Xi Jinping US Visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच चुके हैं. शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं. आज यानी 24 सितंबर को खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग का स्वागत किया. वॉशिंगटन में उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अहम बैठक है. यह एक दशक से ज्यादा समय बाद शी जिनपिंग की पहली अमेरिकी राजकीय यात्रा है. साथ ही करीब छह महीने के भीतर दोनों नेताओं की दूसरी आमने-सामने मुलाकात है.
क्यों अहम है जिनपिंग की यह यात्रा
यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं. हालांकि, दोनों के बीच व्यापार, टैरिफ, तकनीक, ताइवान और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर लगातार तनाव रहा है. अभी दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक अस्थायी समझ बनी हुई है, लेकिन यह व्यवस्था नवंबर में खत्म होनी है. इसलिए इस बैठक से यह संकेत मिल सकता है कि दोनों देश तनाव को आगे बढ़ाते हैं या बातचीत के जरिए इसे संभालने की कोशिश करते हैं.
क्या मुद्दा रहेगा अहम?
ईरान का मुद्दा भी इस बैठक में अहम रहेगा. अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान को दी जा रही किसी भी संभावित आर्थिक, तकनीकी या खुफिया मदद पर अपनी भूमिका स्पष्ट करे. जबकि चीन ईरान के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर जोर दे सकता है.
शी जिनपिंग को रिसीव करने के लिए ट्रंप एयरपोर्ट पर पहुंचे. (रॉयटर्स)
अमेरिका की उम्मीदें क्या हैं?
अमेरिका की प्राथमिकता व्यापार और बाजार पहुंच के साथ-साथ चीन से रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करना है. इसके अलावा ट्रंप प्रशासन चीन के साथ AI और तकनीकी जोखिमों पर बातचीत चाहता है. हालांकि, अमेरिका चीन पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने की कोशिश भी जारी रखेगा.
चीन क्या चाहता है?
चीन की तरफ से मुख्य संदेश है कि *बातचीत जारी रहे, व्यापार युद्ध दोबारा न बढ़े और दोनों देश अपने मतभेदों को संभालें। बीजिंग खास तौर पर टैरिफ और व्यापार पर स्थिरता चाहता है, ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध अचानक फिर खराब न हों। चीन के लिए **ताइवान* भी बेहद संवेदनशील मुद्दा है और वह अमेरिकी सैन्य समर्थन को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रख सकता है।
क्या है बड़ी तस्वीर
सीधे शब्दों में कहें तो यह सिर्फ एक राजकीय यात्रा नहीं है. बल्कि अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक है. दोनों देशों के बीच सभी विवाद खत्म होने की उम्मीद नहीं है. असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप और शी जिनपिंग टैरिफ वॉर यानी व्यापार युद्ध को फिर भड़कने से रोकने, रणनीतिक संवाद बनाए रखने और कुछ क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता निकालने पर सहमत होते हैं.