घंटों का सफर मिनटों में, लद्दाख से असम तक भारत बना रहा है 5 मेगा टनल, बदल जाएगा सफर का पूरा अंदाज

घंटों का सफर मिनटों में, लद्दाख से असम तक भारत बना रहा है 5 मेगा टनल, बदल जाएगा सफर का पूरा अंदाज


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Mega Tunnel Projects : भारत पांच ऐसे मेगा टनल प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करने में जुटा है, जिससे देश के कई भागों में आवागमन बेहद सरल हो जाएगा. लद्दाख की जोजिला टनल से लेकर ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बन रही रोड-रेल टनल इंजीनियरिंग के अनूठे नमूने हैं.

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इन सभी प्रोजेक्‍ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. (Image : AI)

नई दिल्‍ली. भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा आधुनिक नक्शा खींच रहा है जो अब तक सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में दिखता था. लद्दाख की हड्डियों को कंपा देने वाली ठंड में जोजिला टनल, असम में ब्रह्मपुत्र नदी के गर्भ में बन रही अंडरवॉटर ट्विन टनल, ठाणे क्रीक में समंदर के नीचे बुलेट ट्रेन टनल, उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों को चीरती ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और दक्षिण में जंगलों के बीच से निकल रही बेंगलुरु-विजयवाड़ा टनल वे मेगा प्रोजेक्ट्स हैं जो सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार ही नहीं हैं, बल्कि देश के सफर की पूरी परिभाषा बदलने वाले हैं.इन प्रोजेक्‍ट्स के धरातल पर उतरने के बाद दूरियां सिमट जाएंगी और घंटों का सफर मिनटों में पूरा होने लगेगा.

सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते देश के बाकी हिस्सों से 6 महीने कट जाने वाला लद्दाख अब साल के 365 दिन जुड़ा रहेगा. बालटाल से मिनामर्ग के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बन रही 13.153 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल यह संभव बनाएगी. यह एशिया की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है. इस परियोजना की कुल लंबाई 30.18 किलोमीअर है. टनल के साथ ही इसमें 17 किलोमीटर का एप्रोच रोड बनाया जा रहा है. इस पर ₹6,809 करोड़ खर्च होंगे. इस साल जून में मिनामर्ग स्थित पूर्वी पोर्टल पर टनल ब्रेकथ्रू हासिल कर लिया गया था. जोजिला टनल में ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन, CCTV, स्नो गैलरी और कैच डैम जैसी अत्याधुनिक सेफ्टी सिस्‍टम लगाए जा रहे हैं.

3 घंटे का सफर होगा 20 मिनट में पूरा

जोजिला दर्रे को पार करने में पहले जहां 3 से 4 घंटे का समय लगता था, वहीं इस सुरंग के जरिए यह सफर मात्र 15 से 20 मिनट का रह जाएगा.चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर भारतीय सेना के लिए सैनिकों, हथियारों, टैंकों और जरूरी रसद की आवाजाही सुरक्षित और बेहद तेज हो जाएगी.द्रास, कारगिल और लेह-लद्दाख जाने वाले पर्यटकों को सालभर सुरक्षित रास्ता मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और व्यापार में वृद्धि होगी.

ब्रह्मपुत्र अंडरवॉटर टनल

असम में पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा अजूबा आकार ले रहा है. गोहपुर से नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली और दुनिया की दूसरी अंडरवॉटर रोड-कम-रेल टनल तैयार की जा रही है. फिलहाल दोनों छोरों के बीच 240 किलोमीटर का चक्कर लगाने में 6 घंटे बर्बाद होते हैं, जो इस सीधी टनल के बनने के बाद महज कुछ मिनटों का रह जाएगा. ₹18,662 करोड़ की कुल लागत वाली इस परियोजना में 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग बनेगी. दोनों ट्यूबों में दो-लेन सड़क होगी, जबकि एक ट्यूब में रेलवे ट्रैक भी बिछाया जाएगा.

बुलेट ट्रेन अंडर-सी टनल

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत महाराष्ट्र में भारत की पहली अंडरसी रेल टनल बनाई जा रही है. बीकेसी (BKC) से शिलफाटा के बीच बनने वाली 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन का 7 किलोमीटर हिस्सा ठाणे क्रीक में सीधे समुद्र के नीचे से गुजरेगा. विक्रोली से बीकेसी की ओर पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) की खुदाई के बाद जुलाई 2026 में सावली से विक्रोली की दिशा में दूसरी विशालकाय टीबीएम ने भी खुदाई का काम शुरू कर दिया है.

ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लिंक

उत्तराखंड के चारधाम रूट को आसान बनाने के लिए 125 किमी लंबी रेलवे लाइन बिछाई जा रही है, जिसका 80% से ज्यादा हिस्सा हिमालय की विशाल पहाड़ियों के पेट से होकर गुजरेगा. इस रूट पर 16 मुख्य लाइन टनल होंगी जिनकी कुल लंबाई 104 किलोमीटर होगी. साथ ही इस रूट पर 12 एस्केप टनल भी बनाई जा रही हैं. मुख्य टनल की 101 किमी और एस्केप टनल की 95 किलोमीटर से अधिक खुदाई पूरी हो चुकी है. यानी प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है.



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