नई दिल्ली (Manzil Saini IPS Biography). जिंदगी सबसे कठिन परीक्षाओं से रूबरू करवाए तो कुछ लोग टूट जाते हैं और कुछ इतिहास रच देते हैं. अक्सर लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों या परेशानियों का रोना रोकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं. लेकिन आज हम एक ऐसी असाधारण महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने प्रेग्नेंसी के सबसे नाजुक और शारीरिक रूप से चैलेंजिंग दौर में देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी यूपीएससी को न सिर्फ पास किया, बल्कि पहले ही प्रयास में फतह भी कर लिया.
दिल्ली यूनिवर्सिटी की टॉपर रही हैं IPS मंजिल सैनी
मंजिल सैनी की शुरुआती जिंदगी ही उनकी असाधारण प्रतिभा की गवाही देती है. उनका जन्म 1975 में दिल्ली में हुआ था. पढ़ाई-लिखाई में वह बचपन से बहुत होशियार थीं. उन्होंने दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित ‘दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ से उच्च शिक्षा हासिल की. वहां उन्हें उनके शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से नवाजा गया.
लव मैरिज, कॉर्पोरेट जॉब और नया सपना
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 3 साल तक एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी की. लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात एक सहपाठी से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी कर ली. शादी और कॉर्पोरेट करियर के बीच जब उन्होंने देश की सेवा करने की ठानी, तब उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा और रोमांचक अध्याय शुरू हुआ.
प्रेग्नेंसी के दौरान क्रैक की UPSC सिविल सेवा परीक्षा
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करियर का सबसे चैलेंजिंग केस
आईपीएस मंजिल सैनी के करियर में एक ऐसा मोड़ भी आया जो पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी मिसाल पेश करता है. फरवरी 2017 में जब वह लखनऊ की एसएसपी थीं, तब अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग व्यापारी श्रवण साहू की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. श्रवण साहू इकलौते मुख्य गवाह थे और उन्होंने पुलिस से लगातार जान का खतरा बताकर सुरक्षा (गनर्स) मांगी थी, जो उन्हें नहीं मिल पाई थी.
मीडिया के सामने मानी विफलता
घटना के बाद मंजिल सैनी ने खुद सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने आकर स्वीकार किया था कि यह पुलिस प्रशासन की बहुत बड़ी विफलता है. सालों बाद जब सीबीआई ने इस मामले की जांच की तो उनकी सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए उन्हें जिम्मेदार माना और विभागीय कार्रवाई भी हुई. एक तरफ देश की रक्षा के लिए बहादुरी के मेडल जीतना और दूसरी तरफ प्रशासनिक चूक होने पर अपनी गलती को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना- यही बात मंजिल सैनी को किसी भी आम अधिकारी से कहीं ऊपर खड़ा करती है.