सऊदी पर हूती हमलों से हिला इस्लामिक NATO, रियाद में जुटे 3 देशों के जनरल, क्या अब बचा पाएंगे?

सऊदी पर हूती हमलों से हिला इस्लामिक NATO, रियाद में जुटे 3 देशों के जनरल, क्या अब बचा पाएंगे?


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हूती हमलों के बीच रियाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य प्रमुखों की अहम बैठक हुई. तीनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य तालमेल बढ़ाने और रक्षा क्षमताओं को जोड़ने पर चर्चा की. मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा.

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सऊदी में हुई तीनों देशों के मिलिट्री अधिकारियों की मीटिंग.

यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं. इस बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की फिर साथ बैठे हैं. शुक्रवार को सऊदी की राजधानी रियाद में तीनों देशों के सेना प्रमुखों और बड़े सैन्य अधिकारियों की मीटिंग हुई. बैठक में खुफिया जानकारी शेयर करने, सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ने पर बात हुई. मीटिंग में तुर्की के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल सेल्चुक बायराक्तारोग्लू, सऊदी अरब के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल फैय्याद बिन हमेद अल-रुवैली और पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल हुए. तीनों ने सऊदी के सामने मौजूद खतरे पर बात की. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या बैठकों और बयानों से सऊदी पर बढ़ता हूती दबाव सच में कम होगा?

हूती हमलों के बीच हुई मीटिंग

इस मीटिंग की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब पर बढ़ते हूती विद्रोहियों के हमले हैं. हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब के अलग-अलग इलाकों को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं. सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, 15 सितंबर को मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को भी सऊदी एयर डिफेंस ने मार गिराया था. इसके अलावा ताइफ और यानबू जैसे इलाकों की ओर बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की भी खबरें सामने आई हैं. अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ सऊदी की मदद से हाथ खड़े कर दिए हैं. वहीं यूके और फ्रांस कुछ हद तक मदद को तैयार हुए हैं. ऐसे वक्त में रियाद में तीनों देशों के सैन्य प्रमुखों का एक साथ बैठना अहम माना जा रहा है. मीटिंग में मक्का और सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर हुए हमलों की निंदा की गई.

‘एक पर हमला यानी तीनों पर हमला’

दरअसल, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट किया था. इस समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा. इसका मकसद साझा सुरक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करना बताया गया था. लेकिन इसकी टाइमिंग खास थी. ईरान युद्ध के दौरान हुआ यह समझौता सीधे तौर पर ईरान के डर से हुआ दिखता है. अब ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों ने हमले शुरू कर दिया है, जो इस समझौते की असली परीक्षा है. तीनों देशों ने यह जरूर कहा है कि वे सामूहिक रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन सऊदी की मदद किस स्तर तक की जाएगी, इसका पूरा खाका अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.



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