Maldives-Pakistan Diplomacy for India: भारतीय सैलानियों के भरोसे चलता था जो देश अब पाकिस्तान से मिला रहा हाथ हिंद महासागर में बढ़ी टेंशन

Maldives-Pakistan Diplomacy for India: भारतीय सैलानियों के भरोसे चलता था जो देश अब पाकिस्तान से मिला रहा हाथ हिंद महासागर में बढ़ी टेंशन


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Maldives Speaker Visit to Pakistan: पाकिस्तान अब धीरे-धीरे अपने पांव हिंद महासागर में पसारने की कोशिश में लगा हुआ है. इसी सिलसिले में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने मालदीव की पीपल्स मजलिस के स्पीकर अब्दुल रहीम अब्दुल्ला से मुलाकात की. ये मुलाकात भारत की टेंशन बढ़ाने वाली है, चलिए जानते हैं क्यों?

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पाकिस्तान-मालदीव के बढ़ रहे रिश्ते, भारत की टेंशन.

Maldives-Pakistan Diplomacy: कूटनीतिक स्तर पर एक छोटी-सी मुलाकात भी बड़ी रणनीतिक अहमियत रख सकती है.  ऐसी ही एक मीटिंग 24 सितंबर, 2026 को मालदीव की पीपल्स मजलिस के स्पीकर अब्दुल रहीम अब्दुल्ला ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की. दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत हुई. मालदीव के स्पीकर ने क्षेत्रीय शांति में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की, जबकि मुनीर ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही.

वैसे तो मुलाकात अपने आप में कोई सैन्य गठबंधन साबित नहीं करती, लेकिन हिंद महासागर की रणनीतिक तस्वीर में इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता. इसकी वजह है मालदीव की भौगोलिक स्थिति. हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के करीब स्थित मालदीव भारत के समुद्री सुरक्षा हितों के लिए अहम है. ऐसे में पाकिस्तान अगर मालदीव के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाता है, तो नई दिल्ली को इस बदलते समीकरण पर नजर रखनी ही होगी.

पाकिस्तान के लिए मालदीव क्यों अहम?

पाकिस्तान लंबे समय से हिंद महासागर में अपनी समुद्री भूमिका बढ़ाने की कोशिश करता रहा है. मालदीव के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ने से उसे इस क्षेत्र में कूटनीतिक और रणनीतिक संपर्क मजबूत करने का अवसर मिल सकता है. हालांकि अभी तक सामने आई जानकारी में किसी ऐसे समझौते की घोषणा नहीं हुई है, जिससे यह कहा जाए कि पाकिस्तान को मालदीव में सैन्य अड्डा या स्थायी सैन्य मौजूदगी मिलने जा रही है. हालांकि मालदीव में चीन के प्रभाव को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि यहां पाकिस्तान के लिए पैठ बनाना कोई मुश्किल काम नहीं होगा.

हिंद महासागर को लेकर बढ़ेगी चिंता

भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि मालदीव की विदेश और सुरक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है. चूंकि मालदीव भारत के बेहद नजदीक का देश है और सुरक्षा के लिहाज से ये काफी अहम है. अगर कहीं भविष्य में इसमें व्यापक रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा या रणनीतिक ढांचे का विस्तार होता है, तो हिंद महासागर में भारत के लिए समीकरण और जटिल हो सकते हैं. भारत और मालदीव के बीच रिश्ते पिछले 2-3 सालों में थोड़े बिगड़े भी हैं, जिसकी वजह से उसका पाकिस्तान के नजदीक जाना कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर दिक्कत पैदा करने वाला है.

भारत-मालदीव के रिश्ते 

मालदीव के साथ भारत के रिश्ते केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और मानवीय भी हैं. भारत अब भी मालदीव के प्रमुख पर्यटन बाजारों में शामिल है. साल 2024 से पहले मालदीव के पर्यटन में भारत का बड़ा योगदान था और उसकी अर्थव्यवस्था में भी. हालांकि पिछले दो सालों में विवाद के बाद ये आंकड़ा घटा है. 2025 में 1,31,625 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंचे थे, जबकि 2026 में जुलाई तक यह संख्या 74 हजार से अधिक ज्यादा रही. इसके अलावा भारत ने मालदीव के लिए बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 2025 में भारत ने मालदीव के लिए 4,850 करोड़ रुपये की नई लाइन ऑफ क्रेडिट और कर्ज भुगतान में राहत से जुड़े कदमों की घोषणा की थी.



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