सिंहस्थ से पहले बदलेगा महाकाल लोक का स्वरूप, क्यों हटेंगी 100 से ज्यादा मूर्तियां?

सिंहस्थ से पहले बदलेगा महाकाल लोक का स्वरूप, क्यों हटेंगी 100 से ज्यादा मूर्तियां?


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उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ कुंभ होना है. इसके लिए पिछले कई महीनों से लगातार तैयारियां चालू हैं. सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा है. लाइट्स और अन्य सौंदर्यीकरण की चीजें लग रही हैं. इतना ही नहीं, महाकाल लोक कॉरिडोर की मूर्तियों को भी बदलने का काम शुरू हो गया है. इसके मूर्तियों को बनाने के लिए राजस्थान, ओडिशा और कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं. पत्थर और स्टील से मूर्ति बना रहे हैं.

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महाकाल महालोक में स्टील और पत्थर की मूर्तियां लगेंगी.

उज्जैन. साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन के महाकाल लोक में कॉरिडोर में लगी मौजूदा प्रतिमाओं को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह पत्थर और मेटल से बनी स्थायी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी. नई प्रतिमाओं के निर्माण का काम उज्जैन के विक्रम नगर मार्ग स्थित कार्यशाला में तेजी से चल रहा है. प्रशासन के मुताबिक कुल 92 नई प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं. इनमें 35 प्रतिमाएं पत्थर की और 57 मेटल से बनाई जा रही हैं.

खास बात यह है कि इस बार प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है. पुराणों में वर्णित भगवान के स्वरूप और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर प्रतिमाओं का डिजाइन तैयार किया जा रहा है. प्रतिमा बनाने से पहले उसका स्केच विशेषज्ञ समिति के सामने रखा गया और मंजूरी मिलने के बाद ही मूर्ति निर्माण शुरू किया गया है.

शुक्रवार को संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का निरीक्षण किया. इस दौरान राजस्थान और ओढिशा समेत अलग-अलग राज्यों से आए कारीगर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान शंकर और हनुमान सहित अन्य प्रतिमाओं को आकार देते नजर आए. कारीगरों के मुताबिक एक प्रतिमा को तैयार करने में उसके आकार और डिजाइन के आधार पर करीब एक महीने तक का समय लग सकता है. फिलहाल करीब 20 कारीगर काम कर रहे हैं, जबकि आने वाले दिनों में कोलकाता से करीब 40 और कारीगरों के पहुंचने की संभावना है.

पत्थर की मूर्तियां बनाने वाला शरद कारीगर.

महाकाल लोक की प्रतिमाएं सिर्फ उज्जैन में ही तैयार नहीं हो रही हैं. ग्वालियर और जयपुर में भी प्रतिमा निर्माण का काम कराया जा रहा है. कार्यशाला में काम करने वाले कारीगरों के लिए शेड, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी अधिकारियों ने दिए हैं.

100 से ज्यादा मूर्तियां होंगी रिप्लेस

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के मुताबिक महाकाल लोक में पहले से लगी 100 से ज्यादा प्रतिमाओं को फेज-वाइज नई प्रतिमाओं से बदला जाएगा. लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह पूरा काम पूरा कर लिया जाए. पुरानी प्रतिमाओं को दूसरी जगह स्थापित करने को लेकर बाद में निर्णय लिया जाएगा.

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह बयान देते हुए.

आंधी-तूफान के दौरान गिर गई थीं मूर्तियां

महाकाल लोक में प्रतिमाओं के स्वरूप में यह दूसरा बड़ा बदलाव है. 29 मई 2023 को तेज आंधी-तूफान के दौरान सप्तऋषि की सात में से छह प्रतिमाएं गिर गई थीं. ये एफआरपी से बनी और अंदर से खोखली प्रतिमाएं थीं. इसके बाद नई प्रतिमाएं तैयार कर अगस्त 2023 में स्थापित की गई थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक के पहले चरण का लोकार्पण किया

अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर महाकाल लोक में स्थायी पत्थर और मेटल की प्रतिमाएं लगाने की तैयारी है. प्रशासन का कहना है कि नई प्रतिमाएं लंबे समय तक टिकाऊ होने के साथ-साथ धार्मिक ग्रंथों में वर्णित स्वरूप के अनुरूप तैयार की जाएंगी. 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक के पहले चरण का लोकार्पण किया था. अब सिंहस्थ-2028 को देखते हुए महाकाल लोक के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के साथ प्रतिमाओं को भी स्थायी स्वरूप देने की तैयारी तेज कर दी गई है.



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