N Chandrasekaran Success Lessons : जिंदगी में हम अक्सर दूसरों से आगे निकलने की जल्दी में रहते हैं. किसी की नौकरी हमसे अच्छी है, किसी की सैलरी ज्यादा है, कोई हमसे पहले घर खरीद रहा है तो कोई अपने करियर में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में हमें लगता है कि हम पीछे छूट रहे हैं. लेकिन क्या जिंदगी वाकई दूसरों से आगे निकलने की रेस है? टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की मानें तो बिल्कुल नहीं.
हाल ही में चेन्नई के साई यूनीवर्सिटी (SAI University) के दीक्षांत समारोह में युवाओं से बात करते हुए चंद्रशेखरन ने जिंदगी को 100 मीटर की रेस नहीं, बल्कि मैराथन बताया. एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “Life is a marathon race, not a sprint.”. उनका कहना था कि असली मकसद दूसरों को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि हर दिन खुद को बेहतर बनाना है. उन्होंने खेल और जिंदगी के बीच तुलना करते हुए तैयारी, मेहनत, धैर्य और उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने की बात कही.
टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की ये 6 बातें जो लाइफ के हर रेस में जीतने का देगी मंत्र.
खास बात यह है कि चंद्रशेखरन खुद करीब 18 साल से रनिंग कर रहे हैं. यानी मैराथन की उनकी बात सिर्फ मोटिवेशनल लाइन नहीं, बल्कि उनके अपने अनुभव से भी जुड़ी है. तो उनकी बताई इन बातों को अपनी जिंदगी में कैसे उतारा जा सकता है?
टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की कही गई 6 बातें जाे आपको जीवन में बनाएगी सफल-
दूसरों से आगे निकलने के बजाय खुद को बेहतर बनाएं
हमारी सबसे बड़ी परेशानी कई बार यही होती है कि हम अपनी रफ्तार की तुलना किसी और से करने लगते हैं. सोशल मीडिया ने तो यह आदत और बढ़ा दी है. कोई प्रमोशन पा रहा है, कोई विदेश घूम रहा है और कोई बिजनेस शुरू कर रहा है. चंद्रशेखरन का संदेश इससे बिल्कुल अलग है. उनके मुताबिक जिंदगी का लक्ष्य दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि हर दिन खुद को बेहतर बनाना होना चाहिए. यानी आज आप कल से थोड़ा बेहतर हैं या नहीं, असली मुकाबला यही है.
मुश्किल दौर से घबराइए मत
जिंदगी में हमेशा सब कुछ हमारे हिसाब से नहीं चलता. कभी करियर में परेशानी आती है, कभी रिश्तों में तनाव होता है और कभी मेहनत के बावजूद मनचाहा नतीजा नहीं मिलता. चंद्रशेखरन ने भी जिंदगी के उतार-चढ़ाव को सामान्य हिस्सा बताया. उनकी सलाह है कि बुरे दौर से डरने के बजाय उसका सामना करना सीखना चाहिए. क्योंकि मैराथन में भी हर किलोमीटर एक जैसा आसान नहीं होता. कहीं रफ्तार कम करनी पड़ती है तो कहीं अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ती है.
आत्मविश्वास जरूरी है, लेकिन अहंकार नहीं
सफलता मिलने के बाद खुद पर भरोसा बढ़ना स्वाभाविक है. लेकिन यही भरोसा अगर अहंकार में बदल जाए तो परेशानी शुरू हो सकती है. चंद्रशेखरन ने युवाओं को खास तौर पर यह समझाया कि अच्छे दौर में आत्मविश्वास को अहंकार में नहीं बदलना चाहिए. यानी सफलता मिले तो खुश रहिए, अपनी उपलब्धियों पर गर्व कीजिए, लेकिन जमीन से जुड़े रहना मत भूलिए.
जीत से ज्यादा तैयारी पर ध्यान दें
आज हम नतीजे जल्दी चाहते हैं. मेहनत शुरू की और तुरंत सफलता मिल जाए, ऐसा हर किसी को लगता है. लेकिन मैराथन हमें सिखाती है कि लंबी दौड़ के लिए तैयारी जरूरी है. चंद्रशेखरन ने भी कहा कि खेल और जिंदगी दोनों में सिर्फ जीत ही महत्वपूर्ण नहीं है. तैयारी के लिए पूरी मेहनत और इच्छाशक्ति लगाना ज्यादा जरूरी है. अगर आपकी तैयारी मजबूत है तो मुश्किल परिस्थितियों में भी टिके रहना आसान हो जाता है.
दबाव को जिंदगी का हिस्सा समझें
काम, पढ़ाई, परिवार या करियर… दबाव किसी न किसी रूप में हर किसी की जिंदगी में आता है. ऐसे में हर बार तनाव से भागने की कोशिश करना शायद समाधान नहीं है. चंद्रशेखरन ने युवाओं से कहा कि दबाव को लेकर डरने के बजाय उसे स्वीकार करना सीखना चाहिए. उनकी बात का सार यही है कि जिम्मेदारियां और चुनौतियां आपकी क्षमता को आजमाने का मौका भी देती हैं.
अपनी रेस खुद दौड़िए
यह शायद उनकी सीख का सबसे आसान और सबसे काम का हिस्सा है. किसी दूसरे की जिंदगी देखकर अपनी रफ्तार तय करने की जरूरत नहीं है. चंद्रशेखरन पहले भी मैराथन से मिली सीख बताते हुए कह चुके हैं कि आपको अपनी परिस्थिति के हिसाब से अपनी रेस दौड़नी चाहिए और दूसरे की रेस से विचलित नहीं होना चाहिए. हर व्यक्ति की क्षमता, परिस्थितियां और लक्ष्य अलग होते हैं. इसलिए किसी और की गति को अपनी सफलता का पैमाना बनाना सही नहीं होगा.
जिंदगी में रफ्तार नहीं, निरंतरता मायने रखती है
एन चंद्रशेखरन की इन बातों को अगर एक लाइन में समझें तो संदेश बेहद सीधा है– जिंदगी में हर समय तेज भागना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि आप रुकें नहीं.
कभी रफ्तार कम होगी, कभी रास्ता मुश्किल लगेगा और कभी लगेगा कि बाकी लोग आपसे बहुत आगे निकल गए हैं. लेकिन अपनी तैयारी, मेहनत और लक्ष्य पर भरोसा बनाए रखेंगे तो सफर आसान लगने लगेगा. आखिर मैराथन में वही व्यक्ति लंबे समय तक टिकता है जो सिर्फ तेज भागना नहीं, बल्कि सही रफ्तार से लगातार चलते रहना जानता है.