Strawberry Farming: छत्तीसगढ के सरगुजा जिले में किसान पारंपरिक खेती के साथ साथ अब हाई वेल्यू फ्रूट्स क्राप कि खेती से भी किसान आमदनी का रास्ता तलाश रहे हैं. ऐसे में सितम्बर लास्ट में और अक्टूबर के शुरुवाती दिनों में स्ट्रॉबेरी कि रुपाई का सही समय माना जाता है. अगर किसान 1 से 5 अक्टूबर तक पौधा लगा देते हैं तो 45 दिन बाद शुरुवाती फल मिलना शुरु हो जाता है. खेती करने का तरीका आलू के जैसा ही होता है क्या क्या सावधानी बरतना है, किस्मों का सही चयन जानिए स्मार्ट ट्रिक्स एंड ट्रिप्स.. देखिए ये रिपोर्ट..
1 से 5 अक्टूबर तक करें रोपाई जानिए कैसे
कृषि एक्सपर्ट राकेश राजवाड़े ने Local 18 को बताया कि वर्तमान समय स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण है. सितंबर का आखिरी सप्ताह चल रहा है और अक्टूबर शुरू होने वाला है. ऐसे में किसान अगर 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के बीच स्ट्रॉबेरी के पौधे लगा देते हैं, तो फसल का शुरुआती उत्पादन करीब 45 दिन बाद शुरू हो सकता है..
5 हजार पौधों से 2500 किलो तक उत्पादन का अनुमान
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर किसान एक एकड़ में करीब 5 हजार पौधे लगाता है और औसतन एक पौधे से आधा किलो उत्पादन भी मानें, तो लगभग 2500 किलो स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो सकता है. अच्छी परिस्थितियों में एक पौधे से 500 ग्राम से लेकर 750 ग्राम तक फल मिलने की बात भी उन्होंने बताई.
₹200 किलो का भाव भी मानें तो 5 लाख की बिक्री
राकेश राजवाड़े के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की शुरुआती कीमत बाजार में काफी अच्छी रह सकती है.उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसान औसतन ₹200 प्रति किलो का भाव भी मानकर चले और 2500 किलो उत्पादन हो, तो करीब ₹5 लाख की सकल बिक्री हो सकती है.हालांकि वास्तविक आमदनी बाजार भाव, उत्पादन, गुणवत्ता और खेती की लागत पर निर्भर करेगी.
डेढ़ लाख तक खर्च, मुनाफे की संभावना
एक्सपर्ट ने बताया कि पौधे, मल्चिंग, खाद, सिंचाई और अन्य कृषि खर्चों को मिलाकर किसान को लागत वहन करनी होगी. उनके अनुमान के अनुसार, परिस्थितियों के आधार पर करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च हो सकता है और इसके बाद किसान को अच्छी शुद्ध आमदनी की संभावना रहती है.
प्लास्टिक मल्चिंग और मेड़ बनाना जरूरी
स्ट्रॉबेरी की खेती में सामान्य फसलों की तरह ही खेत की तैयारी करनी होती है, लेकिन इसमें प्लास्टिक मल्चिंग का खास महत्व है.किसान को खेत में मेड़ तैयार करनी होगी. पौधे से पौधे की दूरी करीब 30 से 45 सेंटीमीटर और मेड़ से मेड़ की दूरी करीब 90 से 120 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है.
खाद में वर्मी कंपोस्ट और गोबर खाद का इस्तेमाल.
राकेश राजवाड़े के मुताबिक, स्ट्रॉबेरी की खेती में खाद और पोषण का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है. किसान मिट्टी की जरूरत के अनुसार गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट, बोन मील और आवश्यक पोषक तत्वों का इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर फसल में एनपीके जैसे पोषक तत्वों का प्रबंधन भी किया जाता है.
किस्म का चुनाव सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण
स्ट्रॉबेरी में अच्छी पैदावार के लिए किस्म का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है. कृषि एक्सपर्ट ने सरगुजा के मौसम को ध्यान में रखते हुए विंटर डाउन किस्म का उल्लेख किया.उनके अनुसार, इस किस्म का प्रदर्शन अच्छा रहा है और सरगुजा के सिलफिली क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती बड़े स्तर पर की जा रही है.
मार्च-अप्रैल तक मिल सकता है उत्पादन
एक्सपर्ट के अनुसार, अक्टूबर की शुरुआत में रोपाई करने पर नवंबर के दूसरे हिस्से से दिसंबर के शुरुआती सप्ताह के आसपास फल आना शुरू हो सकता है और परिस्थितियों के अनुसार मार्च-अप्रैल तक उत्पादन जारी रह सकता है. स्ट्रॉबेरी को एक दिन के अंतराल पर तोड़ने की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए कटाई और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था भी किसान को पहले से करनी होगी.