी पढ़ाई है, कैसे पढ़ाएंगे
काजल की सफलता की राह में कई चुनौतियां भी आईं. शुरुआत में उनकी मां सोचती थीं कि डॉक्टर बनने में बहुत पैसा लगता है और उनके पास उतने पैसे नहीं हैं. तब काजल ने अपनी मां को समझाया कि सरकारी कॉलेज से बहुत सस्ते में मेडिकल की पढ़ाई हो जाती है. इसके बाद मां ने उन्हें खूब मेहनत करने के लिए प्रेरित किया.

बेटी होने के कारण पिता नहीं भेजना चाहते थे बाहर
वहीं पिता राजमोहन पाठक बताते हैं कि उन्होंने बेनीपट्टी से कभी किसी लड़की को पढ़ाई के लिए बाहर जाते नहीं देखा था. इसलिए वे सोचते थे कि बेटे को पटना भेजेंगे और बेटी को यहीं पढ़ाएंगे. इस पर काजल ने पिता से सीधे सवाल किया, “अगर बाहर नहीं भेजना था, तो सीबीएसई से क्यों पढ़ाया? क्या मेरे मार्क्स भाई से कम हैं?” यह बात पिता के दिल को छू गई और उन्होंने बेटी को आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया.

अस्पताल में मैथिली बोलकर करती थीं मरीजों की मदद
काजल ने दिल्ली में पढ़ाई के साथ-साथ अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया. दिल्ली के अस्पताल में जब भी मैथिली बोलने वाले मरीज या उनके परिजन आते थे, तो काजल खुद जाकर उनसे मैथिली में बात करती थीं. वे उनसे कहती थीं कि वे भी मधुबनी से हैं और इलाज में उनकी हर संभव मदद करती थीं.

नीट अभ्यर्थियों के लिए काजल की खास सलाह
नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए काजल का कहना है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है. अपने लक्ष्य पर फोकस रखें और रोजाना निरंतर पढ़ाई करें. पिता बताते हैं कि काजल ने नीट यूजी निकालने के बाद ही स्मार्टफोन खरीदा था. उससे पहले उन्होंने कभी मोबाइल की मांग नहीं की. उनका मानना है कि पढ़ाई के दौरान छात्रों को मोबाइल से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और केवल अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए.



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