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पूरे देश में SIR पर मचे घमासान के बीच महाराष्ट्र में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों का मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है. कोल्हापुर पीठ में दाखिल याचिका में इन नामों को फिर से बहाल करने की मांग की गई है. तीन महाराष्ट्र निवासियों ने चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को भी चुनौती दी है. याचिका में SIR पर रोक लगाने की मांग की गई है. साथ ही उन राज्यों में विधानसभा चुनाव टालने की मांग की गई है जहां SIR हुआ है. याचिकाकर्ताओं ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग भी रखी है.
महाराष्ट्र में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम बहाल कराने की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है. (फाइल फोटो)
पूरे देश में इस समय चुनाव आयोग और SIR को लेकर घमासान मचा हुआ है. इस बीच महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट को लेकर मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है. कोल्हापुर पीठ में दाखिल एक याचिका में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को फिर से बहाल करने की मांग की गई है. मामला सिर्फ नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है. याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से जारी 14 प्रशासनिक आदेशों को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वोटर रजिस्ट्रेशन से लेकर नाम हटाने और दोबारा जोड़ने तक कई फैसलों पर सवाल हैं. वोटर लिस्ट के आंकड़ों और चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को लेकर भी आपत्तियां उठाई गई हैं. अब नजर इस बात पर है कि बॉम्बे हाईकोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और SIR को लेकर उठाए गए इन सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है.
TOI की रिपोर्ट के अनुसार मामले में तीन महाराष्ट्र निवासियों ने याचिका दायर की है. इसमें चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों को चुनौती दी गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए. इसमें चुनावी पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है. साथ ही वोटर लिस्ट के आंकड़ों को संभालने की प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर से जुड़े कामकाज पर भी सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है. इतना ही नहीं उन्होंने उन राज्यों में विधानसभा चुनाव टालने की मांग भी की है जहां SIR की प्रक्रिया हुई है. उनका कहना है कि पहले नई मतदाता सूचियां तैयार हों और उन्हें कानून के मुताबिक मंजूरी मिले. इसके बाद ही चुनाव कराए जाएं.
14 फैसलों को लेकर क्या है याचिका में दावा?
याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं ने हाल में प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है. इसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के अलग-अलग फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई थी. याचिका के मुताबिक इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने से जुड़े मामले भी शामिल थे. नामों की बहाली और वोटर लिस्ट के आंकड़ों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे.
धारा 18 के पालन पर भी सवाल
याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 18 का भी जिक्र किया गया है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने अपने कामकाज में इस प्रावधान के मुताबिक जिम्मेदारी नहीं निभाई. इसी आधार पर उन्होंने आयोग की ओर से लिए गए कुछ फैसलों को चुनौती दी है. अब इस मुद्दे पर अदालत में क्या दलीलें सामने आती हैं यह सुनवाई के दौरान साफ होगा.
फॉर्म 6 में बदलाव को भी दी चुनौती
याचिका में इस साल जुलाई में फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को भी चुनौती दी गई है. फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है. याचिकाकर्ताओं ने SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग इसी मामले में की है. उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का समाधान जरूरी है.
रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में जांच की मांग
याचिका में एक स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग भी की गई है. इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज को देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक SIR के दौरान आंकड़ों को हटाने और सॉफ्टवेयर के जरिए कथित रुकावटों की जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकेगा कि वोटर लिस्ट में नाम हटाने और बहाल करने से जुड़ी प्रक्रिया कैसे चली.
किन राज्यों में चुनाव टालने की मांग?
याचिका में उन सभी राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव टालने की मांग की गई है जहां SIR किया गया है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले नई मतदाता सूचियां तैयार की जाएं. उन्हें कानून के मुताबिक मंजूरी मिले. इसके बाद चुनाव कराए जाएं. फिलहाल यह मांग याचिका का हिस्सा है और अदालत में इस पर सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी.