नूर खान, कराची, इस्‍लामाबाद सब स्‍वाहा, एयरफोर्स को मिलेगा ब्रह्मोस से भी बड़ा ब्रह्मास्‍त्र – Satellite Smart Anti-Airfield Weapons IAF ₹811 Crore

नूर खान, कराची, इस्‍लामाबाद सब स्‍वाहा, एयरफोर्स को मिलेगा ब्रह्मोस से भी बड़ा ब्रह्मास्‍त्र – Satellite Smart Anti-Airfield Weapons IAF ₹811 Crore


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नूर खान, इस्‍लामाबाद सब स्‍वाहा, IAF को मिलेगा ब्रह्मोस से बड़ा ब्रह्मास्‍त्र

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IAF Glide Bomb Deal: भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को लगातार मजबूत कर रहा है. लड़ाकू विमान से लेकर मिसाइल, ड्रोन और बम तक डेवलप किए जा रहे हैं. नेक्‍स्‍ट जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. इसके साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस ड्रोन भी डेवलप किए जा रहे हैं. अब रक्षा मंत्रालय ने इंडियन एयरफोर्स के लिए एक बड़ी डील की है.

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Su-30MKI एंटी एयरफील्‍ड वेपन से लैस करने की तैयारी है.

IAF Glide Bomb Deal: देश की सीमा दो तरफ से ऐसे देश से लगती है, जिनके साथ कई युद्ध लड़ जा चुके हैं. बात चीन और पाकिस्‍तान की हो रही है. चीन के साथ 1962 में लड़ाई लड़ी गई थी. इसके अलावा बॉर्डर पर झड़प भी होते रहे हैं. पाकिस्‍तान के साथ तो भारत कई जंग लड़ चुका है. ताजा मामले में पहलगाम अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर पाकिस्‍तान को उसकी औकात दिखाई थी. देश और दुनिया के बदलते माहौल को देखते हुए भारत के लिए खुद को टू-फ्रंट वॉर के लिए तैयार करना जरूरी हो गया है. इसे देखते हुए फाइटर जेट से लेकर मिसाइल, बम और ड्रोन तक डेवलप किया जा रहा है. अब रक्षा मंत्रालय ने इंडियन एयरफोर्स के लिए ₹811 करोड़ रुपये की डील की है, जिसके तहत वायुसेना को 160 सैटेलाइट स्‍मार्ट एंटी-एयरफील्‍ड वेपन मिलेंगे. यह एक ग्‍लाइड बम है.

दरअसल, भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) की खरीद का करार किया है. रक्षा मंत्रालय ने करीब 811 करोड़ रुपये के इस सौदे पर भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ हस्ताक्षर किए हैं. यह अनुबंध ‘बाय इंडियन-इंडिजिनियसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड’ (Buy Indian-IDDM) श्रेणी के तहत किया गया है. SAT-SAAW को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है. यह एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन ग्लाइड बम है, जिसे लड़ाकू विमानों से लंबी दूरी से लक्ष्य पर दागा जा सकता है. यह हथियार दुश्मन के एयरफील्ड और उससे जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है.

रक्षा मंत्रालय ने इंडियन एयरफोर्स के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की कीमत में 160 ग्‍लाइड बम खरीदने की डील की है.

जगुआर से Su-30MKI तक में होगा फिट

स्‍मार्ट एंटी-एयरफील्‍ड वेपन को भारतीय वायुसेना के जगुआर, हॉक और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है. इसकी क्षमता वायुसेना को दुश्मन के एयर डिफेंस क्षेत्र में प्रवेश किए बिना दूर से महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला करने में मदद कर सकती है. सौदे के तहत SAT-SAAW में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी. इसके कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम का निर्माण भी देश में किया जाएगा. इससे घरेलू रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हथियारों की सप्‍लाई फाइनेंशियल ईयर 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी. SAT-SAAW के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता में इजाफा होगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी मजबूती मिलेगी.

ऑपरेशन सिंदूर में Su-30MKI ने दिखाई थी ताकत

Su-30MKI ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान को उसकी औकात दिखाई थी. इसी फाइटर जेट ने पाकिस्‍तान पर ब्रह्मोस मिसाइल की बरसात की थी, जिससे कराची से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर तक में खलबली मच गई थी. अब उसी फाइटर जेट को नए एंटी-एयरफील्‍ड वेपर सिस्‍टम से लैस करने की तैयारी है. इस सिस्‍टम को खासतौर पर दुश्‍मनों के एयरफील्‍ड को तबाह करने के लिए डिजायन किया गया है. याद हो कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया गया था तो पाकिस्‍तान के होश उड़ गए थे. ऐसे में एंटी-एयरफील्‍ड वेपन से दुश्‍मनों के डिफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को चुटकियों में तबाह किया जा सकेगा.



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