Meerut Gandhi Ashram: जहां बापू और नेहरू ने रची आजादी की रणनीति, जानिए मेरठ की उस ऐतिहासिक धरोहर की अनसुनी कहानी

Meerut Gandhi Ashram: जहां बापू और नेहरू ने रची आजादी की रणनीति, जानिए मेरठ की उस ऐतिहासिक धरोहर की अनसुनी कहानी


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पश्चिमी यूपी का मेरठ शहर सिर्फ ‘क्रांतिधरा’ नहीं है, बल्कि देश की आजादी के संघर्ष का मूक गवाह भी है. 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की रणनीति हो या देश का पहला तिरंगा तैयार करने की बात, मेरठ के ‘श्री क्षेत्रीय गांधी आश्रम’ का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक धरोहर की पूरी कहानी.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को ‘क्रांतिधरा’ के तौर पर भी जाना जाता है. आपको यहां कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें दिखाई देंगी, जो कहीं ना कहीं भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अद्भुत संगम हैं. कुछ इसी तरह का नजारा आपको मेरठ स्थित ‘श्री क्षेत्रीय गांधी आश्रम’ में देखने को मिलेगा, जो कि राष्ट्र की धरोहर के रूप में अपनी एक विशेष पहचान रखता है.

दरअसल, वर्ष 1914 में जे.बी. कृपलानी द्वारा मेरठ में श्री क्षेत्रीय गांधी आश्रम की नींव रखी गई थी. इसके बाद से मेरठ का यह क्षेत्रीय गांधी आश्रम क्रांति के लिए मुख्य केंद्र बन गया था, जहां देश को आजाद कराने से संबंधित विभिन्न तरह की रणनीतियां तैयार की जाती थीं.

इतिहासकार प्रोफेसर नवीन गुप्ता के अनुसार, गांधी आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और चौधरी रघुवीर सिंह नारायण सहित विभिन्न महान क्रांतिकारियों के आने का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने देश आजाद कराने के लिए यहां रणनीति तैयार की थी.

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इतना ही नहीं, इतिहास के पन्नों में इस बात का भी उल्लेख है कि वर्ष 1942 में जब ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू किया गया था, तब उसका मुख्य केंद्र भी मेरठ का क्षेत्रीय गांधी आश्रम ही था. क्योंकि दिल्ली के समीप मेरठ एक अहम केंद्र पड़ता था. यही नहीं, जब मेरठ का उल्लेख किया जाता है, तो यहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वर्ष 1857 से ही चिंगारी उत्पन्न हो गई थी.

मेरठ के आसपास के गांवों में भी अंग्रेजी हुकूमत के प्रति काफी रोष था, इसलिए यहां पर लगातार रणनीति तैयार हुआ करती थी. इसीलिए मेरठ का गांधी आश्रम क्रांतिकारियों के लिए एक मुख्य और सुरक्षित स्थान बन गया था. वहीं, यहां के कर्मचारी भी आजादी में महत्वपूर्ण योगदान निभाते थे.

इतिहासकार तो यहां तक कहते हैं कि जब देश आजाद होने के पश्चात पहली बार राष्ट्रध्वज फहराया जाना था, तो उस राष्ट्रध्वज को भी मेरठ के श्री क्षेत्रीय गांधी आश्रम में ही तैयार किया गया था. इसमें मुख्य भूमिका उस समय कार्य करने वाले ठेकेदार नत्थे सिंह द्वारा निभाई गई थी, जिन्होंने दिन-रात कार्य करते हुए राष्ट्रध्वज को तैयार किया था. तत्पश्चात राष्ट्रध्वज को पहली बार फहराया गया था.

इसी के साथ ही यहां पर सर्वोदय केंद्र भी बना हुआ है, जहां हर महीने बैठक का आयोजन किया जाता है. सर्वोदय केंद्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के द्वारा जो मार्ग दिखाया गया था, उसी पर ही चलने का प्रयास किया जाता है. इस बैठक में सामाजिक लोग प्रतिभाग करते हैं. खास बात यह है कि अब सर्वोदय के प्रति युवा पीढ़ी में भी काफी क्रेज देखने को मिल रहा है, वे भी अब मीटिंग में आने लगे हैं.

बताते चलें कि आज भी मेरठ का श्री क्षेत्रीय गांधी आश्रम खादी प्रथा को बचाए हुए है. इससे जुड़े हुए विभिन्न लोग आज भी आपको चरखे का उपयोग करते और खादी से संबंधित विभिन्न वस्त्र बनाते हुए दिखाई देंगे. हालांकि, वर्तमान समय में जिस तरह से क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम की देखरेख और उससे संबंधित कार्य होने चाहिए, वह दिखाई नहीं देते हैं.

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