थांवला सही बना तो पौधे की बढ़वार बेहतर, ये गलतियां कर दी तो हो सकता है नुकसान
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Farming Tips: पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए सही तरीके से थांवला तैयार करना बेहद जरूरी माना जाता है. थांवला बनाते समय छोटी-सी गलती भी पानी के निकास, मिट्टी की स्थिति और जड़ों के विकास को प्रभावित कर सकती है. किसानों और बागवानी करने वालों को पौधा लगाते समय थांवले की गहराई, मिट्टी, पानी और जड़ों से जुड़ी जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. इन 6 सामान्य गलतियों से बचकर पौधे की बेहतर ग्रोथ में मदद मिल सकती है.
फलदार पौधों और पेड़ों की अच्छी बढ़वार के लिए थांवला बनाना जरूरी माना जाता है. इससे सिंचाई का पानी पौधे की जड़ों तक पहुंचता है और खाद देने में भी सुविधा रहती है. हालांकि थांवला बनाते समय कुछ सावधानियां नहीं रखने पर पौधे को फायदा मिलने के बजाय नुकसान हो सकता है. खासकर तने के पास पानी जमा होने और जड़ों को नुकसान पहुंचने से पेड़ की सेहत प्रभावित हो सकती है.
तने से बिल्कुल सटाकर न बनाएं थांवला: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि थांवला बनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि इसे पौधे के तने से बिल्कुल सटाकर नहीं बनाना चाहिए. तने के आसपास लगातार नमी रहने से सड़न और फफूंद लगने का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा थांवला सामान्य तौर पर गोलाकार बनाएं और पौधे की उम्र व फैलाव के अनुसार उसका आकार धीरे-धीरे बढ़ाते रहें. इसकी मेड़ मजबूत और समतल रखें, ताकि सिंचाई का पानी बाहर निकलकर बर्बाद न हो.
मिट्टी ज्यादा गहरी खोदने से बचें: थांवला तैयार करते समय मिट्टी को बहुत ज्यादा गहराई तक खोदना भी नुकसानदायक हो सकता है. विशेषकर पुराने और बड़े फलदार पेड़ों में सतह के आसपास फैली जड़ें सक्रिय होती हैं. गहरी खुदाई से इन जड़ों को चोट पहुंच सकती है, जिससे पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इसलिए जरूरत के अनुसार ही मिट्टी हटाएं और जड़ों को नुकसान पहुंचाने से बचें.
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ड्रिप सिंचाई में तने पर सीधे पानी न पड़े: जिन बगीचों में ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था है, वहां भी थांवले की सही बनावट जरूरी है. पौधे के चारों ओर जड़ों वाले क्षेत्र में नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी लगातार सीधे तने पर नहीं गिरना चाहिए. ड्रिप की स्थिति ऐसी रखें कि पानी जड़ क्षेत्र में समान रूप से पहुंचे. तने के पास पानी जमा होने से बचाएं, क्योंकि लगातार नमी रोगों का कारण बन सकती है.
जलभराव से जड़ों को हो सकता है नुकसान: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि सिंचाई की मात्रा मिट्टी के प्रकार, मौसम, पौधे की उम्र और फसल की जरूरत के हिसाब से तय करनी चाहिए. गर्मी में पौधों को अपेक्षाकृत अधिक पानी की जरूरत पड़ सकती है, जबकि ठंड के मौसम में सिंचाई का अंतर बढ़ाया जा सकता है. फलदार पौधों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन की कमी हो सकती है और जड़ सड़न की समस्या बढ़ सकती है.
खाद डालते समय तने से रखें दूरी: थांवले में खाद या उर्वरक डालते समय भी तने से उचित दूरी रखना जरूरी है. खाद, गोबर की खाद या कम्पोस्ट को तने से चिपकाकर डालने के बजाय थांवले के बाहरी हिस्से में जड़ों के सक्रिय क्षेत्र के आसपास समान रूप से मिलाएं. यूरिया और पोटाश जैसे उर्वरकों को भी सीधे तने के पास डालने से बचना चाहिए. इससे जड़ों को नुकसान का खतरा कम रहता है.
पौधे की उम्र के साथ बदलें थांवले का आकार: किसान यदि थांवले का आकार पौधे की उम्र और जड़ क्षेत्र के अनुसार रखते हैं तो सिंचाई और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग हो सकता है. छोटे पौधों के लिए छोटा थांवला पर्याप्त रहता है, जबकि पेड़ के बढ़ने के साथ इसे धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकता है. थांवले की मेड़ को समय-समय पर ठीक करते रहें और उसमें जमा खरपतवार व अतिरिक्त मिट्टी हटाते रहें. सही तरीके से बनाया गया थांवला पौधे की जड़ों तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है.