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Guna News: मध्य प्रदेश के गुना जिले में किसानों ने खाद ना मिलने की वजह से चक्काजाम कर दिया. इससे काफी लंबा ट्रैफिक लग गया और उसी मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी फंस गई. किसानों की तरफ से बताया गया कि खाद उपलब्ध थी, फिर भी उन्हें नहीं दी जा रही है. इसी वजह से उन्होंने यह फैसला लिया है.
गुना में किसानों का प्रदर्शन
Guna News: मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बाघेरी स्थित डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर किसानों के सब्र का बांध टूट गया. बताया जा रहा है कि किसान खाद ना मिलने की वजह से परेशान थे. फर्जीवाड़े से परेशान होकर किसानों ने बाघेरी के मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया. किसान सड़क पर बारिश से बचने के लिए तंबू तानकर डटे रहे. उनके प्रदर्शन के कारण ही एंबुलेंस सहित दर्जनों गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहीं और आम राहगीरों को खासी मशक्कत का सामना करना पड़ा. बाद में मौके पर क्षेत्रीय विधायक ऋषि अग्रवाल पहुंचे, जिन्होंने मौके पर ही अधिकारियों से चर्चा कर किसानों को आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम हट सका.
बताया जा रहा है कि बाघेरी स्थित डबल लॉक केंद्र पर डीएपी और यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को कतारों में खड़ा रखकर खाली हाथ लौटाया जा रहा था. लगातार चक्कर काटने से आक्रोशित किसान दोपहर में मुख्य मार्ग पर आ बैठे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी. प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक हर किसान को आवश्यकतानुसार खाद की बोरियां नहीं मिल जाती हैं. तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगे.
जाम में फंस गई एंबुलेंस
किसानों के इस अचानक उठाए कदम से मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. इसी दौरान एक मरीज को ले जा रही एंबुलेंस भी इस जाम के बीच में फंस गई, जिसे निकालने के लिए काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. मौके पर पहुंचे स्थानीय केंद्र के कर्मचारियों ने समझाकर विरोध शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन उग्र किसान कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे.
बीते दिनों किसान कांग्रेस की पड़ताल में बाघेरी गोदाम के भीतर हजारों कट्टे यूरिया और डीएपी का भौतिक स्टॉक मिला था, जबकि कागजों में सैकड़ों कट्टे कम दर्शाए गए थे. पुराने लॉट का माल गोदाम में सड़ने और नए लॉट के गायब होने से करीब 400 कट्टों की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ था. इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यवस्था सुधारने या निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके बाद आज किसानों को उग्र कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा.