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मध्य प्रदेश के मऊगंज में जल जीवन मिशन के कामों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है. EOW की जांच में 4 गांवों में पानी की टंकी, पाइपलाइन और नल कनेक्शन से जुड़े कामों में खामियां मिलने का दावा किया गया है. मामले में ठेकेदार और तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
एमपी के जल जीवन मिशन में घोटाला.
मऊगंज. मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के कामों को लेकर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW की जांच में कथित अनियमितताएं सामने आई हैं. एमपी सरकार ने इस मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा हुआ है. मऊगंज के चार गांवों में जल जीवन मिशन के तहत किए गए कामों की जांच के दौरान कहीं पानी की टंकी ढहने, कहीं नल कनेक्शन गायब होने और कहीं पाइपलाइन का काम अधूरा मिलने की बात सामने आई है. अधिकारियों ने बताया कि इन कामों के लिए कॉन्ट्रैक्टर को 3.85 करोड़ रुपए पहले ही दे दिए गए थे.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जुडमनिया रघुनाथ, खथखरी, करह उर्फ बैरागढ़ और शिवराजपुर, इन चार गांवों में कामों की जांच की गई. इन परियोजनाओं को साल 2021 में ‘हर घर नल जल’ योजना के तहत मंजूरी दी गई थी. काम पूरा करने के लिए 9 महीने की समयसीमा तय की गई थी. लेकिन 5 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया. मामले में EOW ने ठेकेदार और तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
रिपोर्ट के अनुसार, EOW ने ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी और PHE विभाग के अधिकारियों एपी तिवारी, संजय पांडे और जेपी द्विवेदी को मामले में आरोपी बनाया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत से घटिया या अधूरे काम को भुगतान सुरक्षित करने के लिए आगे बढ़ाया गया. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्स किया गया है.
कहीं टंकी ढही, कहीं पाइपलाइन अधूरी
EOW की जांच में खथखरी गांव में 75 किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी और उससे जुड़ी पाइपलाइन का काम जांच के दायरे में आया. रिपोर्ट के मुताबिक, टंकी का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मार्च 2026 में पानी भरने के दौरान ढह गया. जांच में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे. जुडमनिया रघुनाथ में करीब 7,600 मीटर HDPE पाइपलाइन, एक मोटर, 440 घरेलू नल कनेक्शन और अन्य काम प्रस्तावित थे. जांच में पाइपलाइन और मोटर से जुड़े काम पूरे नहीं मिलने की बात सामने आई. इसके बावजूद काम पूरा होने का दावा किए जाने का आरोप है.
कई कामों पर उठे सवाल
करह गांव में 250 किलोलीटर की ओवरहेड टंकी, करीब 11,500 मीटर पाइपलाइन और 740 घरेलू कनेक्शन का प्रावधान था. EOW के अनुसार, मौके पर कुछ काम अधूरे मिले. वहीं शिवराजपुर में 125 किलोलीटर की ओवरहेड टंकी, 8,000 मीटर पाइपलाइन, दो मोटर, इलेक्ट्रिकल वर्क और 700 घरेलू कनेक्शन का प्रावधान था. जांच में पाइपलाइन और अन्य कामों को लेकर भी सवाल उठाए गए. अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि परियोजनाओं में कथित अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है.