एशियम गेम्सः 12 साल पहले पिता का निधन, दौड़ने के लिए जूते नहीं और 7 भाई-बहन, उड़नपरी सीमा कुमारी की संघर्ष की कहानी

एशियम गेम्सः 12 साल पहले पिता का निधन, दौड़ने के लिए जूते नहीं और 7 भाई-बहन, उड़नपरी सीमा कुमारी की संघर्ष की कहानी


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Athelete Seema Kumari Story: जापान में एशियन गेम्स में सीमा कुमारी ने 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता. हिमाचल के चंबा की सीमा ने गरीबी के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की. सीमा ने धर्मशाला में प्रेक्टिस शुरू की थी. उनके पिता का निधन हो चुका है औऱ परिवार में सात भाई बहन हैं.

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जापान में एशियन गेम्स में भारत के लिए 10 हजार मीटर की दौड़ में सीमा कुमारी ने कांस्य पदक जीता.

चंबा. जापान में एशियन गेम्स में भारत के लिए 10 हजार मीटर की दौड़ में सीमा कुमारी ने कांस्य पदक जीता. करीब 16 साल पहले भारत इस स्पर्धा में पदक जीता था. ऐसे में सीमा की कामयाबी को लेकर पूरा देश खुश है. हिमाचल के छोटे से गांव से निकली सीमा के लिए यह मूमेंट किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं हैं. क्योंकि सीमा का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा और मां ने उनका लालन पालन किया. सीमा को अब हिमाचल प्रदेश की खेल नीति के तहत एक करोड़ रुपये ईनाम सरकार की ओर से दिया जाएगा.

दरअसल, चंबा के रेटा गांव की रहने वाली सीमा ने खेल के प्रति जूनून के चलते सातवीं कक्षा में घर छोड़ा था और बेहतर प्रशिक्षण के लिए वह धर्मशाला के साई हॉस्टल चली गई थी. छह बच्चों में सबसे छोटी सीमा के पिता का साल 2012 में पिता का निधन हो गया था. ऐसे में मां के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदार थी. गुरुवार को सीमा का जब मैच चल रहा था तो मां टकटकी लगाए हुए टीवी पर बेटी की कामयाबी को देखती रही.

साल 2017 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए सीमा के पास पैसे नहीं थे तो मां केसरी देवी ने अपनी एफडी तुड़वाकर बेटी को थाईलैंड के बैंकाक भेजा था और वहां सीमा ने कांस्य पदक जीता था.

सीमा ने चंबा के दुर्गम रेटा गांव से सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने दौड़ की तैयारी की. साल 2018 में वह खेलो इंडिया योजना से भी जुड़ीं. साल 2024 में हांगकांग में 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में सीमा ने 10 हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीता. विश्वएथलेटिक्स के रिकॉर्ड में चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन, एशियन यूथ ओलंपिक की रजत पदक विजेता के रूप में सीमा का नाम दर्ज है. एशियाड से पहले सीमा कुमारी ने इस साल 10 हजार मीटर में 32:02.43 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था. जो कि एथलेटिक्स फेडरेशन और वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ है.  अहम बात है कि शुरुआत में सीमा के पास दौड़ने के लिए जूते भी नहीं थे.

बधाईयों का तांता

सीमा के लिए पूरे हिमाचल प्रदेश से बधाईंया मिल रही है. टीम इंडिया के पूर्व कबड्डी कप्तान और डीएसपी अजय ठाकुर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि  एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतने पर मेरी छोटी बहन सीमा को हार्दिक बधाई., सीमा ने अपनी मेहनत, लगन और जज़्बे से यह साबित कर दिया कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने की हिम्मत हो, तो इंसान इतिहास रच सकता है. मेरी छोटी बहन सीमा, तुम्हारी इस शानदार उपलब्धि पर मुझे बेहद गर्व है. तुम्हारी सफलता न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है. आप जैसे खिलाड़ी ही देश का असली गौरव हैं, जो तिरंगे की शान को दुनिया के मंच पर ऊंचा करते हैं. ढेरों शुभकामनाएं और उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत-बहुत बधाई.

सीएम सुक्खू ने भी की तारीफ

उधर, सीएम सुक्खू ने कहा कि चंबा जिला के रेटा गांव की बेटी सीमा कुमारी जी ने एशियाई खेलों में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर हिमाचल और देश का मान बढ़ाया है. बेटी सीमा को इस शानदार उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई. आगामी 5,000 मीटर दौड़ के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.आपकी इस सफलता पर पूरे देश को गर्व है. गौर रहे कि हिमाचल की खेल नीति के तहत गोल्ड जीतने पर पांच करोड़, सिल्वर मेडल पर तीन करोड़ और कांस्य पदक पर एक करोड़ रुपये का इनाम सरकार देती है.



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