Mohammed Siraj success mantras : जिस लड़के ने टेनिस-बॉल क्रिकेट से कमाई करके अपने माता-पिता की मदद की, जिसके पिता ऑटो चलाते थे और जिसे खराब प्रदर्शन के बाद क्रिकेट छोड़कर पिता के साथ ऑटो चलाने तक की सलाह दी गई, वही मोहम्मद सिराज आज भारतीय क्रिकेट की तेज गेंदबाजी का जाना-पहचाना नाम हैं. सिराज की कहानी सिर्फ क्रिकेट में सफलता की कहानी नहीं है. यह एक बेटे के सपने, पिता के संघर्ष, मां की चिंता, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा रखने की कहानी है.
हैदराबाद के साधारण परिवार में पले-बढ़े सिराज ने बहुत सुविधाओं के बीच क्रिकेट शुरू नहीं किया था. उनके पिता ऑटो चलाते थे और मां काम करती थीं. सिराज ने टेनिस-बॉल क्रिकेट से शुरुआत की. वह इससे जो पैसे कमाते थे, उनमें से काफी हिस्सा अपने माता-पिता को दे देते थे. धीरे-धीरे उनकी गेंदबाजी पर लोगों की नजर पड़ी और उन्हें आगे बढ़ने के मौके मिलने लगे.
लेकिन भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था. एक समय खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना झेलनी पड़ी. यहां तक कि लोगों ने उनसे क्रिकेट छोड़कर पिता के साथ ऑटो चलाने को कहा. मगर सिराज ने इन बातों को अपनी पहचान नहीं बनने दिया.
‘एक दिन पैसे रखने की जगह नहीं रहेगी’
सिराज के संघर्ष की सबसे दिल छू लेने वाली बात उनका वह आत्मविश्वास है, जो मुश्किल दिनों में भी उनके साथ रहा. उन्होंने एक बार बताया था कि जब उनकी मां उनके भविष्य को लेकर चिंतित होती थीं, तब उन्होंने उनसे कहा था-“एक दिन ऐसा आएगा कि पैसे रखने की जगह नहीं रहेगी आपके पास.” सिराज ने आत्मविश्वास की अहमियत बताते हुए कहा था कि अगर आपको खुद पर विश्वास नहीं है तो आप जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते. उनके लिए यह भरोसा सिर्फ बोलने की बात नहीं था, बल्कि रोज मेहनत करने की ताकत था.
1. जो करना है, पूरे दिल से करो
इंग्लैंड दौरे के दौरान सिराज ने अपनी सोच को बहुत सरल शब्दों में बताया था- “मैं अपना सब कुछ देता हूं, बाकी जो होगा, वह बाद में होगा. ” सिराज का मानना रहा है कि नतीजा हमेशा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन मेहनत में कोई कमी न रखना हमारे हाथ में जरूर है. यही वजह है कि उनका पहला सफलता मंत्र बनता है- काम ऐसा करो कि बाद में यह अफसोस न रहे कि काश मैंने थोड़ा और प्रयास किया होता.
2. छोटी शुरुआत से बड़ा सपना देखने में कोई बुराई नहीं
सिराज ने टेनिस-बॉल क्रिकेट से शुरुआत की थी. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह लड़का आगे चलकर भारत के लिए खेलेगा. लेकिन सिराज ने अपनी परिस्थितियों को अपनी सीमा नहीं बनने दिया. उनकी कहानी बताती है कि आपकी शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन आपका सपना छोटा होना जरूरी नहीं.
3. अपने संघर्ष को कमजोरी नहीं, ताकत बनाइए
सिराज के पिता का ऑटो चलाना उनकी कहानी का अहम हिस्सा है. उन्होंने कभी अपने पिता के काम को छिपाने की कोशिश नहीं की. उलटे, पिता की मेहनत को अपने लिए प्रेरणा माना.
जब लोगों ने इसी बात को लेकर उन्हें ताना दिया, तब भी उन्होंने अपने परिवार की पृष्ठभूमि को कमजोरी नहीं बनने दिया. यह सीख सिर्फ क्रिकेट के लिए नहीं है. जिंदगी में भी अपनी मुश्किलों से भागने के बजाय उनसे ताकत लेना सीखा जा सकता है.
4. लोगों की बातों को अपनी पहचान मत बनने दीजिए
खराब प्रदर्शन के बाद सिराज को काफी आलोचना सुननी पड़ी. इसी दौर में उन्हें महेंद्र सिंह धोनी की एक सलाह याद रही. सिराज ने बताया कि धोनी ने उनसे कहा था-“किसी की बातों में मत आना. जब तुम अच्छा करोगे, तो पूरी दुनिया तुम्हारे साथ होगी, और जब खराब करोगे, तो यही दुनिया तुम्हें गालियां देगी.”सिराज ने बताया कि इसके बाद उन्होंने बाहर के लोगों की राय को ज्यादा महत्व देना छोड़ दिया. उनके लिए परिवार और टीम के भरोसे की अहमियत बढ़ गई.
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5. बुरे दौर में खुद पर शक मत कीजिए
हर सफल व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है, जब उसे अपनी क्षमता पर ही संदेह होने लगता है. सिराज ने भी माना कि उनके करियर में ऐसा दौर आया था. लेकिन 2021 का ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके लिए बदलाव लेकर आया. वहां के प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें अपनी क्षमता पर ज्यादा भरोसा हुआ. मुश्किल समय हमेशा आपकी कमजोरी बताने नहीं आता. कई बार वही आपको अपनी असली ताकत पहचानाता है.
6. सिर्फ नतीजे के पीछे मत भागिए
सिराज ने अपने गेंदबाजी प्रशिक्षक भारत अरुण से मिली एक अहम सीख भी साझा की थी. उन्हें सलाह दी गई थी कि हर गेंद पर विकेट लेने के पीछे भागने के बजाय सही जगह गेंद डालने पर ध्यान देना चाहिए. यही बात जिंदगी में भी लागू होती है. हर दिन सिर्फ यह सोचने के बजाय कि मंजिल कब मिलेगी, अपने आज के काम को बेहतर करने पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.
7. मौका मिलने से पहले खुद को तैयार कीजिए
मौका कब मिलेगा, यह हमेशा हमारे हाथ में नहीं होता. लेकिन जब मौका आए तो हम तैयार हैं या नहीं, यह जरूर हमारे हाथ में है. सिराज ने क्लब क्रिकेट से लेकर बड़े स्तर तक लगातार अपनी गेंदबाजी पर काम किया. यही तैयारी आगे चलकर उनके काम आई. इसलिए मौके का इंतजार करने के बजाय खुद को उस मौके के लायक बनाने पर ध्यान दीजिए.
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