News18 DEFCON 2026: 80 से ज्यादा देशों में ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों का डंका
Last Updated:
News18 DEFCON 2026: दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदार की पुरानी पहचान को पीछे छोड़ते हुए भारत अब ग्लोबल डिफेंस मार्केट में एक बड़े मैन्युफैक्चरर और निर्यातक के रूप में स्थापित हो चुका है. कभी अपनी सैन्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने वाले देश ने अब रक्षा क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता का लोहा पूरी दुनिया में मनवा दिया है.
ग्लोबल डिफेंस मार्केट में भारत ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है.
DEFCON 2026: दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में शुमार रहने वाला भारत अब वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद डिफेंस मैन्युफैक्चरर बनकर उभर रहा है. केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर अब दुनिया के रक्षा बाजार में देश का दबदबा कायम कर रहा है. ठोस नीतिगत सुधारों, स्वदेशी नवाचार, निजी कंपनियों की मजबूत भागीदारी और तेजी से विकसित होते औद्योगिक ढांचे के दम पर भारत के रक्षा इकोसिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है.
आंकड़ों के मोर्चे पर भी यह तरक्की बेहद ठोस नजर आ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया. वहीं भारतीय रक्षा निर्यात ने 38,424 करोड़ रुपये का सर्वकालिक नया रिकॉर्ड बना दिया है. आज मेड इन इंडिया सैन्य साजो-सामान और हथियार दुनिया के 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं. इस पूरी मुहिम में प्राइवेट सेक्टर, एमएसएमई और डिफेंस स्टार्टअप्स की बढ़ती हिस्सेदारी ने भारत को ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है.
स्वदेशी रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल
बीते दशक में रक्षा क्षेत्र में लागू की गई नीतियों का असर अब सीधे उत्पादन और तकनीक पर दिखने लगा है.
1.78 लाख करोड़ का ऑल-टाइम हाई: वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा निर्माण ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए.
38,424 करोड़ का रिकॉर्ड निर्यात: रक्षा उत्पादों के एक्सपोर्ट में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत हो रहा है.
80 से अधिक देशों में गूंज रहा ‘मेड इन इंडिया’ का डंका
भारतीय हथियारों की साख अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार तेजी से स्थापित हो रही है.
वैश्विक बाजार में गहरी पैठ: भारत में बने आधुनिक रक्षा उपकरण और तकनीक आज दुनिया के 80 से अधिक मुल्कों की सेनाएं इस्तेमाल कर रही हैं.
प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप्स की ताकत: एमएसएमई और नए डिफेंस स्टार्टअप्स के जुड़ने से रिसर्च, डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग को नई धार मिली है.