UNGA में हुई खींचतान के बाद ईरान ने अमेरिका को खुली चुनौती दे दी है. ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने अमेरिका को अपनी शर्तें मानने के लिए सिर्फ 5 दिनों की मोहलत दी है. उन्होंने साफ-साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने तय समय में उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर महासंग्राम होगा. इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका का साथ देने वाले पड़ोसी मुल्कों को भी आड़े हाथों लिया है और उनके जहाजों व उड़ानों पर कड़ा एक्शन लेने की धमकी दी है. अमेरिका की तरफ से ईरानी एयरलाइंस पर 23 सितंबर से नई पाबंदियां थोपने के ऐलान के बाद दोनों देशों के बीच जंग का नया मोर्चा खुल गया है.
अमेरिका को 5 दिनों की डेडलाइन: आखिर क्या चाहता है ईरान?
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रजाई ने सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB को दिए एक सनसनीखेज इंटरव्यू में अमेरिका को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अपनी गलतियों को सुधारने और ईरान की शर्तें पूरी करने के लिए सिर्फ 5 दिनों का वक्त बचा है.
रजाई ने साफ कर दिया कि जब तक वाशिंगटन ईरान की जायज मांगों और शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही को सामान्य नहीं होने दिया जाएगा. ईरान का ये कड़ा कदम सीधे तौर पर अमेरिका को बैकफुट पर लाने और उस पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है.
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारा हथियार है’, ईरान ने तरेरी आंखें
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते होकर पूरी दुनिया में जाता है. इस रास्ते पर रुकावट का सीधा मतलब है दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत होना और कीमतों का बेकाबू हो जाना.
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने इंटरव्यू के दौरान बेबाकी से कहा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरानी राष्ट्र के लिए अपने अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें हासिल करने का एक बेहद असरदार हथियार है’.
ईरान के इस बयान से साफ है कि वो अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेकने के बजाय दुनिया के सबसे बड़े तेल व्यापारिक रास्ते को अपनी ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. ईरान का मानना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देश उस पर आर्थिक पाबंदियां लगाएंगे तो ईरान भी ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को रोककर करारा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा.
अमेरिका का नया दांव: 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस पर बैन की तैयारी
ईरान की इस धमकी की असल वजह अमेरिका की वो नई पाबंदी है, जिसने ईरान के एयरलाइन सेक्टर पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. अमेरिकी खजाना मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ऐलान किया था कि 23 सितंबर तक सभी ईरानी एयरलाइंस का काम पूरी तरह ठप करने की तैयारी है. अमेरिका ने यह नया दांव ‘सेकेंडरी सेंक्शंस’ के जरिए खेला है.
- सर्विस देने वाली कंपनियों पर गाज: अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी कंपनी या देश ईरानी विमानों को रीफ्यूलिंग, मेंटेनेंस या ग्राउंड सर्विस देगा, उस पर भी सख्त अमेरिकी पाबंदियां लगा दी जाएंगी.
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संकट: इस फैसले के बाद कोई भी विदेशी एयरपोर्ट ईरानी जहाजों को सेवा देने से कतरा रहा है, जिससे ईरान की हवाई सेवाएं पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं.
पड़ोसी मुल्कों को ईरान की खुली चेतावनी: ‘अमेरिका के खेल में न पड़ें’
अमेरिकी पाबंदियों से बौखलाए ईरान ने अब अपने पड़ोसी देशों पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया है. मोहसेन रजाई ने खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी मुल्कों को सख्त हिदायत दी है कि वे अमेरिका के इस खतरनाक खेल का हिस्सा न बनें. ईरान ने पड़ोसी देशों को तीन सीधे मैसेज भेजे हैं.
- उड़ानों पर रोक की धमकी: ईरान ने साफ कहा है कि जो भी पड़ोसी देश अमेरिका की इन पाबंदियों में उसका सहयोग करेगा, ईरान उस देश के विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने नहीं देगा और उनकी उड़ानों को ब्लॉक कर देगा.
- अमेरिका का मोहरा न बनें: रजाई ने कहा कि पड़ोसी मुल्कों को ईरान के खिलाफ अमेरिकी दुस्साहस और उसके राजनीतिक मुकदमों में प्यादा नहीं बनना चाहिए.
- सुरक्षा से समझौता नहीं: ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर किसी पड़ोसी देश की जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ होता है, तो उसे दुश्मन की हरकत माना जाएगा.
तेल बाजार और दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस नए विवाद ने दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और जानकारों की चिंता बढ़ा दी है. अगर 5 दिनों की ये डेडलाइन बिना किसी समझौते के खत्म हो गई, तो इसके नतीजे बहुत खतरनाक हो सकते हैं.
- तेल की कीमतों में आग: अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह ब्लॉक रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकते हैं.
- महंगाई का भयंकर विस्फोट: कच्चे तेल के महंगे होने से भारत सहित दुनिया भर के देशों में माल ढुलाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम अचानक बढ़ जाएंगे.
- हवाई सफर होगा महंगा: ईरानी एयरस्पेस बंद होने और पाबंदियों के कारण अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ेगी, जिससे एयर टिकट के दाम आसमान छू सकते हैं.
- सीधे सैन्य टकराव की आशंका: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अगर किसी मर्चेंट शिप या टैंकर पर हमला होता है, तो ये तनाव सीधे तौर पर एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है.
कूटनीति की मेज या जंग का मैदान?
ईरान द्वारा दी गई 5 दिनों की डेडलाइन की घड़ी तेजी से टिक-टिक कर रही है. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं. क्या डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान की शर्तों के आगे थोड़ा नरम पड़ेगा, या फिर पाबंदियों को और कड़ा करके मिडल ईस्ट को एक नए युद्ध की आग में झोंक देगा?
कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों ही देश इस समय आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. ईरान जहां तेल सप्लाई और समुद्री रास्तों को रोककर अमेरिका पर दबाव बना रहा है, वहीं अमेरिका आर्थिक पाबंदियों से ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ना चाहता है.
लेकिन इस पूरी खींचतान में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता और ग्लोबल इकोनमी का हो रहा है. अगर आने वाले 5 दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत से कोई हल नहीं निकला, तो दुनिया को एक और बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा.