भूत होते हैं या नहीं… ये ऐसा सवाल है जो गाहे-बगाहे सामने आ ही जाता है. उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के हालिया भूतिया कांड के बाद फिर ये सवाल चर्चा में है. जहां एक व्यक्ति ने भूत के आतंक से निजात के लिए चल रही पूजा के दौरान 4 लोगों की जान ले ली. पुलिस ने एनकाउंटर में आरोपी को भी मार दिया. इस कांड के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कोई इसे भूत के आतंक का ही प्रभाव बता रहा है तो किसी का तर्क है कि आरोपी मानसिक तौर पर परेशान था.
भूत को लेकर विज्ञान और धर्मशास्त्र का अलग-अलग तर्क है. सदियों पहले लिखे गए सनातन धर्म और इस्लाम धर्म के ग्रंथों में भूतों को मान्यता देते हैं, जबिक साइंस हमेशा से इंकार करता है. हैरानी की बात ये है कि साइंटिफिकली भूत होने से इंकार करने के तमाम दावों के बावजूद अमेरिका जैसे देश में में रहने वाले लोग भी भूतों को मानते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के 2021 में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक अमेरिका के 41 प्रतिशत लोगों ने भूतों को मानने का दावा किया था, जबकि 20 प्रतिशत ने ये कहा था कि उन्होंने भूत को देखा है या उन्हें महसूस किया है.
आजमगढ़ में परेशान कर रहा था भाई का भूत!
आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में एक परिवार में महामृत्युंजय का जाप कराया जा रहा था. पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अरविंद की मां के मुताबिक परिवार के बड़े बेटे की 8 साल पहले मौत हो गई थी. तब से परिवार कुछ समस्याओं का सामना कर रहा था. किसी ने सलाह दी थी कि उसी बड़े भाई का भूत ही परेशान कर रहा है. उसकी आत्मा की शांति के लिए ही नारायणी पूजा रखी गई थी.
मंगलवार को अरविंद जब कहीं से घर लौटा तो उसने पत्नी बबिता से पूजा बंद करने को कहा. अरविंद की मां के मुताबिक उसने पत्नी को ही भाई की मौत का कारण बताया. जाप नहीं रोकने पर पहले पंडित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्र को गोली मारी. इसके बाद पत्नी बबिता और बेटे को भी गोली मार दी. बाद में एनकाउंटर में वह भी मारा गया.
तो क्या सच में होते हैं भूत?
भूतों को लेकर सबसे पहली जांच शुरू हुई थी 1882 में लंदन में. दरअसल ये वो दौर था जब बहुत से लोगों ने ये दावे किए कि घर में रखी टेबल अपने आप हिलती है. आवाजें सुनाई देती हैं और भूत दिखते हैं. इससे पहले अमेरिका की फॉक्स सिस्टर्स से दावा कर चुकी थीं कि वह आत्माओं से बातचीत करती हैं. ऐसे दावे करने वाले लोग पढ़े लिखे थे.
ऐसे में वैज्ञानिकों ने इसकी असलियत को परखने के लिए सोसायटी फॉर फिजिकल रिसर्च की स्थापना की. इसमें भूत, आत्मा के होने की जांच की जानी थी. सोसायटी ने कथित भूतिया घरों की जांच की, लोगों से पूछताछ की. यह पता लगाने की कोशिश की जो लोग दावा कर रहे हैं उन्हें कोई धोखा या भ्रम तो नहीं हुआ. हालांकि जांच में इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला कि भूत होते हैं, हालांकि प्रमाण इस बात के भी नहीं थे कि भूत नहीं होते.
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भूतों को लेकर क्या किए गए दावे और जांच में क्या आया?
भूतों को लेकर सबसे बड़ा रिसर्च 2003 में रिचर्ड वाइजमैन ने किया था. इसे ब्रिटिश जनरल ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित किया गया था. इसमें रिसर्च के लिए हैम्पटन कोर्ट पैलेस इंग्लैंड और साउथ ब्रिज वॉल्ट्स को चुना गया. लोगों का दावा था कि यहां पर भूत दिखते हैं या अपनी मौजूदगी का अहसास कराते हैं. रिसर्च टीम को भी ऐसा महसूस हुआ, जब इसकी तह तक पहुंचा गया तो सामने आया कि यहां कोई भूत नहीं था, बल्कि मैग्नेटिक फील्ड में बदलाव की वजह से असामान्य महसूस होता है.
रिसर्च में सैकड़ों लोगों को शामिल किया गया. अपनी जगह पर स्थिर एक टेबल के बारे में लोगों को विश्वास दिलाया गया कि वह हिल रही है. जब लोगों से एक-एक कर पूछा गया तो ज्यादातर ने बताया कि हां टेबल हिली और उन्होंने ऐसा होते देखा. इस प्रयोग से वैज्ञानिकों से साबित किया असल में भूतों को जो लोग मानते हैं उन्हें भूत का होना महसूस होता है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता.
भूत नहीं हैं तो दिखते क्यों है?
साइंस में कई बड़े रिसर्च के माध्यम से ये दावा किया भूत नहीं होते, इसके बाद एक बड़ा सवाल ये था कि आखिर भूत नहीं होते तो दिखते कैसे हैं. वैज्ञानिकों ने इसका कारण स्लीप पैरालिसिस बताया. Pubmed में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक रिसर्च में शामिल 76 प्रतिशत लोगों ने ये माना कि कमरे में किसी भूत की मौजूदगी है. शेष 14 प्रतिशत तो ये भी दावा कर दिया कि उन्होंने अपने ऊपर किसी जीव को बैठे देखा. वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा स्लीप पैरालिसिस की वजह से होता है, जब व्यक्ति की आंखें और दिमाग का कुछ हिस्सा काम करता है, लेकिन कुछ सेकेंड के लिए शरीर नहीं हिल पाता, तब किसी और का होना महसूस होता है.
धर्मशास्त्र भूतों पर क्या कहते हैं?
सनातन धर्म में: हिंदू धर्म के विभिन्न धर्म ग्रंथों में भूत, प्रेत, पिशाच और आत्माओं के बारे में बताया गया है. हालांकि इन्हें एक अस्थायी और कष्टदायक स्थिति के तौर पर दर्शाया गया है. पिंडदान, श्राद्ध और नारायणी पूजा जैसे अनुष्ठान से इससे मुक्ति की बात भी कही गई है. खास तौर से गरुण पुराण में किसी की अकाल मौत होने पर प्रेत योनि मिलने के बारे में बताया गया है. इसके संकेत में कहा गया है कि अगर किसी के पितर या पूर्वज प्रेत योनि में हैं तो परिवार के सदस्यों को सपने में दिख सकते हैं.
इसी तरह श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के 10 वें अध्याय में बताया गया है कि जब ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने भूत-प्रेत और पिशाच का भी निर्माण किया. इसकी महात्मय कथा में धुंधकारी के बारे में बताया गया है जो एक प्रेत है. वह हवा के रूप में भटकता है और रोता है. बाद में कथा सुनकर वह मोक्ष को पाता है. पद्म पुराण में भी भूत योनि की चर्चा है. इसमें एक ब्राह्मण और प्रेत के बीच संवाद कथा है, जिसमें भूत बनने को कर्म का फल बताया गया है. वेदों में भी प्रेत बाधाओं, पिशाचों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है.
इस्लाम धर्म में : मुस्लिम धर्म में भूत यानी इंसान की भटकती आत्मा का अस्तित्व नहीं है. मगर पवित्र ग्रंथ कुरान और हदीस में जिन्न और शैतान नाम की ताकतों का जिक्र है. बोलचाल या लोककथाओं में कई बार इन्हें भूतों के समकक्ष ही माना जाता है. कुरान शरीफ के सूरह अल जिन्म में जिन्न के बारे में बताया गया है. इसके मुताबिक जिन्न अल्लाह द्वारा आग से बनाए गए ऐसे प्राणी हैं, जिनकी इंसानों की तरह ही इच्छा होती है. इसके अलावा मरने वाले लोगों की आत्मा के बारे में मान्यता है कि यह बरजख यानी निश्चित लोक में चली जाती है. वहां से वापस नहीं आ सकती.