नीतीश कुमार के बिहार में सियासी सीन से हटने के बाद नई सम्राट सरकार के भीतर ही राजनीतिक समीकरण बिगड़ने लगे हैं और सत्ताधारी गठबंधन की सबसे प्रमुख पार्टी बीजेपी के अंदर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं. बीजेपी के अपने विधायक और पूर्व सांसद ने ही मोर्चा खोल दिया है. एक ने खुल के अपनी बात कही है तो दूसरे का ऑडियो वायरल हो रहा है जो सम्राट सरकार की कार्यशैली की पोल खोल रहा है. बता दें कि लौरिया से बीजेपी विधायक विनय बिहारी के बागी तेवर और पूर्व सांसद रमा देवी के एक कथित ऑडियो के वायरल होने से पार्टी में हड़कंप मचा हुआ है.
बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार की कार्यशैली और चुनाव के दौरान खातों में पैसे भेजने के फैसले पर सवाल उठाए हैं. इसी बीच बीजेपी की पूर्व सांसद रमा देवी का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें वह टिकट, पैसे और भ्रष्टाचार को लेकर टिप्पणी करती सुनाई दे रही हैं. राजनीति के जानकारों की नजर में विधायक विनय बिहारी का अपनी ही सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलना और पूर्व सांसद रमा देवी का कथित वायरल ऑडियो में अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त करना, सिर्फ दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह उस बड़े अंदरूनी संघर्ष का ट्रेलर है जो नीतीश कुमार के हाथ से एनडीए की कमान जाने के बाद बीजेपी में शुरू हो गया है.
विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल
बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री विनय बिहारी ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया है. उन्होंने चुनाव के दौरान जीविका दीदियों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जाने का जिक्र करते हुए पूछा कि जब विकास का काम चल रहा था तो चुनाव के समय यह राशि क्यों भेजी गई. विनय बिहारी ने कर्ज लेकर विकास करने की नीति पर भी सवाल उठाया. भोजपुरी अंदाज में उन्होंने कहा, “केतना कर्जा खइबअ ऐ राजा, कर्जा खा के विकास कइसे करबअ ऐ राजा.” उन्होंने विकास को लेकर भी सरकार से सवाल किए.
ज्यादा बोलने पर टिकट कटता है- विनय बिहारी
विनय बिहारी ने अपने बयान में पार्टी के भीतर अपनी स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कम बोलने पर वोट कटता है, ज्यादा बोलने पर टिकट कटता है और बहुत ज्यादा बोलने पर गर्दन कटती है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि मीडिया के सामने अपनी बात रखने का क्या परिणाम होगा. उनके इस बयान के बाद बीजेपी प्रदेश नेतृत्व की ओर से उन्हें तलब किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है. वहीं, सम्राट सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने विनय बिहारी की बात को उनकी निजी राय बताया और कहा कि सरकार के पास विकास और राहत के काम के लिए पैसे की कमी नहीं है.
अब रमा देवी का कथित ऑडियो चर्चा में
इसी बीच रमा देवी के नाम से एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. ऑडियो के मुताबिक इसमें वह कथित तौर पर कहती सुनाई दे रही हैं, “पैसा का दुनिया है, जिसका मोटरी भारी है, उसको टिकट मिलेगा, कमासुत पूत की जरूरत है.” ऑडियो में आगे कथित तौर पर जनता को नेताओं के वादों के बारे में कहते हुए सुनाई देता है कि “जनता को झूठो का भुलावा है कि नेता ई करेंगे, उ करेंगे.” वायरल ऑडियो में भ्रष्टाचार को लेकर भी कथित टिप्पणी है. इसमें कहा गया है कि जितना पैसा आता है उसका आधा लूट होता है.
भ्रष्टाचार को लेकर भी टिप्पणी
हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि और इसकी पूरी रिकॉर्डिंग का संदर्भ अभी स्पष्ट नहीं है. इसलिए इन टिप्पणियों को रमा देवी का प्रमाणित बयान नहीं माना जाना चाहिए और न्यूज 18 भी इस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. लेकिन, वायरल ऑडियो में कही गई बात तो गंभीर सवाल जरूर खड़े कर रही है. बता दें कि रमा देवी के एक अलग हालिया बयान की रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने मोतिहारी के एक कार्यक्रम में बिना किसी का नाम लिए ‘कंस’ का जिक्र किया था. वहीं, विनय बिहारी ने इसके पहले भी बिहार में बुलडोजर एक्शन पर सवाल उठाए थे. अब एक बार फिर विनय बिहारी का खुला मोर्चा और रमा देवी के वायरल ऑडियो ने बिहार बीजेपी की अंदरूनी कलह को सामने ला दिया है.
बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती, कैसे संभलेगी बात
बिहार में नीतीश कुमार के जाने के बाद बीजेपी पहली बार अकेले सत्ता संभाल रही है और सम्राट चौधरी के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ विपक्ष जमुई कांड जैसे मुद्दों पर इस्तीफा मांग रहा है, दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के विधायक मोर्चा खोल रहे हैं. अगर समय रहते अंदरूनी नाराजगी नहीं संभाली गई तो इसका असर आने वाले विधान परिषद चुनाव और 2027 में अलग-अलग राज्यों की चुनावी तैयारी पर पड़ सकता है. वहीं, वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद सत्ता और संगठन में तालमेल की कमी है. कई पुराने नेताओं को लग रहा है कि उनकी अनदेखी हो रही है. हालांकि, इस बीच, सूचना है कि बीजेपी आलाकमान अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है.
क्या है असंतोष की असली वजह?
बहरहाल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कड़े फैसलों से अधिकारी तो एक्शन में हैं, लेकिन विधायकों का जनाधार नाराज हो रहा है, और उनके माथे पर चिंता की लकीरें उभर रहीं हैं. इसी तरह पुरानी पीढ़ी के नेताओं में असंतोष बीजेपी के लिए सही संकेत तो नहीं है. ऐसे में अब देखना होगा कि बीजेपी इस बवाल को कैसे शांत करती है. लेकिन, जिस तरह से अंदरूनी असंतोष अब सार्वजनिक रूप से प्रकट हो रहे हैं, इससे इतना साफ है कि इस नए और आक्रामक नेतृत्व को पार्टी के पुराने और पारंपरिक नेता पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं.
‘अपनों के मोर्चे’ से कैसे बचेगी बीजेपी?
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि बिहार बीजेपी इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रही है. नीतीश कुमार के हटने के बाद पार्टी के पास खुद को स्थापित करने का स्वर्णिम मौका था, लेकिन ‘अपनों के ही इस मोर्चे’ ने सम्राट सरकार के पैरों के नीचे की राजनीतिक जमीन को अस्थिर कर दिया है. अगर बीजेपी ने समय रहते इस गुटबाजी और असंतोष को नहीं दबाया, तो आगामी राजनीति में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि बिहार एनडीए में नीतीश कुमार की लीडरशिप जाने के बाद बिहार में बीजेपी का यह पहला बड़ा अंदरूनी टेस्ट है. ऐसे में सम्राट चौधरी को सुशासन के साथ-साथ सबको साथ लेकर चलने की नीतीश कुमार वाली कला भी सीखनी होगी.