नई दिल्ली: क्रिकेट के खेल में संयम का बहुत महत्व है. सही समय पर सही शॉट सिलेक्शन या फिर सही पिच पर सटीक गेंद जिस खिलाड़ी ने डाल दी, समझो उसने बाजी मार ली. लेकिन अगर किसी खिलाड़ी ने जल्दबाजी दिखाई और गुस्से में फैसला लिया, तो वह न सिर्फ मैदान पर नाकाम होगा बल्कि उसके करियर पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा. ऐसे ही एक खिलाड़ी भारत के अंबाती रायुडू रहे. अंबाती रायुडू को फैंस जितना उनके खेल के लिए जानते हैं, उससे कहीं ज्यादा वह अपने गुस्से और बगावती तेवर को लेकर सुर्खियों में रहे.
बीसीसीआई का बैन हो, वर्ल्ड कप टीम में जगह न मिलने पर संन्यास का ऐलान या फिर सड़क पर गुस्से में आकर मारपीट जैसी घटनाएं, ये सभी चीजें बेशक उनकी छवि को धूमिल करती हैं, लेकिन सच यह भी है कि रायुडू एक बेहतरीन क्रिकेटर भी रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं उनके 41वें जन्मदिन पर उनकी क्रिकेट और पर्सनल लाइफ से जुड़ी कुछ अहम बातें.
भारत के लिए 61 इंटरनेशनल मैच खेले हैं रायुडू
अंबाती रायुडू टीम इंडिया के लिए कुल 55 वनडे और 6 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में मैदान पर उतरे. टीम इंडिया के लिए रायुडू का करियर और भी लंबा हो सकता था, लेकिन अपने गर्म मिजाज के कारण उन्होंने हमेशा अपना नुकसान किया. यही कारण है कि साल 2019 विश्व कप के लिए जब टीम का चयन किया गया, तो सबसे ज्यादा चर्चा रायुडू के नाम की ही हुई थी.
रायुडू मध्यक्रम में टीम इंडिया के सबसे प्रबल दावेदार थे, लेकिन जब टीम की घोषणा हुई तो उनका नाम नदारद था. रायुडू की जगह टीम में ऑलराउंडर विजय शंकर को शामिल किया गया. इस बात से रायुडू इतने नाराज हुए कि उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया.
बीसीसीआई से बगावत पड़ी रायुडू को भारी
रायुडू को जब टीम इंडिया में जगह नहीं मिली, तो उन्होंने बीसीसीआई के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए. इसका परिणाम उनके लिए क्या होने वाला था, यह सबको पता था. हालांकि, जब उन्हें पूर्व क्रिकेटरों की समझाइश मिली, तो उन्होंने संन्यास से वापसी की घोषणा की और एक बार फिर खुद को घरेलू क्रिकेट के लिए तैयार कर नेशनल टीम में वापसी की कोशिश की, लेकिन 2019 वनडे विश्व कप की घटना के बाद टीम इंडिया में वापसी के दरवाजे उनके लिए हमेशा के लिए बंद हो चुके थे.
बीसीसीआई ने किया था अंबाती रायुडू को बैन
बहुत कम लोगों को पता है कि अंबाती रायुडू को बीसीसीआई ने बैन भी किया था. यह घटना साल 2007 की है, जब वह बागी क्रिकेट लीग यानी इंडियन क्रिकेट लीग (ICL) में खेलने चले गए थे. इंडियन क्रिकेट लीग को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली थी. इस लीग की काट के रूप में ही साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत की गई, जो आज दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय हो चुकी है.
रायुडू आईसीएल का हिस्सा थे, ऐसे में बीसीसीआई ने इस लीग से जुड़े सभी खिलाड़ियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इस लीग से जुड़ा कोई भी खिलाड़ी बीसीसीआई के अंतर्गत आने वाले टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं ले सकता था. हालांकि, बाद के वर्षों में बीसीसीआई की माफी योजना के तहत उनकी यह गलती माफ कर दी गई और वह फिर से घरेलू क्रिकेट में खेलने लगे.