Smart Weather Forecast: जब भी बारिश का मौसम होता है तो अक्सर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. अगर कोई घर से बाहर जा रहा है तो उसे चिंता होती है कि कहीं सड़कों पर पानी न भरा हो, कहीं जलभराव के चलते जाम न लगा हो, अगला चौराहा पैदल पार करने लायक होगा या नहीं. जबकि जो लोग घर में रहते हैं उन्हें भी टेंशन रहती है कि आज बारिश का मौसम तो हो रहा है, कपड़े बाहर बालकनी में सुखाऊं या नहीं, कहीं ऐसा न हो बारिश आ जाए और सारे कपड़े भीग जाएं, मेहनत पानी में चली जाए, इत्यादि… लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है.
इन्हीं रोजमर्रा के सवालों और छोटी-छोटी चिंताओं का अब पहले ही आपको सटीक जवाब मिल जाएगा. बारिश का मौसम हो या बेमौसम बरसात हो, अब किसी भी समय में आपके काम ठप नहीं होंगे, बल्कि पहले से भविष्यवाणी जानकर आप प्लानिंग कर सकेंगे. सबसे अच्छी बात है कि आप सिर्फ ये नहीं जानेंगे कि आपके इलाके में बारिश होगी या नहीं, बल्कि ये भी जान सकेंगे कि आपके इलाके में इसका क्या असर होगा. क्या आपके इलाके की सड़कें पानी से लबालब हो जाएंगी या निकलने लायक रहेंगी.
इन्हीं सवालों को ध्यान में रखते हुए वड़ोदरा के रहने वाले एक प्रोफेसर ने नया सिस्टम बनाया है वेकास्ट. उनका स्मार्ट मौसम पूर्वानुमान सिस्टम न केवल बारिश की संभावना बताएगा बल्कि यह भी बताएगा कि बारिश का असर किसी खास जगह पर क्या होगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक वेकास्ट (WayCast) प्लेटफॉर्म को एमएस यूनिवर्सिटी के पूर्व भूविज्ञान प्रोफेसर धनंजय संत ने विकसित किया है. यह वेकास्ट इलाके की बनावट, बारिश के आंकड़ों और जल निकासी की जानकारी का इस्तेमाल करके उन सड़कों और चौराहों की पहचान करता है जहां पानी जमा होने की आशंका ज्यादा है.
संत फिलहाल बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में एडजंक्ट प्रोफेसर हैं. उन्होंने कहा, “सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बारिश होगी या नहीं. असल सवाल यह है कि जिस जगह मैं खड़ा हूं, उस जगह पर मौसम का असर क्या होगा?”
उन्होंने आगे कहा कि वेकास्ट जैसे औजार जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों और नागरिक खतरों की पहचान करने में मदद करते हैं. शहरों में निचले इलाकों, खराब ड्रेनेज वाली सड़कों और बार-बार डूबने वाले जंक्शनों को पहले से चिह्नित किया जा सकता है. इससे लोग अपने रूट बदल सकते हैं, यात्रा की योजना बेहतर बना सकते हैं और अनावश्यक परेशानी से बच सकते हैं.
प्रोफेसर कहते हैं कि आजकल मौसम का पैटर्न बदल रहा है. छोटी अवधि में भारी बारिश हो रही है, जिससे सड़कें, अंडरपास और निचले इलाके जल्दी जलमग्न हो जाते हैं. जलवायु का असर है कि कभी भी बारिश हो जाती है. आमतौर पर पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान सिर्फ क्षेत्रीय स्तर पर बारिश की संभावना बताते हैं. लेकिन स्मार्ट सिस्टम लोकल स्तर पर काम करते हैं. वे बताते हैं कि आपकी गली, आपके रूट या आपके घर के पास पानी कितना जमा हो सकता है. आपके मोहल्ले में कब बारिश हो सकती है.
वे बताते हैं कि इससे आम नागरिकों के साथ-साथ प्रशासन को भी फायदा होता है. जलभराव वाले हॉटस्पॉट पहले से पता चल जाएं तो सफाई, ड्रेनेज सुधार और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर तरीके से की जा सकती है. लोग भी तय कर सकते हैं कि कब बाहर निकलना सुरक्षित है और कब घर पर रहना बेहतर है.