Raj Thackeray MNS SIR cancellation demand। ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ… दिल्‍ली पर जमकर बरसे राज ठाकरे, SIR रद्द करने की मांग

Raj Thackeray MNS SIR cancellation demand। ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ… दिल्‍ली पर जमकर बरसे राज ठाकरे, SIR रद्द करने की मांग


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Raj Thackeray MNS SIR Cancellation Demand: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने SIRप्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए इसे चुनावी नतीजों में हेरफेर करने का हथियार बताया है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सभी विपक्षी दलों से ईवीएम के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से मतदान की वापसी के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया है.

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राज ठाकरे ने केंद्र पर निशाना साधा. (ANI)

मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर है जहां हर एक कदम पर भूचाल तय माना जा रहा है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर चुनावी व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बड़ा राजनीतिक बम फोड़ा है. राज ठाकरे ने चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग कर डाली है. उनका सीधा आरोप है कि इस वेरिफिकेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को मैनिपुलेट यानी प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है. इतना ही नहीं, उन्होंने ईवीएम (EVM) को टाटा बाय-बाय कहकर एक बार फिर पारंपरिक कागजी मतपत्रों यानी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर वकालत की है. उनके इस आक्रामक तेवर ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है.

जेन-जी और आज के युवा वर्ग के लिए चुनावी पारदर्शिता किसी फैंटेसी गेम के नियमों जितनी साफ होनी चाहिए. राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तल्ख अंदाज में आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टियां अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अहम संस्थागत हस्तियों का इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की पिछले दो दिनों से चल रही चुप्पी पर भी बड़ा सवालिया निशान उठाया है. राज ठाकरे का कहना है कि चुनाव आयोग के अंदर से ही प्रशासनिक फैसलों और आंतरिक असहमति को लेकर गंभीर आवाजें उठ रही हैं. एसआईआर को 2025 से चुनावी डेटा से खिलवाड़ करने वाला नया हथियार बताते हुए उन्होंने विपक्ष को चेताया है कि अगर वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए तो लोकतंत्र सिर्फ एक छलावा बनकर रह जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश की सियासत एक बार फिर 90 के दशक वाले बैलेट पेपर के दौर में लौटेगी? राज ठाकरे ने विपक्षी दलों से अपील की है कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ें, ताकि आने वाले सभी चुनाव सिर्फ बैलेट पेपर से हों. उन्होंने दो टूक कहा है कि जब तक इस कथित भ्रष्ट प्रणाली को जड़ से उखाड़कर मतपत्र व्यवस्था वापस नहीं लाई जाती, तब तक चुनावी पारदर्शिता सिर्फ एक कागजी जुमला बनी रहेगी. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे सवालों और अंदरूनी असहमति की खबरों के बीच राज ठाकरे का यह हमलावर रुख महाराष्ट्र के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा चुका है.



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