न दवा का खर्च, न कोई मशीन… सफेद कपड़े से सुबह खेत में ऐसे पकड़ें धान का हल्दी रोग

न दवा का खर्च, न कोई मशीन… सफेद कपड़े से सुबह खेत में ऐसे पकड़ें धान का हल्दी रोग


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धान के दानों पर दिखें पीले-नारंगी गोले तो हो जाएं सावधान, जानें बचाव

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धान की फसल में हल्दी रोग यानी फाल्स स्मट से बचाव के लिए सुबह ओस के समय खेत में सफेद कपड़े पहनकर घूमें. अगर कपड़ों पर पीला पाउडर दिखे, तो समझें रोग की शुरुआत हो चुकी है. तुरंत कृषि एक्सपर्ट की सलाह से सही फंगीसाइड का छिड़काव करें. खेत में नाइट्रोजन का संतुलित उपयोग और सही जल प्रबंधन अपनाकर अपनी फसल सुरक्षित रखें.

शाहजहांपुर: धान की फसल में हल्दी रोग यानी फाल्स स्मट से बचाव और समय पर पहचान करने को लेकर एक बेहद आसान और कारगर तरीका सामने आया है. प्रगतिशील किसान ने बताया कि सुबह के समय खेत का दौरा करके इस रोग की शुरुआती स्थिति का आसानी से पता लगा सकते हैं. सुबह ओस के दौरान खेत में सफेद वस्त्र पहनकर घूमने से रोग के लक्षण कपड़ों पर दिख जाते हैं. समय रहते पहचान होने पर फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है. यह तरीका विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है.

बाली निकलते समय बढ़ जाता है हल्दी रोग का खतरा

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि धान की फसल में बाली निकलने के समय हल्दी रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है. सुबह ओस के समय जब किसान खेत से गुजरते हैं तो हवा और पौधों के संपर्क से पीले बीजाणु कपड़ों पर चिपक जाते हैं. यदि कपड़ों पर पीला पाउडर दिखे तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए. इस लक्षण के दिखते ही बिना देरी किए किसी प्रमाणित कृषि वैज्ञानिक या स्थानीय कृषि केंद्र से संपर्क करना चाहिए. एक्सपर्ट की सलाह से सही दवा का छिड़काव करने पर रोग को फैलने से रोका जा सकता है.

पीले-नारंगी गोले बनने लगें तो समझें फसल में है बीमारी

धान का हल्दी रोग फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इस बीमारी में धान के दानों पर पीले या नारंगी रंग के गोले बन जाते हैं, जो बाद में काले पड़ जाते हैं. इससे चावल का दाना खराब हो जाता है और बाजार में उसका सही मूल्य नहीं मिलता है. यदि समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. इसलिए किसानों को इस बीमारी के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए.

सफेद कपड़ों से बिना खर्च के ऐसे करें खेत की जांच

सुबह के समय ओस की बूंदें पौधों पर जमी होती हैं, जिससे बीजाणु आसानी से कपड़ों में चिपक जाते हैं. सफेद कपड़ा या पैजामा इस्तेमाल करने का फायदा यह है कि इस पर पीला रंग तुरंत और स्पष्ट दिखाई देता है. यह जांच करने का बहुत ही सरल और बिना खर्च वाला घरेलू तरीका है. किसी भी महंगे उपकरण या लैब टेस्ट के बिना किसान खुद अपने खेत की स्थिति जान सकते हैं. यह तरीका हर किसान आसानी से आजमा सकता है.

रोग की पुष्टि होते ही बिना सलाह के दवा का छिड़काव न करें

रोग की पुष्टि होते ही किसान को तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए. बाजार से बिना सलाह के कोई भी रसायन खरीदकर छिड़काव करने से बचना चाहिए. हमेशा एक्सपर्ट द्वारा सुझाई गई फंगीसाइड दवा का ही प्रयोग करें. छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि दवा पूरे खेत में समान रूप से पहुंचे. हवा की दिशा और मौसम का ध्यान रखकर ही छिड़काव करना चाहिए. सही समय पर किया गया उपचार फसल को सुरक्षित रखता है और लागत भी कम करता है.

संतुलित खाद-पानी से भी बीमारी के खतरे को कर सकते हैं कम

फसल को इस बीमारी से बचाने के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि सही प्रबंधन भी जरूरी है. खेत में संतुलित मात्रा में खाद और पानी का उपयोग करना चाहिए. अत्यधिक नाइट्रोजन का प्रयोग इस बीमारी को बढ़ावा दे सकता है. खेत को हमेशा साफ-सुथरा रखें और जलभराव की समस्या से बचाएं. फसल चक्र अपनाकर भी इस रोग के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.



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