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Tattoo shop near me dehradun : कोई अपनी मां के प्रति प्यार जताने के लिए उनके नाम का टैटू बनवा रहा है, तो कोई अपनी गर्लफ्रेंड के लिए. देहरादून में टैटू बनवाने का क्रेज हर उम्र के लोगों के बीच तेजी से बढ़ रहा है. यहां टैटू केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों के लिए अपनी भावनाओं, प्रेम और आस्था को दिखाने का तरीका है. जेन जी में अपने पसंदीदा रोल मॉडल्स और आइडल्स के पोर्ट्रेट बनवाने की होड़ मची हुई है. जापान की समुराई और मिस्र की आई ऑफ होरस के सिम्बल्स की भी जबरदस्त मांग है. कल 18 से देहरादून की टैटू अर्टिस्ट निशा गुरुंग बताती हैं कि जो लोग यह परखना चाहते हैं कि टैटू उन पर कैसा लगेगा, वे पहले टेंपरेरी टैटू बनवाते हैं. संतुष्ट होने के बाद ही उसे परमानेंट करवाते हैं.
देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में टैटू बनवाने का क्रेज हर उम्र के लोगों के बीच तेजी से बढ़ रहा है. अब टैटू सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं रह गया है, बल्कि लोग इसके जरिए अपनी भावनाओं, प्रेम और आस्था को बयां कर रहे हैं. कोई अपनी मां के प्रति प्यार जताने के लिए उनके नाम या चेहरे का टैटू बनवा रहा है, तो कोई अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रिश्ते को खास बनाने के लिए उनके नाम की कलाकृति तराशवा रहा है. युवाओं में अपने पसंदीदा रोल मॉडल्स और आइडल्स के पोर्ट्रेट बनवाने की भी होड़ मची हुई है. लोकल 18 से देहरादून की टैटू अर्टिस्ट निशा गुरुंग बताती हैं कि टैटू के इन डिजाइनों में वैश्विक और सांस्कृतिक विविधता की साफ झलक देखने को मिल रही है. दून के युवा अंतरराष्ट्रीय कलाओं को काफी पसंद कर रहे हैं, जिसमें जापान की पारंपरिक आर्ट जैसे ड्रैगन या समुराई शामिल हैं. मिस्र (इजिप्ट) की रहस्यमयी और ऐतिहासिक प्रतीकात्मक कला, जैसे एनुबिस और आई ऑफ होरस के सिम्बल्स की भी जबरदस्त मांग है. लोग इन प्राचीन और सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए खुद को एक्सप्रेस कर रहे हैं.
ये वाला एवरग्रीन
निशा गुरुंग कहती हैं कि टैटू के ट्रेंड्स समय-समय पर बदलते रहते हैं और हर उम्र के वर्ग की पसंद अलग होती है. यंगस्टर्स ज्यादातर वाइल्ड लाइफ, एनिमे और अलग-अलग सिम्बल्स के टैटू बनवाना पसंद करते हैं. लड़कियों के बीच मिनिमल डिजाइन, जैसे कि छोटे फ्लावर्स और नाजुक कलाकृतियां काफी ट्रेंड में हैं. इसके अलावा किसी भी प्रियजन के नाम वाले टैटू का क्रेज हमेशा एवरग्रीन रहता है. उम्र के एक खास पड़ाव के बाद टैटू की पसंद में धार्मिकता और आध्यात्मिकता देखने को मिलती है.
निशा कहती हैं कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग ज्यादातर रिलीजियस टैटू बनवाते हैं, जिनमें ‘ॐ’, त्रिशूल या विभिन्न देवी-देवताओं की तस्वीरें प्रमुख होती हैं. फैंस अपने पसंदीदा सेलिब्रिटी, सिंगर या एक्टर के टैटू को भी कॉपी करते हैं, भले ही उन्हें उस टैटू का असल मतलब मालूम न हो. कई लोग परमानेंट टैटू बनवाने से पहले उसका लुक देखने के लिए टेंपरेरी टैटू का सहारा लेते हैं. आर्टिस्ट निशा गुरुंग के मुताबिक जब फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की एक्ट्रेस चित्रांशी रावत शूटिंग के लिए देहरादून आई थीं, तब उन्होंने भी उनके लिए एक टेंपरेरी टैटू बनाया था. जो लोग यह परखना चाहते हैं कि टैटू उन पर कैसा लगेगा, वे पहले टेंपरेरी टैटू बनवाते हैं और संतुष्ट होने के बाद ही उसे परमानेंट करवाते हैं.