UPI पेमेंट पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सियासी घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब विपक्ष के सवालों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MDR को लेकर सरकार का रुख साफ किया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को साफ किया कि नए MDR नियमों का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्राहक पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के यूपीआई से भुगतान कर सकेंगे. वित्त मंत्री ने यह बात समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान कही.
वित्त मंत्री के मुताबिक MDR को लेकर लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह कोई टैक्स या सेस नहीं है और इससे मिलने वाला पैसा केंद्र सरकार के खाते में नहीं जाएगा. यह पेमेंट सिस्टम से जुड़े सर्विसेस प्रोवाइडर्स के बीच लगने वाला चार्ज है, जिसका इस्तेमाल सिस्टम को बेहतर बनाने और सेवाओं में सुधार के लिए किया जाता है.
2000 रुपये से कम के पेमेंट पर कोई MDR नहीं
नए नियमों के तहत 2,000 रुपये तक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा. वहीं, 2,000 रुपये से ज्यादा के पर्सन टू मर्चेंट (Person-to-Merchant) यानी P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है.
सबसे अहम बात यह है कि इस चार्ज का भुगतान ग्राहक नहीं करेगा. यानी अगर कोई व्यक्ति किसी दुकान या कारोबारी को यूपीआई से पैसे देता है, तो उससे अलग से MDR नहीं वसूला जाएगा. यह चार्ज पेमेंट से जुड़े बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स के बीच तय व्यवस्था के तहत बांटा जाएगा.
करीब 96% लेन-देन पर नहीं पड़ेगा असर
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को MDR से जुड़ा नया फ्रेमवर्क पेश किया था. सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे. यानी बड़ी संख्या में यूपीआई पेमेंट पहले की तरह बिना किसी चार्ज के जारी रहेंगे.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स समझना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि यह राशि कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया (Consolidated Fund of India) में जमा नहीं होगी. इसका मकसद पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल कंपनियों और बैंकों के बीच शुल्क की व्यवस्था करना है.
विपक्ष पर वित्त मंत्री का पलटवार
यूपीआई चार्ज के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर भी वित्त मंत्री ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संसद के सत्र के दौरान भी उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया था. उनके मुताबिक इसके बावजूद इस विषय को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करें. वित्त मंत्री ने कहा कि गलत जानकारी के आधार पर बहस करने से आम लोगों के बीच बेवजह भ्रम पैदा होता है.
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भी बोलीं वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया. वहां हुई कथित नकल और मजाक पर उन्होंने आपत्ति जताई. वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी है, लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़े कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जाना चाहिए.
सेक्टर के हित से आगे सोचें
बेंगलुरु में आयोजित 8वें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि टैक्स सुधारों का मकसद किसी एक सेक्टर के फायदे तक सीमित नहीं होना चाहिए. सरकार को ऐसी टैक्स व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए जो निष्पक्ष और भरोसेमंद हो, ताकि देश में निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने कहा कि टैक्स से जुड़े मुद्दों पर लोगों के बीच स्वतंत्र और तथ्य आधारित रिसर्च को बढ़ावा मिलना चाहिए. उन्होंने टैक्स एक्सपर्ट्स से अपील की कि वे अपने काम में देश के व्यापक हित को प्राथमिकता दें.