टाटा की इस कंपनी में बेटियों का राज, 1.5 लाख नौकरियां और 65% सिर्फ महिलाएं

टाटा की इस कंपनी में बेटियों का राज, 1.5 लाख नौकरियां और 65% सिर्फ महिलाएं


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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों की बेटियों को सही मंच, आधुनिक प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे दुनिया की सबसे पेचीदा तकनीकों को अपनी उंगलियों पर नचा सकती हैं. 1.5 लाख नौकरियों में 65% महिलाओं की भागीदारी केवल एक कॉरपोरेट उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की असली तस्वीर है.

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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की इस महिला ब्रिगेड में से अधिकांश महिलाएं और लड़कियां देश के सुदूर, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से ताल्लुक रखती हैं. (Photo : AI)

नई दिल्‍ली. जब भारत में अत्याधुनिक तकनीक, स्मार्टफोन निर्माण और सेमीकंडक्टर चिप्स की बात होती है, तो आमतौर पर हाई-टेक लैब्स और विदेशी विशेषज्ञों की छवि सामने आती है. लेकिन टाटा समूह ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. समूह की कंपनी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) आज केवल भविष्य की तकनीक नहीं गढ़ रही, बल्कि देश के सामाजिक ढांचे में एक मौन क्रांति की नींव रख रही है. टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स अब तक देश में 1,50,000 से अधिक डायरेक्‍ट जॉब्‍स पैदा की हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स की वर्कफोर्स में 65 फीसदी से ज्‍यादा महिलाएं हैं.

हाल ही में हुए सेमीकॉन इंडिया (SEMICON India) में उद्योग जगत के दिग्गज जुटे, तब टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ रणधीर ठाकुर ने कंपनी के इस विजन और आंकड़ों को दुनिया के सामने रखा. रणधीर ठाकुर ने जोर देकर कहा कि टाटा समूह भविष्य की तैयारी सिर्फ मशीनों से नहीं, बल्कि इंसानी क्षमता के दम पर कर रहा है. सीईओ रणधीर ठाकुर ने भविष्य का खाका खींचते हुए कहा, “आज हम जो फैक्ट्रियां बना रहे हैं, वे कल आपके काम करने की जगह बनेंगी.” ठाकुर ने वर्कफोर्स में महिलाओं को प्राथमिकता देने पर कहा कि यह आंकड़ा महज कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का परिणाम है. कंपनी को भारत की बेटियों के हुनर और लगन पर भरोसा है.

गांवों से निकलकर बना रही हाई टेक तकनीक

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की इस महिला ब्रिगेड की सबसे खूबसूरत बात उनकी पृष्ठभूमि है. इनमें से अधिकांश महिलाएं और लड़कियां देश के सुदूर, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से ताल्लुक रखती हैं. जिन परिवारों में पीढ़ियों से बेटियों के भविष्य के दायरे सीमित थे, आज वे बेटियां आधुनिक असेंबली लाइनों पर एप्रन और हेड कैप पहनकर दुनिया के सबसे संवेदनशील गैजेट्स तैयार कर रही हैं.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इन महिलाओं को विशेष तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण (Specialized Training) देकर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स के लिए तैयार कर रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे जटिल क्षेत्रों में जहां माइक्रोस्कोपिक सटीकता, असाधारण एकाग्रता और कड़े प्रोसेस डिसिप्लिन की जरूरत होती है, वहां इन महिला कर्मचारियों ने खुद को बेजोड़ साबित किया है.

तमिलनाडु से कर्नाटक तक: बेटियों के हाथ में iPhone और चिप की कमान

कंपनी के विभिन्न विनिर्माण संयंत्रों में महिला शक्ति का दबदबा साफ देखा जा सकता है. तमिलनाडू के होसूर में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का सबसे बड़ा और पूरी तरह से चालू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग प्लांट है. यहां मुख्य रूप से आईफोन (iPhone) के कंपोनेंट्स और पार्ट्स बनाए जाते हैं. इस फैक्‍टरी में हजारों ग्रामीण महिलाएं दिन-रात काम करती हैं.
कर्नाटक के कोलार और बेंगलुरु के जिगानी में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के कारखाने और कार्यालय संचालित हैं. कोलार प्लांट में भी बड़े पैमाने पर महिलाएं काम कर ही हैं. यहां एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मेकिंग जैसे पेचीदा कार्य होते हैं.

टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स गुजरात के धोलेरा में ताइवान की दिग्गज कंपनी पीएसएमसी (PSMC) के सहयोग से देश की पहली विशाल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) फैक्ट्री लगा रही है. असम में टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (TSAT) के तहत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग यूनिट स्थापित कर रही है. इन फैक्‍टरियों में भी महिलाओं का दबदबा देखने को मिलेगा.



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