NEET PG 2026 AIR 1 Topper डॉ.मोनीश: पहले 28 हजार रैंक, फिर 641 अंकों के साथ बन गए टॉपर

NEET PG 2026 AIR 1 Topper डॉ.मोनीश: पहले 28 हजार रैंक, फिर 641 अंकों के साथ बन गए टॉपर


NEET PG 2026 Result Topper: नीट पीजी जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हजारों उम्मीदवार लंबे समय तक तैयारी करते हैं.कोई दिन-रात पढ़ाई करता है तो कोई घंटों MCQ हल करता है.लेकिन कई बार सफलता का फर्क इस बात से पड़ता है कि उम्मीदवार अपनी तैयारी की कमियों को कितनी जल्दी पहचानता है और उनमें बदलाव कैसे करता है.डॉ. मोनीश कन्ना आर की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है.एक समय NEET PG में करीब 28 हजार रैंक हासिल करने वाले मोनीश ने इस बार अपनी तैयारी के तरीके में बदलाव किया और NEET PG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर ली.

उन्होंने 720 में से 641 अंक हासिल किए.उनकी तैयारी की कहानी में सिर्फ घंटों पढ़ाई या हजारों सवाल हल करने की बात नहीं है.इसमें गलतियों का रिकॉर्ड रखना, बार-बार एक ही स्टडी मैटेरियल को दोहराना, कमजोर टॉपिक पर दोबारा काम करना और खराब रिजल्ट के बाद कई हफ्तों तक चले बर्नआउट से बाहर निकलना भी शामिल है.मोनीश ने एक इंटरव्यू में अपनी तैयारी, संघर्ष और परिवार के सहयोग से जुड़ी कई बातें साझा कीं.

इंटर्नशिप में सिर्फ MCQ पर था फोकस

डॉ. मोनीश कन्ना आर ने अपनी इंटर्नशिप के दौरान NEET PG की तैयारी शुरू करते समय मुख्य रूप से मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन यानी MCQ पर ध्यान दिया था.शुरुआत में उनका फोकस ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करने पर था.लेकिन धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि सिर्फ MCQ हल करते रहने से इतने बड़े मेडिकल सिलेबस को पूरी तरह कवर करना आसान नहीं होगा.यहीं से उन्होंने अपनी तैयारी को ज्यादा व्यवस्थित किया.उन्होंने समझा कि सिर्फ सवालों की संख्या बढ़ाने के बजाय पूरे सिलेबस को कवर करना, पढ़े हुए टॉपिक को दोहराना और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करना भी उतना ही जरूरी है.तैयारी के इसी बदले हुए तरीके ने आगे चलकर उनके प्रदर्शन में बड़ा बदलाव किया.

करीब 28 हजार रैंक से सीधे AIR 1 तक पहुंचे

मोनीश की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यह लगातार हर परीक्षा में टॉप करने की कहानी नहीं रही.उनके मुताबिक इससे पहले NEET PG में उनकी रैंक करीब 28 हजार रही थी.इस बार उन्होंने अपनी तैयारी के तरीके में बदलाव किया और NEET PG 2026 में देशभर में पहली रैंक हासिल की.उनका यह सफर बताता है कि खराब या उम्मीद से कम रिजल्ट के बाद तैयारी के तरीके का दोबारा विश्लेषण करना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है.मोनीश ने भी अपने पिछले प्रदर्शन को सिर्फ निराशा के तौर पर नहीं देखा बल्कि अपनी तैयारी में बदलाव करने की जरूरत को समझा.

10,425 MCQ, 445 लीडरबोर्ड और 85 बार Rank 1

मोनीश की तैयारी में लगातार MCQ प्रैक्टिस की बड़ी भूमिका रही.उन्होंने कुल 10,425 MCQ हल किए और 445 लीडरबोर्ड में हिस्सा लिया.इनमें से 85 बार उन्होंने Rank 1 हासिल की हालांकि हर क्लास के तुरंत बाद उनका प्रदर्शन टॉप पर नहीं रहता था.उन्होंने खुद को एक स्लो लर्नर बताया.उनका तरीका यह था कि पहले दिन जो पढ़ाया गया.उसे वह दोहराते थे और इसके बाद अगली सुबह लीडरबोर्ड में सवाल हल करते थे.इस तरीके से उन्हें पढ़े हुए कॉन्सेप्ट को दोबारा याद करने का मौका मिलता था.साथ ही लीडरबोर्ड में सवाल हल करने के दौरान उन्हें यह भी पता चलता था कि किन हिस्सों में अभी उनकी पकड़ कमजोर है.

रोज करीब 100 MCQ, लेकिन असली फोकस गलतियों पर

मोनीश रोज करीब 100 MCQ हल करने की कोशिश करते थे लेकिन उनके लिए सिर्फ यह मायने नहीं रखता था कि एक दिन में कितने सवाल हल किए गए.उन्होंने अपनी तैयारी में गलतियों को भी उतनी ही अहमियत दी.इसके लिए उन्होंने एक अलग मिस्टेक नोटबुक बनाई थी.जब भी किसी सवाल का जवाब गलत होता वह सिर्फ सही उत्तर देखकर आगे नहीं बढ़ जाते थे.वह यह समझने की कोशिश करते थे कि गलती आखिर क्यों हुई.इसके बाद उस सवाल से जुड़ी जरूरी जानकारी अपने नोट्स में जोड़ लेते थे.परीक्षा नजदीक आने पर वह इसी गलती वाली नोटबुक को दोबारा देखते थे.इसका मकसद यह था कि जिन गलतियों को वह पहले कर चुके हैं.उन्हें परीक्षा के दौरान दोबारा न दोहराएं.

वर्कबुक को चार से पांच बार किया रिवाइज

मोनीश की तैयारी का एक और अहम हिस्सा बार-बार रिवीजन करना था.उन्होंने बताया कि परीक्षा से पहले उन्होंने अपनी वर्कबुक को चार से पांच बार तक रिवाइज किया.हर रिवीजन के दौरान उनका तरीका एक जैसा नहीं था.वह कमजोर टॉपिक को पहचानते थे और उन्हें बुकमार्क या नोट्स के जरिए अलग रखते थे.इसके बाद दोबारा पढ़ते समय इन कमजोर हिस्सों पर ज्यादा ध्यान देते थे वहीं जिन विषयों पर उनकी पकड़ अच्छी थी उन्हें भी उन्होंने पूरी तरह नहीं छोड़ा.उनका प्रयास सभी 19 सब्जेक्ट के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का था.वह दिन में जो पढ़ते थे.उसे उसी दिन दोहराने की भी कोशिश करते थे.

पहली रिवीजन में तेजी नहीं, समझ को दी प्राथमिकता

मोनीश ने अपनी तैयारी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी बताई कि तेजी से पढ़ना और प्रभावी तरीके से सीखना हमेशा एक ही बात नहीं होती.शुरुआती रिवीजन के दौरान जब वह समय बांधकर पढ़ने की कोशिश करते थे तो उनका ध्यान कई बार टॉपिक को समझने के बजाय ज्यादा से ज्यादा पेज खत्म करने पर चला जाता था.इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली.शुरुआत में उन्होंने गहराई से समझकर पढ़ने को प्राथमिकता दी और परीक्षा नजदीक आने पर टाइम-बाउंड रीडिंग पर ज्यादा ध्यान दिया यानी उनकी तैयारी में सिर्फ यह तय नहीं था कि क्या पढ़ना है, बल्कि यह भी तय था कि किस समय किस तरीके से पढ़ना ज्यादा उपयोगी रहेगा.

खराब रिजल्ट के बाद तीन से चार हफ्ते तक रहा बर्नआउट

मोनीश की तैयारी का सफर हर समय आसान नहीं रहा.एक समय उन्हें उम्मीद से काफी खराब रिजल्ट मिला.इसके बाद उनका कॉन्फिडेंस प्रभावित हुआ और करीब तीन से चार हफ्ते तक वह बर्नआउट महसूस करते रहे.इस दौरान वह ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे.इस स्थिति में उन्होंने खुद को जबरदस्ती उसी रफ्तार से पढ़ाने की कोशिश नहीं की.उन्होंने पहले यह समझने की कोशिश की कि समस्या क्या है और फिर अपने पढ़ाई के माहौल में बदलाव किया.उन्होंने एक लाइब्रेरी जॉइन की और धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की.उनके लिए यह सिर्फ जगह बदलने का फैसला नहीं था बल्कि तैयारी की लय वापस हासिल करने का तरीका भी था.

नींद, वॉक, जॉगिंग और मेडिटेशन

बर्नआउट के दौर से निकलने के लिए मोनीश ने पढ़ाई के साथ अपनी दिनचर्या पर भी ध्यान दिया.उन्होंने पर्याप्त नींद लेने, वॉकिंग और जॉगिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया.मानसिक रूप से खुद को दोबारा तैयार करने के लिए उन्होंने मेडिटेशन भी किया.खराब प्रदर्शन के बाद आत्मविश्वास वापस लाने में उनके माता-पिता के प्रोत्साहन ने भी मदद की.वह अपनी तैयारी में परिवार के समर्थन को महत्वपूर्ण मानते हैं और NEET PG 2026 में AIR 1 हासिल करने के बाद भी उन्होंने अपने माता-पिता और मेंटर्स के योगदान को खास तौर पर याद किया.

आखिरी दो हफ्तों में बढ़ाई पढ़ाई

परीक्षा से करीब दो हफ्ते पहले मोनीश ने अपनी पढ़ाई की रफ्तार बढ़ा दी थी.इस दौरान उन्होंने तैयारी को ज्यादा तेज किया ताकि बचे हुए हिस्सों का रिवीजन और कमजोर टॉपिक पर काम किया जा सके लेकिन परीक्षा के बिल्कुल करीब पहुंचने पर उन्होंने रणनीति फिर बदल दी.आखिरी कुछ दिनों में उन्होंने पढ़ाई का दबाव जानबूझकर कम किया और छोटे-छोटे रिवीजन तथा आराम पर ध्यान दिया.
इस तरह उन्होंने परीक्षा से ठीक पहले लगातार पढ़ते रहने के बजाय अपने दिमाग को आराम देने और पहले से पढ़ी चीजों को दोहराने को प्राथमिकता दी.

MBBS से लेकर NEET PG AIR 1 तक

डॉ. मोनीश कन्ना आर ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड ईएसआईसी हॉस्पिटल, कोयम्बटूर से MBBS किया है.वह EFIC कोयम्बटूर के 2019 बैच के छात्र रहे हैं.इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने NEET PG की तैयारी शुरू की थी.इस बार NEET PG 2026 में उन्होंने 720 में से 641 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की.रिजल्ट के बाद दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी तैयारी के साथ-साथ उन मुश्किल दौर के बारे में भी बात की.जब उन्हें लगा कि पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पा रही है.

उनकी कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा क्या है?

मोनीश के लिए NEET PG 2026 में AIR 1 हासिल करना सिर्फ 641 अंक या रैंक 1 की उपलब्धि नहीं है.उनकी तैयारी में बार-बार खुद को सुधारने की प्रक्रिया दिखाई देती है.शुरुआत में MCQ पर ज्यादा निर्भर रहने से लेकर पूरी पढ़ाई को व्यवस्थित करने तक उन्होंने अपना तरीका बदला.उन्होंने 10,425 MCQ हल किए, 445 लीडरबोर्ड में हिस्सा लिया और 85 बार Rank 1 हासिल की.वर्कबुक को चार से पांच बार दोहराया, 19 विषयों से लगातार संपर्क बनाए रखा और रोज करीब 100 MCQ की प्रैक्टिस की.साथ ही गलत सवालों के लिए अलग नोटबुक रखी.जब खराब रिजल्ट के बाद तीन से चार हफ्ते तक बर्नआउट रहा तब उन्होंने पढ़ाई छोड़ने के बजाय अपने माहौल और दिनचर्या में बदलाव किया.लाइब्रेरी जॉइन की.नींद और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दिया और मेडिटेशन के जरिए मानसिक रूप से खुद को संभाला.



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