झांसी: 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद झांसी के इतिहास ने अचानक करवट ली. उस समय पूरा बुंदेलखंड और ग्वालियर का इलाका विद्रोह की आग में जल रहा था. रानी की मौत ग्वालियर के पास हुई, जहां तात्या टोपे और अन्य क्रांतिकारी भी अंग्रेजों के खिलाफ डटे हुए थे. यही वजह रही कि लोगों को लंबे समय तक यह लगा कि झांसी पर तुरंत अंग्रेजों का पूरा कब्जा नहीं हो पाया. कुछ समय तक हालात ऐसे रहे कि झांसी सीधे प्रशासन के बजाय ग्वालियर से जुड़े घटनाक्रम और विद्रोह के असर में दिखाई दिया.
रानी की शहादत के बाद झांसी में बदले हालात
शहर में अनिश्चितता का माहौल था. लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि अब शासन किसके हाथ में है. लेकिन यह दौर बहुत लंबा नहीं चला. अंग्रेजों ने तेजी से सैन्य कार्रवाई की और 1858 के आखिर तक झांसी और ग्वालियर दोनों पर दोबारा अपना मजबूत नियंत्रण कायम कर लिया.
सिंधिया राजघराने के अंग्रेजों के साथ आने का पड़ा असर
सिंधिया राजघराना अंग्रेजों के साथ खड़ा हो गया और ग्वालियर भी उनके अधीन आ गया. इसका सीधा असर झांसी पर पड़ा और यहां अंग्रेजी पकड़ मजबूत होती चली गई. इसके बाद झांसी पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और आने वाले कई सालों तक यही व्यवस्था बनी रही.
क्या रानी की मौत के बाद 3 साल तक किसी और के कब्जे में थी झांसी?
अक्सर कहा जाता है कि रानी की मौत के बाद तीन साल तक झांसी किसी और के कब्जे में रहा, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह इलाका तेजी से अंग्रेजों के नियंत्रण में आ चुका था और किसी देसी रियासत का सीधा शासन यहां नहीं था. हां, ग्वालियर की राजनीतिक हलचल का असर जरूर दिखाई देता रहा.
झांसी किले को अंग्रेजों ने बनाया सैन्य ठिकाना
इस दौरान झांसी किले की स्थिति भी पूरी तरह बदल गई. किले को अंग्रेजों ने अपने सैन्य ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. शहर में सख्ती बढ़ गई और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी.
बदला प्रशासन, लागू हुए अंग्रेजी कानून
प्रशासनिक ढांचा भी बदल गया. पुराने राज की जगह अंग्रेजी कानून लागू हुए, नई कलेक्टरी व्यवस्था आई और कर वसूली का तरीका भी बदल गया. आम जनता के लिए यह समय काफी कठिन माना जाता है, क्योंकि एक तरफ बगावत का असर था और दूसरी तरफ अंग्रेजी शासन की सख्ती.
रानी की शहादत के बाद झांसी पर किसका रहा शासन?
कुल मिलाकर, रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद झांसी पर किसी और देसी रियासत का स्थायी शासन नहीं रहा. कुल मिलाकर, रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद झांसी पर किसी और का नहीं बल्कि तेजी से मजबूत होते अंग्रेजी शासन का ही कब्जा रहा.