भाई का भूत, बल‍ि पूजा और आजमगढ़ ट्र‍ि‍पल मर्डर… ‘भूत-प्रेत’ से ज्‍यादा भयावय है असली कहानी

भाई का भूत, बल‍ि पूजा और आजमगढ़ ट्र‍ि‍पल मर्डर… ‘भूत-प्रेत’ से ज्‍यादा भयावय है असली कहानी


आज़मगढ़ के शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम एक चौंकाने वाली घटना में 5 लोगों की मौत हो गई. यहां के रहने वाले अरविंद सिंह के घर ‘नारायणी पूजा’ का अनुष्‍ठान हो रहा था. ये पूजा प‍िछले 4 द‍िन से चल रही थी और 22 स‍ितंबर यानी मंगलवार को एकादशी के द‍िन ये अनुष्‍ठान पूरा होने वाला था. पर उससे पहले ही पूजा करा रही बबीता के पति ने ही उसकी और 2 ब्राह्मणों की हत्‍या कर दी. ये पूजा घर की शांति के ल‍िए हो रही थी. क्‍योंकि इस घर को ‘अरविंद के बड़े भाई का भूत’ लगातार परेशान कर रहा था. अरव‍िंद की मां ने बताया कि बड़े बेटे की पहले ही मौत हो चुकी है. अरविंद सिंह के बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की वर्ष 2018 में गांव के मंदिर में पूजा के बाद आयोजित भंडारे के दौरान हत्या कर दी गई थी. जबकि अरव‍िंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी. आज़मगढ़ हत्याकांड को कई लोग तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ चुनौती ये भी है कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की ब‍िगड़ी हुई स्‍थ‍िति को कैसे अब भी हमारे समाज में गंभीरता से नहीं ल‍िया जाता.

अरव‍िंद के घर क्‍या हुआ मंगलवार की रात?
ये बयान अरविंद की मां शमला देवी ने द‍िया है. घर में 4 द‍िनों से पूजा चल रही थी. बड़े भाई की मौत के बाद उसकी भूत घर को परेशान कर रहा था. उसी से परेशान हो ‘नारायणी पूजा’ कराई जा रही थी. अरविंद बाहर से शाम को लगभग 6 बजे घर पहुंचा तो देखा कि घर में पूजा-पाठ चल रहा है. पड़ोस‍ियों ने बताया कि वो नशे में था. देखते ही उसके तन-बदन में जैसे आग लग गई. उसने पूजा करा रहे पंडितों से आधार कार्ड मांगा और पूजा बंद करने को कहा. पर पत्‍नी बबीता (32) ने व‍िरोध क‍िया तो उसने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाली और फायरिंग कर दी. पहले पत्‍नी की हत्‍या की, फिर पंड‍ितों की और अपने तीन बच्चों और खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. अरविंद के 2 बेट‍ियां और एक बेटा था. 1 बेटी तो 6 महीने की थी. जानकारी म‍िलते ही पुलिस यहां आई और अरविंद को 6 घंटे तक समझाती-बुझाती रही और आखिरकार आरोपी का एनकाउंटर कर दिया. इस घटना में अरविंद बबीता के 8 साल के बेटे की भी मौत हुई है, ज‍िसे खुद अरव‍िंद ने गोली मारी.

नारायण बली पूजा क्या होती है?

‘नारायणी पूजा’ को ‘नारायण बली पूजा’ भी कहा जाता है. ये पूजा एक तीन दिवसीय अनुष्ठान है जो महाराष्‍ट्र के नासिक में त्र्यंबकेश्वर में किया जाता है. नारायणी बली पूजन में दो अलग-अलग अनुष्ठान होते हैं. यह पूजा ज्‍यादातर वे लोग करवाते हैं जो अपने पूर्वजों की मोक्ष की कामना करते है. नारायण बलि के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह किसी व्यक्ति को पितृ दोष से छुटकारा दिलाता है, जिसे पितृ श्राप भी कहा जाता है. जो लोग अकाल मृत्‍यु में मरते है जैसे बीमारी से या सांप काटने से, छत से गिरने से, फांसी लगने से, पानी में डूबने से, बिजली के करंट द्वारा अचानक मृत्‍यु हो जाने से, तो उनकी आत्मा भूत-प्रेत के रूप में भटकती रहती है. ऐसी आत्‍माओं की असंतुष्ट इच्छाओ को पूरा करने क लिए नारायण नागबली पूजा की जाती है. नारायणी पूजा विधि एक अंतिम संस्कार में की जाने वाली विधि के सामान है क्‍योंकि यह कहा जाता है की अंतिम संस्कार आत्मा को दूसरी दुनिया से मुक्त करता है.

ऐसी पूजा पितृ पक्ष के दौरान अमावस्या या पितृदा एकादशी जैसी विशिष्ट तिथियों पर की जाती है. गरुड़ पुराण में नारायण बलि को परम “बचाव” अनुष्ठान के रूप में वर्णित किया गया है. ये अनुष्ठान नारायण बलि को पूर्वज के श्राप से मुक्त करने के लिए किया जाता है. इस पूजा में गेंहू के आटे से एक नकली पार्थ‍िव शरीर बनाकर पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि 3 से 4 द‍िनों की इस पूजा में पहले आत्‍मा को इस नकली आटे के शरीर में प्रवेश कराया जाता है और फिर उसका अंतिम संस्‍कार क‍िया जाता है, ताकि आत्‍मा मुक्‍त हो सके. एस्‍ट्रोलॉजर और तंत्र-मंत्र व‍िद्या में पारंगत पंड‍ित मृगेंद्र चौधरी ने बताया कि हालांकि इस पूजा का तंत्र-मंत्र से कोई संबंध नहीं है. इसका ज‍िक्र गरुड़ पुराण में भी है. जब भी घर में क‍िसी की असमय मृत्‍यु होती है, तो ये पूजा आम तौर पर कराई ही जाती है.

भूत-प्रेत और पितृ दोष को लेकर क्या मान्यताएं हैं?

हिंदू धर्म में भूत-प्रेत को आत्मा की एक अधूरी यात्रा/अवस्था माना जाता है, जबकि पितृ दोष को पूर्वजों से जुड़ा कर्म-ऋण या असंतुष्टि बताया जाता है जो परिवार में बाधाएं ला सकता है. गरुड़ पुराण के अनुसार भूत/प्रेत कोई अलग ‘प्रजाति’ नहीं, बल्कि संस्कार-यात्रा का एक चरण है. इसल‍िए इसके उपाय भी भूत-भगाने से ज्यादा संस्कार पूरे करने पर केंद्रित होते हैं. वहीं पितृ दोष की बात करें तो पितृ दोष तब माना जाता है जब पूर्वजों की आत्माएं अप्रसन्न या असंतुष्ट हों या उनसे जुड़े श्राद्ध-तर्पण के संस्कार अधूरे रह गए हों. ऐसा माना जाता है कि प‍ितृ दोष की वजह से घर में आर्थ‍िक कलह, व‍िवाह में परेशानी, काम में बाधा या स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े कष्‍ट बने रहते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष के 15 दिनों में पूर्वजों को खुश करने के ल‍िए भोज कराने की परंपरा है.

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मानसिक स्वास्थ्य पर ध्‍यान देना जरूरी था

आजमगढ़ की घटना एक अहम सवाल खड़ा करती है. अरविंद ने पहले अपनी पत्‍नी को गोली मारी, फिर पूजा करा रहे 2 पंड‍ितों को. फिर तीन बच्‍चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर ल‍िया. मां ने बयान में कहा कि ‘उसका द‍िमाग खराब था.’ यानी अरव‍िंद की मानस‍िक हालत ठीक नहीं थी. शंभूपुर गांव का ये पर‍िवार घर में ‘भूत-प्रेत’ के डर से शांति और न‍िवारण पाने के ल‍िए पूजा-अनुष्‍ठान करा रहा था. लेकिन असली खतरा अरविंद की द‍िमागी हालत थी, जो अपने गुस्‍से पर काबू ही नहीं कर पाया. सामने आ रही खबरें बता रही हैं कि अरविंद को नशे की भी लत थी. घटना के दिन भी वो शराब पीकर घर में आया था. घर की बुजुर्ग महिला शमला देवी को शक था कि घर पर भूत का साया है, पर शायद वो सामने रहते बेटे की शराब की लत और उसकी गुस्‍से स्‍थ‍िति पर ध्‍यान देना जरूरी नहीं समझती थीं.



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