Kushavart Ghat Pind Daan Haridwar: पितृ पक्ष के दौरान हरिद्वार के गंगा घाटों पर देशभर से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं. गंगा में तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा सदियों पुरानी है. हरिद्वार में एक ऐसा प्राचीन घाट भी है, जिसे पितृ कर्म के लिए बेहद खास माना जाता है. मान्यता है कि यहां पिंडदान, तर्पण और पितृ हवन करने से पितरों को सद्गति मिलती है.
हम बात कर रहे हैं हर की पौड़ी के पास स्थित कुशावर्त घाट की जिसका का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. पितृ पक्ष के 16 श्राद्धों के दौरान इस घाट पर श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ जाती है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, घाट से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं इसे पितृ कर्म के लिए विशेष बनाती हैं.
प्राचीन समय में यहां थे कुशा के झुरमुट
तीर्थ पुरोहित प्रदीप झा ने लोकल18 को बताया कि कुशावर्त घाट हरिद्वार के प्राचीन और धार्मिक महत्व वाले स्थानों में शामिल है. मान्यता है कि पुराने समय में यहां पवित्र कुशा के झुरमुट हुआ करते थे. हिंदू धर्म में कुशा का इस्तेमाल देव और पितृ कार्यों में विशेष रूप से किया जाता है. इसी वजह से इस स्थान का नाम कुशावर्त पड़ा. मान्यता यह भी है कि त्रेतायुग में भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान और तर्पण इसी स्थान पर किया था. इसी धार्मिक मान्यता के चलते पितृ पक्ष में यहां दूर-दूर से लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करने पहुंचते हैं.
रानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था जीर्णोद्धार
कुशावर्त घाट का इतिहास हरिद्वार के पुराने धार्मिक स्थलों से जुड़ा हुआ है. तीर्थ पुरोहित के अनुसार, जिस तरह हर की पौड़ी का इतिहास राजा भर्तृहरि से जुड़ा माना जाता है, उसी तरह कुशावर्त घाट के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का संबंध रानी अहिल्याबाई होल्कर से बताया जाता है. इससे इस घाट का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी बढ़ जाता है.
पिंडदान और तर्पण के बाद गाय को खिलाते हैं चारा
प्रदीप झा के मुताबिक, पितृ पक्ष में कुशावर्त घाट पर पिंडदान, तर्पण और पितृ हवन करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कर्मों के जरिए पितरों की शांति और सद्गति की कामना की जाती है. तर्पण के बाद गाय को चारा खिलाने का भी विशेष विधान बताया गया है. तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने से पितरों की तृप्ति होती है और परिवार को सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
भगवान दत्तात्रेय की तपस्थली भी है कुशावर्त घाट
कुशावर्त घाट को भगवान दत्तात्रेय की तपस्थली भी माना जाता है. तीर्थ पुरोहित प्रदीप झा बताते हैं कि भगवान दत्तात्रेय ने इसी स्थान पर तपस्या की थी. इसी वजह से इस जगह का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की इस पावन तपोभूमि पर पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.