उत्तर प्रदेश में देर रात 34 सीनियर आईएएस अधिकारियों का तबादला हो गया. इनमें कई जिलों के डीएम के साथ ही विभागों के सचिव तक का नाम शामिल है. IAS यानी कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और IPS यानी कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों का चयन देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) के जरिए होता है. लेकिन चयन के बाद इनकी फील्ड पर पोस्टिंग, एक विभाग से दूसरे विभाग में फेरबदल और ट्रांसफर को लेकर एक निश्चित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया होती है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इन ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों के तबादले कौन करता है और इसके पीछे के नियम क्या हैं?
IAS और IPS की पोस्टिंग और ट्रांसफर के लिए मुख्य नियम क्या हैं?
भारत में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के कैडर और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने के लिए खास नियम बनाए गए हैं. आइए उन पर एक नजर डालते हैं.
- IAS कैडर नियम, 1954: इसके तहत प्रत्येक IAS अधिकारी को एक खास राज्य कैडर आवंटित किया जाता है. वह उसी राज्य के प्रशासनिक ढांचे के अधीन काम करता है.
- IPS कैडर नियम, 1954: आईएएस की तरह ही इसी तरह से आईपीएस अधिकारियों के लिए भी नियम तय हैं.
- न्यूनतम कार्यकाल का नियम: साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद केंद्र सरकार (DoPT) ने नियमों में संशोधन किया था. इसके तहत अमूमन किसी भी IAS या IPS अधिकारी का न्यूनतम कार्यकाल 2 साल का होना चाहिए, ताकि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वतंत्र रूप से काम कर सकें.
किसके आदेश पर होता है अधिकारियों का तबादला?
अधिकारियों के तबादले की शक्ति इस बात पर निर्भर करती है कि वे वर्तमान में राज्य सरकार के अधीन काम कर रहे हैं या फिर केंद्र सरकार के पास डेप्युटेशन पर हैं.
- राज्य के अंदर ही तबादले: राज्य के अंदर ही इंट्रा स्टेट ट्रांसफर किसी जिले के जिलाधिकारी, डीएम, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP), सचिव या अन्य प्रशासनिक पदों पर तैनाती और ट्रांसफर का अधिकार राज्य सरकार मंत्रिपरिषद के पास होता है. इन आदेशों पर अंतिम मुहर अमूमन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) या फिर संबंधित विभाग की संस्तुति के बाद लगती है.
- केंद्रीय डेप्युटेशन पर तबादले: जब कोई IAS या IPS अधिकारी सेंट्रल डेप्युटेशन पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों या विभागों में सेवा देने जाते हैं, तो उनके तबादले और नियुक्तियां अपॉइंटमेंट कमिटी ऑफ कैबिनेट (ACC) यानी कैबिनेट की नियुक्ति समिति की तरफ से तय किए जाते हैं. इसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं.
सिविल सर्विसेज बोर्ड की क्या भूमिका होती है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश के हर राज्य में सिविल सर्विसेज बोर्ड (CSB) का गठन किया गया है. इस बोर्ड के अध्यक्ष राज्य के मुख्य सचिव होते हैं. इसके अलावा इसमें प्रदेश के अन्य सीनियर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी IAS के मामले में गृह सचिव और IPS के मामले में डीजीपी शामिल होते हैं.
किसी भी अधिकारी का समय से पहले तबादला यानी 2 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले यूं ही नहीं किया जा सकता. अगर न्यूनतम कार्यकाल से पहले ट्रांसफर करना जरूरी हो, तो सिविल सर्विसेज बोर्ड की सिफारिश और लिखित वजहों का होना जरूरी है. हालांकि प्रैक्टिकल रूप से यह बोर्ड अपनी रिकमेंडेशन देता है लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री का ही होता है.
क्या तबादले के लिए कोई विशेष नियम या अपवाद भी हैं?
हां, कुछ खास परिस्थितियों में नियमों के तहत ट्रांसफर किए जा सकते हैं:
- प्रशासनिक जरूरत: कानून-व्यवस्था बिगड़ने, प्राकृतिक आपदा या किसी आपात स्थिति में सरकार तुरंत प्रभाव से अधिकारी का ट्रांसफर कर सकती है.
- प्रमोशन: अगर किसी अधिकारी का प्रमोशन होता है, तो नई जिम्मेदारी के अनुसार उसकी पोस्टिंग भी बदल दी जाती है.
- खुद के अनुरोध पर: स्वास्थ्य संबंधी गंभीर वजह या फिर पति-पत्नी (दोनों के ऑल इंडिया सर्विस में होने पर) के मामलों में नियमों के तहत कैडर ट्रांसफर या जिले में बदलाव के अनुरोध पर विचार किया जाता है.
नियमों की मुख्य बात करें तो सरकार के पास तबादलों का अंतिम अधिकार होता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के चलते अब सरकारों को बार-बार और बिना ठोस वजह के अधिकारियों के तबादले करने से रोकने के लिए सिविल सर्विस बोर्ड की पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी बनाया गया है.
यूपी में कैसा ट्रांसफर?
उत्तर प्रदेश में सोमवार देर रात हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में 34 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं. इस फेरबदल में कानपुर नगर, हरदोई, मुरादाबाद, एटा, अमेठी, कुशीनगर, संतकबीरनगर, पीलीभीत, बलिया, बागपत, महोबा, बिजनौर, हाथरस और हमीरपुर के डीएम बदले गए हैं. वहीं कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद तथा पंचायती राज जैसे अहम विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों का भी ट्रांसफर हुआ है.