आर्मी में अग्निवीर बनकर जाने में और NDA क्रैक करके जाने में क्या है अंतर?

आर्मी में अग्निवीर बनकर जाने में और NDA क्रैक करके जाने में क्या है अंतर?


Agniveer vs NDA: भारतीय सेना में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के सामने कई रास्ते होते हैं. इनमें अग्निवीर भर्ती और NDA यानी National Defence Academy दो अलग रास्ते हैं, लेकिन दोनों के जरिए सेना में जाने की प्रक्रिया, ट्रेनिंग, भूमिका और करियर की दिशा एक जैसी नहीं होती. एक रास्ता सैनिक के रूप में सेना में प्रवेश का अवसर देता है, जबकि NDA के जरिए उम्मीदवार ऑफिसर बनने की ट्रेनिंग लेता है. इसलिए 10वीं-12वीं के बाद डिफेंस में करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के लिए दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है.

अग्निवीर बनकर सेना में कैसे जाते हैं?

अग्निवीर योजना के तहत युवाओं को भारतीय सेना की अलग-अलग कैटेगरी में भर्ती किया जाता है. चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाती है और फिर वे अपनी निर्धारित भूमिका में सेवा करते हैं. यानी अग्निवीर का रास्ता मुख्य रूप से सैनिक स्तर पर सेना में प्रवेश का रास्ता है.

अग्निवीर भर्ती में उम्मीदवार की एकेडमिक योग्यता और जिस ट्रेड या कैटेगरी के लिए वह आवेदन कर रहा है, उसके अनुसार एलिजिबिलिटी अलग हो सकती है. सेना में भर्ती होने के लिए लिखित परीक्षा, शारीरिक क्षमता, मेडिकल टेस्ट और अन्य निर्धारित राउंड से गुजरना पड़ता है.

NDA के जरिए सेना में क्या बनते हैं?

NDA का रास्ता इससे अलग है. National Defence Academy के जरिए चयनित उम्मीदवारों को भविष्य के कमिशंड ऑफिसर के रूप में तैयार किया जाता है. UPSC की NDA परीक्षा के जरिए चयन के बाद उम्मीदवार NDA में तीन साल की एकेडमिक और मिलिट्री ट्रेनिंग करते हैं. इसके बाद आर्मी विंग (Army Wing) के कैडेट Indian Military Academy (IMA), देहरादून जाते हैं, जहां उन्हें आगे की मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाती है. सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी करने पर उन्हें लेफ्टिनेंट (Lieutenant) के पद पर कमीशन दिया जाता है.

इस तरह आसान भाषा में समझें तो अग्निवीर का रास्ता सैनिक बनने की ओर जाता है, जबकि NDA का रास्ता सेना में ऑफिसर बनने की ओर जाता है.

12वीं के बाद दोनों रास्तों में क्या फर्क है?

NDA के लिए आर्मी विंग में आवेदन करने वाले उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है. UPSC के ऑफिशियल नोटिफिकेशन के अनुसार आर्मी विंग के लिए 10+2 पैटर्न में 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. वहीं, Navy और Air Force Wings के लिए Physics, Chemistry और Mathematics के साथ 12वीं पास होना अनिवार्य है.

वहीं, अग्निवीर भर्ती में योग्यता संबंधित भर्ती कैटेगरी के अनुसार बदलती है. इसलिए उम्मीदवार को आवेदन करने से पहले उस भर्ती के आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी एकेडमिक योग्यता जरूर देखनी चाहिए.

सबसे बड़ा अंतर है अधिकारी और सैनिक की भूमिका

दोनों रास्तों में सबसे महत्वपूर्ण अंतर पद और जिम्मेदारी का है. NDA से ट्रेनिंग पूरी करने वाला उम्मीदवार अधिकारी के रूप में कमीशन पाता है. एक अधिकारी की जिम्मेदारी में सैनिकों का नेतृत्व करना, यूनिट की कमान संभालना और सैन्य अभियानों से जुड़े निर्णय लेना शामिल होता है.

वहीं अग्निवीर सेना में एक सैनिक के रूप में अपनी निर्धारित भूमिका निभाता है. उसे भी कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग और जिम्मेदारियां दी जाती हैं, लेकिन उसका करियर ट्रैक NDA से आने वाले कमिशंड ऑफिसर से अलग होता है.

NDA में पढ़ाई और सैन्य ट्रेनिंग दोनों

NDA सिर्फ मिलिट्री ट्रेनिंग देने वाली संस्था नहीं है. यहां कैडेट्स को एकेडमिक शिक्षा के साथ फिजिकल और मिलिट्री ट्रेनिंग भी दी जाती है. UPSC के अनुसार NDA में तीन साल की ट्रेनिंग के दौरान Army Cadets को B.Sc, B.Sc (Computer) या B.A. जैसी डिग्री दी जा सकती है. इसके बाद Army Cadets IMA में आगे की ट्रेनिंग के लिए जाते हैं. यानी NDA का रास्ता चुनने वाले युवा कम उम्र में ही पढ़ाई और सैन्य जीवन दोनों को साथ लेकर चलते हैं.

ट्रेनिंग के बाद क्या होता है?

NDA के बाद आर्मी कैडेट्स IMA, देहरादून पहुंचते हैं. वहां करीब एक साल की आगे की सैन्य ट्रेनिंग होती है. UPSC के अनुसार सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी करने वाले कैडेट्स को लेफ्टिनेंट के रैंक में परमानेंट कमीशन दिया जाता है, बशर्ते वे निर्धारित मेडिकल स्टैंडर्ड को पूरा करते हों.

NDA ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को स्टाइपेंड भी मिलता है. UPSC के नोटिफिकेशन में ट्रेनिंग की अवधि के दौरान 56,100 रुपये प्रति माह का फिक्स्ड स्टाइपेंड बताया गया है. कमीशन मिलने के बाद अधिकारी के लिए पे स्केल अलग होता है.

अग्निवीर और NDA में परीक्षा भी अलग

दोनों रास्तों की चयन प्रक्रिया भी अलग है. NDA की परीक्षा UPSC आयोजित करता है. लिखित परीक्षा के बाद SSB इंटरव्यू और मेडिकल जैसी प्रक्रियाएं होती हैं. UPSC वर्ष में NDA की परीक्षा आयोजित करता है; उदाहरण के तौर पर 2026 में NDA परीक्षा के दो राउंड निर्धारित किए गए थे.

अग्निवीर भर्ती के लिए उम्मीदवारों को भारतीय सेना की निर्धारित भर्ती प्रक्रिया और संबंधित नोटिफिकेशन के अनुसार आवेदन करना होता है. इसलिए दोनों को एक ही परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया समझना सही नहीं है.

करियर की दिशा में भी है बड़ा अंतर

अग्निवीर और NDA के बीच एक और बड़ा अंतर सर्विस के नेचर और आगे के करियर से जुड़ा है. अग्निपथ व्यवस्था के तहत अग्निवीर के रूप में सेवा की अवधि निर्धारित होती है और सेवा के अंत में सभी अग्निवीरों को स्थायी रूप से सेना में बनाए रखने का प्रावधान नहीं है. वहीं NDA के जरिए Army में कमीशन पाने वाले कैडेट अधिकारी के रूप में करियर शुरू करते हैं और निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार परमानेंट कमीशन के तहत आगे बढ़ते हैं.

इसलिए सेना में जाने का सपना देखने वाले युवाओं को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि कौन-सी भर्ती आसान है. उन्हें यह समझना चाहिए कि वे सैनिक के रूप में करियर बनाना चाहते हैं या अधिकारी के रूप में, उनकी एकेडमिक योग्यता क्या है और वे किस तरह की सैन्य भूमिका के लिए तैयारी करना चाहते हैं.



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