Manzil Saini IPS Biography: देश की पहली शादीशुदा महिला IPS, प्रेग्नेंसी में क्रैक किया UPSC, ‘लेडी सिंघम’ मंजिल सैनी की गजब कहानी

Manzil Saini IPS Biography: देश की पहली शादीशुदा महिला IPS, प्रेग्नेंसी में क्रैक किया UPSC, ‘लेडी सिंघम’ मंजिल सैनी की गजब कहानी


नई दिल्ली (Manzil Saini IPS Biography). जिंदगी सबसे कठिन परीक्षाओं से रूबरू करवाए तो कुछ लोग टूट जाते हैं और कुछ इतिहास रच देते हैं. अक्सर लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों या परेशानियों का रोना रोकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं. लेकिन आज हम एक ऐसी असाधारण महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने प्रेग्नेंसी के सबसे नाजुक और शारीरिक रूप से चैलेंजिंग दौर में देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी यूपीएससी को न सिर्फ पास किया, बल्कि पहले ही प्रयास में फतह भी कर लिया.

यह कहानी देश की पहली विवाहित महिला आईपीएस अफसर की है. इनके नाम से अच्छे-अच्छे अपराधी भी थर-थर कांपते हैं. लोग इन्हें ‘लेडी सिंघम’ कहते हैं. मंजिल सैनी की कहानी सिर्फ आईपीएस अधिकारी बनने भर की नहीं है. यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी रुकावट आड़े नहीं आ सकती. दिल्ली की गलियों से लेकर देश के सबसे संवेदनशील जिलों की कानून-व्यवस्था संभालने तक का उनका सफर हर उस शख्स के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों से हार मान जाता है. पढ़िए सक्सेस स्टोरी.

दिल्ली यूनिवर्सिटी की टॉपर रही हैं IPS मंजिल सैनी

मंजिल सैनी की शुरुआती जिंदगी ही उनकी असाधारण प्रतिभा की गवाही देती है. उनका जन्म 1975 में दिल्ली में हुआ था. पढ़ाई-लिखाई में वह बचपन से बहुत होशियार थीं. उन्होंने दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित ‘दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ से उच्च शिक्षा हासिल की. वहां उन्हें उनके शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से नवाजा गया.

लव मैरिज, कॉर्पोरेट जॉब और नया सपना

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 3 साल तक एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी की. लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात एक सहपाठी से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी कर ली. शादी और कॉर्पोरेट करियर के बीच जब उन्होंने देश की सेवा करने की ठानी, तब उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा और रोमांचक अध्याय शुरू हुआ.

प्रेग्नेंसी के दौरान क्रैक की UPSC सिविल सेवा परीक्षा

साल 2005 में मंजिल सैनी प्रेग्नेंट थीं. शारीरिक बदलाव, थकान और नए जीवन को दुनिया में लाने की जिम्मेदारी- इस कठिन दौर में ज्यादातर महिलाएं आराम करने की सलाह मानती हैं. लेकिन मंजिल ने इस चुनौती को अपनी ताकत बनाया. उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान UPSC परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में पास होकर इतिहास रच दिया. वह भारतीय पुलिस सेवा में आने वाली पहली विवाहित महिला बनीं. उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर अलॉट हुआ. उनकी पहली पोस्टिंग मुरादाबाद में बतौर असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट थी.

मुरादाबाद में पकड़ा देश का सबसे खतरनाक किडनी रैकेट

मंजिल सैनी ने साल 2008 में उत्तर प्रदेश और गुरुग्राम बेल्ट में एक्टिव अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया था. गरीब और असहाय मजदूरों को नौकरी का झांसा देकर, उन्हें नशे की सुइयां देकर बेहोश किया जाता था और उनकी गैर-मर्जी से किडनी निकालकर अमीर और विदेशी मरीजों को बेची जाती थी. यह आम अपराध नहीं था. इसके तार दूर-दूर तक जुड़े थे. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस महकमे में उन्हें सम्मान से ‘लेडी सिंघम’ कहा जाने लगा. इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरनगर, मथुरा, बदायूं और इटावा जैसे संवेदनशील जिलों में बतौर जिला प्रमुख अपनी सख्त प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया.

लखनऊ की पहली महिला एसएसपी और गैलेंट्री अवार्ड का सफर

आईपीएस मंजिल सैनी को मई 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया. यूपी के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी महिला को लखनऊ जैसी हाई-प्रोटेक्टेड और संवेदनशील जगह की कमान सौंपी गई थी. उनके अदम्य साहस और बहादुरी के लिए उन्हें 2024 में ‘राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक’ (President’s Police Medal for Gallantry) से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें 2017 में मेरठ में अपहरण हुए डॉक्टर श्रीकांत को सुरक्षित बचाने वाले खतरनाक एनकाउंटर के लिए मिला था. यह गौरव हासिल करने वाली वह यूपी की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी हैं.

करियर का सबसे चैलेंजिंग केस 

आईपीएस मंजिल सैनी के करियर में एक ऐसा मोड़ भी आया जो पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी मिसाल पेश करता है. फरवरी 2017 में जब वह लखनऊ की एसएसपी थीं, तब अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग व्यापारी श्रवण साहू की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. श्रवण साहू इकलौते मुख्य गवाह थे और उन्होंने पुलिस से लगातार जान का खतरा बताकर सुरक्षा (गनर्स) मांगी थी, जो उन्हें नहीं मिल पाई थी.

मीडिया के सामने मानी विफलता

घटना के बाद मंजिल सैनी ने खुद सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने आकर स्वीकार किया था कि यह पुलिस प्रशासन की बहुत बड़ी विफलता है. सालों बाद जब सीबीआई ने इस मामले की जांच की तो उनकी सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए उन्हें जिम्मेदार माना और विभागीय कार्रवाई भी हुई. एक तरफ देश की रक्षा के लिए बहादुरी के मेडल जीतना और दूसरी तरफ प्रशासनिक चूक होने पर अपनी गलती को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना- यही बात मंजिल सैनी को किसी भी आम अधिकारी से कहीं ऊपर खड़ा करती है.



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