Sidhi Schools Ground Report: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के मझौली जनपद क्षेत्र खंडहर हो चुकी इमारतें कभी स्कूल हुआ करती थीं, लेकिन आज इनकी हालत खराब हैं. दरिया ग्राम पंचायत में करीब 6 शासकीय स्कूल संचालित हैं. इन स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक 550 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल बच्चों की संख्या नहीं, बल्कि उनके लिए उपलब्ध सुरक्षित कमरों का है. दरिया शासकीय हाई स्कूल की स्थिति तो और भी खराब है. यहां करीब 250 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन नियमित पढ़ाई के लिए सिर्फ दो कमरे ही उपयोग में आ रहे हैं. स्कूल परिसर में 10 से ज्यादा कमरों वाला भवन भी मौजूद है.
भवन की हालत इतनी जर्जर है कि वह बच्चों के बैठने और पढ़ाई के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा. यानी स्कूल की इमारत मौजूद है, कमरे मौजूद हैं, लेकिन बच्चों के काम नहीं आ रहे हैं. सवाल यह है कि आखिर सरकारी स्कूल भवनों के निर्माण और रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि के बावजूद ये इमारतें इस हालत में कैसे पहुंच गईं?
लोहझार शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की हालत भी अच्छी नहीं है. यहां 180 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन बच्चों के बैठने लायक सिर्फ दो कमरे ही बचे हैं. स्कूल का एक भवन बारिश की वजह से धराशायी हो चुका है, जबकि बाकी करीब आठ कमरे भी ऐसी स्थिति में हैं कि उन्हें बच्चों की कक्षा के रूप में इस्तेमाल करना मुश्किल है. एक तरफ बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, दूसरी तरफ पढ़ाई के लिए सुरक्षित जगह लगातार कम होती जा रही है.
बच्चों को दूसरे स्कूलों में किया गया ट्रांसफर
ऐसे में सवाल सिर्फ भवन का नहीं है,सवाल है कि इन परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई किस तरह चल रही है? दरिया गांव के ही शासकीय प्राथमिक विद्यालय नचनी महुआ की तस्वीर भी कम चिंताजनक नहीं है. यहां स्कूल के लिए दो अलग-अलग भवन मौजूद हैं, लेकिन दोनों ही जर्जर और खंडहर हालत में पहुंच चुके हैं. भवन की स्थिति को देखते हुए स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल में ट्रांसफर करना पड़ा है.
मतलब जिस गांव के बच्चों के लिए स्कूल होना चाहिए था, उसी गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव का रुख करना पड़ रहा है. छोटे बच्चों के लिए यह सिर्फ दूरी का सवाल नहीं है, बल्कि उनकी नियमित पढ़ाई और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल है. दरिया ग्राम पंचायत आदिवासी अंचल में आती है. यहां शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर बताती है कि बच्चों के पास स्कूल तो हैं, लेकिन पर्याप्त और सुरक्षित भवन नहीं हैं. कई स्कूलों की पढ़ाई सिर्फ छह उपयोगी कमरों के सहारे संचालित हो रही है. वहीं दो स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को दूसरे गांव के स्कूलों का रुख करना पड़ा है. बरसात के मौसम में जर्जर भवनों की समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि ऐसे भवनों में सिर्फ पढ़ाई प्रभावित नहीं होती, बल्कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन जाती है.
शिकायत के बाद भी नहीं बदले हालात
सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रामीण इस समस्या को लेकर चुप नहीं बैठे. शिक्षकों से लेकर ग्रामीण और ग्राम पंचायत के सरपंच तक प्रशासन को लिखित शिकायतें दे चुके हैं. जर्जर भवनों की मरम्मत, नए भवन निर्माण और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की जा चुकी है. ग्राम पंचायत की ओर से क्षेत्रीय विधायक के माध्यम से भी उच्च स्तर पर पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों और पत्राचार के बावजूद जमीन पर समस्या का समाधान नहीं हुआ.
इस पूरे मामले में जब शिक्षा विभाग का पक्ष सामने रखा गया तो जिला शिक्षा अधिकारी भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे शासकीय स्कूल भवन हैं, जो जर्जर हो चुके हैं और बच्चों के पठन-पाठन के लिए उपयुक्त नहीं हैं. जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक ऐसे भवनों को चिन्हित किया गया है. जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को भी मांग पत्र भेजे जाने की बात कही गई है.
लेकिन सवाल यह है कि मांग पत्र भेजे जाने के बाद कार्रवाई कब होगी? क्योंकि दरिया जैसे गांवों में समस्या आज की है और बच्चों की पढ़ाई भी आज ही प्रभावित हो रही है. दरिया ग्राम पंचायत की कहानी सीधी जिले में जर्जर स्कूल भवनों की बड़ी समस्या की सिर्फ एक तस्वीर है. जिले में कई ऐसे स्कूल भवन सामने आए हैं, जहां भवनों की खराब हालत के चलते स्कूल संचालन प्रभावित हुआ है. कुछ जगहों पर बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करना पड़ा है. इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है.