कानपुर में 1958 की जर्जर इमारत की जगह बनेगा हाईटेक फायर हेडक्वार्टर, एक कमांड से दौड़ेंगी दमकल की टीमें, कम होगा रिस्पांस टाइम

कानपुर में 1958 की जर्जर इमारत की जगह बनेगा हाईटेक फायर हेडक्वार्टर, एक कमांड से दौड़ेंगी दमकल की टीमें, कम होगा रिस्पांस टाइम


कानपुर: शहर में आग की घटनाओं पर जल्द काबू पाने और दमकल विभाग की पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. फजलगंज में वर्ष 1958 में बना पुराना फायर हेडक्वार्टर अब नए रूप में नजर आएगा. करीब 68 साल पुरानी यह इमारत समय के साथ काफी जर्जर हो चुकी है और इसे कंडम घोषित किया जा चुका है. अब इसकी जगह 40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से अत्याधुनिक और बहुमंजिला फायर हेडक्वार्टर बनाने की योजना है.

नया भवन सिर्फ फायर विभाग का कार्यालय नहीं होगा, बल्कि इसे पूरे शहर की आग बुझाने की व्यवस्था के लिए एक बड़े कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां से शहर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली आग की घटनाओं की निगरानी के साथ दमकल वाहनों और कर्मचारियों को जरूरत के हिसाब से मौके पर भेजने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी. विभाग का मकसद आग लगने के बाद रिस्पॉन्स टाइम को कम करना और शुरुआती स्तर पर ही आग पर काबू पाना है.

एक जगह से होगी पूरे शहर की निगरानी

चीफ फायर ऑफिसर दीपक शर्मा ने बताया कि फजलगंज स्थित मौजूदा भवन बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुका था. इसे कंडम घोषित किया जा चुका है. अब यहां 40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से अत्याधुनिक हेडक्वार्टर तैयार किया जाएगा. उन्होंने बताया कि नए भवन को सेंटर ऑफ कमांड के तौर पर विकसित किया जाएगा, जहां आधुनिक तकनीक और आग बुझाने से जुड़े हाईटेक उपकरण उपलब्ध होंगे.

इस व्यवस्था में जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा. इससे दमकल वाहनों की लोकेशन पर नजर रखने में मदद मिलेगी. आग की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद फायर टेंडर को चिन्हित कर उन्हें जल्द से जल्द घटनास्थल के लिए रवाना किया जा सकेगा. इससे एक ही जगह से पूरे शहर में चल रहे फायर रिस्पॉन्स को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा.

संकरी गलियों में रोबोट संभालेंगे मोर्चा

कानपुर में बड़ी चुनौती उन इलाकों की है, जहां सड़कें और गलियां इतनी संकरी हैं कि बड़ी दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी होती है. कई बार आग की लपटों और धुएं के कारण दमकलकर्मियों के लिए सीधे अंदर जाना भी जोखिम भरा हो जाता है. ऐसे स्थानों पर आधुनिक रोबोटिक फायर फाइटिंग सिस्टम काफी उपयोगी साबित हो सकता है. नए हेडक्वार्टर में इसी तरह के आधुनिक उपकरणों को शामिल करने की तैयारी है. रोबोट के जरिए जोखिम वाली जगहों पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई की जा सकेगी. इससे दमकलकर्मियों को भी सीधे खतरे में जाने से बचाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा केमिकल से लगी आग के लिए विशेष टेंडर और ऊंची इमारतों में बचाव के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाएं भी व्यवस्था का हिस्सा होंगी.

औद्योगिक इलाकों पर खास नजर, कम होगा रिस्पॉन्स टाइम

कानपुर में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां, गोदाम और औद्योगिक इकाइयां हैं. फजलगंज, दादानगर, पनकी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने पर तेजी से कार्रवाई करना बेहद जरूरी होता है. कई जगह ज्वलनशील सामान होने के कारण छोटी आग भी कुछ ही समय में बड़ा रूप ले सकती है. नए हेडक्वार्टर से ऐसी घटनाओं में दमकल विभाग की तैयारी और प्रतिक्रिया दोनों को मजबूत करने का लक्ष्य है. आधुनिक कमांड सिस्टम, जीपीएस मॉनिटरिंग और नए उपकरणों के जरिए आग की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई को ज्यादा व्यवस्थित किया जा सकेगा. अधिकारियों का मानना है कि नया केंद्र तैयार होने के बाद शहर की फायर सर्विस को एक जगह से बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी.

करीब सात दशक पुराने भवन की जगह बनने वाला यह नया हेडक्वार्टर कानपुर की फायर व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. लक्ष्य यही है कि आग कहीं भी लगे, सूचना मिलने के बाद दमकल की टीम कम से कम समय में पहुंचे और आधुनिक उपकरणों की मदद से आग को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की कोशिश की जा सके.



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